सरकार ने अग्रिम प्राधिकार योजना के तहत शुल्क मुक्त सोने के आयात को विनियमित करने के उद्देश्य से 100 किलो तक सीमित कर नियमों को और सख्त बना दिया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
भारत सरकार ने देश के आभूषण निर्यात क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और सोने के आयात को विनियमित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने घोषणा की है कि अब 'अग्रिम प्राधिकार योजना' के तहत शुल्क मुक्त सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की अधिकतम सीमा लागू होगी। यह योजना निर्यातकों के लिए अत्यंत लाभकारी है क्योंकि यह उन्हें बिना किसी सीमा शुल्क के कच्चे माल के रूप में सोना आयात करने की अनुमति देती है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आभूषण तैयार कर सकें।
इस नए संशोधन से पहले इस योजना के अंतर्गत सोने के आयात पर कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं थी, जिसके कारण बड़े निर्यातक अपनी आवश्यकतानुसार भारी मात्रा में सोना मंगा सकते थे। हालांकि, नई सार्वजनिक सूचना के अनुसार अब किसी भी निर्यातक को एक बार में 100 किलोग्राम से अधिक सोना शुल्क मुक्त मंगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का यह कदम देश के व्यापार घाटे को प्रबंधित करने और सोने के आयात के माध्यम से होने वाली किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
नीति को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डीजीएफटी ने पहली बार आवेदन करने वाले निर्यातकों के लिए विनिर्माण संयंत्रों का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत क्षेत्रीय अधिकारी कंपनी की परिचालन स्थिति और वास्तविक उत्पादन क्षमता का मौके पर जाकर पता लगाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन 'शेल कंपनियों' या कागजी फर्मों की पहचान करना और उन्हें रोकना है, जो केवल सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने के लिए बनाई जाती हैं। भौतिक सत्यापन से यह सुनिश्चित होगा कि आयातित सोना वास्तव में पंजीकृत फैक्ट्री में ही पहुंच रहा है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि निर्यातक के पास सोने के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक आधुनिक मशीनरी और कुशल कार्यबल उपलब्ध है या नहीं। सरकार का मानना है कि इस स्तर की कड़ाई से केवल वास्तविक और ईमानदार निर्यातकों को ही प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय आभूषणों की साख और भी मजबूत होगी। साथ ही, क्षेत्रीय कार्यालयों को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे अपने द्वारा किए गए निरीक्षणों और जारी किए गए लाइसेंसों की विस्तृत मासिक रिपोर्ट सीधे निदेशालय को भेजें।
निर्यात की गति को बनाए रखने के लिए सरकार ने 'निर्यात दायित्व' (Export Obligation) से जुड़े नियमों को भी कड़ा किया है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई कंपनी दोबारा शुल्क मुक्त सोने के आयात के लिए आवेदन करना चाहती है, तो उसे अपने पिछले आवंटित टारगेट का कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात सफलतापूर्वक पूरा करना होगा। यदि कोई निर्यातक इस लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहता है, तो उसे अगले आयात के लिए प्राधिकार पत्र जारी नहीं किया जाएगा। यह नियम सुनिश्चित करता है कि आयातित सोने का उपयोग समयबद्ध तरीके से निर्यात के लिए ही हो रहा है।
इसके अलावा, रिपोर्टिंग तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निर्यातकों को अब पाक्षिक (Fortnightly) आधार पर अपनी प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह रिपोर्ट एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित होनी आवश्यक है। इन कड़े सुरक्षा उपायों और निगरानी तंत्र के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अग्रिम प्राधिकार योजना का प्रत्येक ग्राम सोना राष्ट्र की आर्थिक प्रगति और विदेशी मुद्रा भंडार की वृद्धि में योगदान दे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से दीर्घावधि में भारतीय स्वर्ण और आभूषण क्षेत्र में अधिक संगठित और जिम्मेदार व्यावसायिक वातावरण तैयार होगा।[1]
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। व्यापारिक और निर्यात संबंधी नियमों के विस्तृत एवं तकनीकी स्पष्टीकरण के लिए पाठकों को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेजों का संदर्भ लेना चाहिए। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी व्यावसायिक या वित्तीय निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।