नगरपालिका प्रशासन अधिशासी अधिकारी रणजीत सिंह के नेतृत्व में रात्रिकालीन और दिन की सफाई व्यवस्था के जरिए शहर को कचरा मुक्त बनाने में जुटा है।
कचरा संग्रहण करते कार्मिक
नीम का थाना (शिम्भु सिंह शेखावत)। शहर की सुंदरता और नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए नगरपालिका प्रशासन वर्तमान में पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आ रहा है। अधिशासी अधिकारी रणजीत सिंह के कुशल मार्गदर्शन में शहरभर में एक विशेष स्वच्छता अभियान छेड़ा गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर के हर कोने को कचरा मुक्त बनाना और सफाई व्यवस्था को एक व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करना है। नगरपालिका की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से उन क्षेत्रों को चिह्नित किया है जहाँ कचरे का दबाव सबसे अधिक रहता है। प्रशासन की इस सक्रियता ने शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्रों और रिहायशी इलाकों में एक सकारात्मक बदलाव की लहर पैदा की है।
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी निरंतरता है। अधिशासी अधिकारी के निर्देशों के अनुसार, शहर में केवल दिन के समय ही नहीं बल्कि रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था को भी प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों जैसे छावनी स्टैंड, खेतड़ी मोड़ और सुभाष मंडी में दिनभर आवाजाही अधिक होने के कारण सफाई कार्य चुनौतीपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए देर रात भी सफाई कर्मियों की टीमें कचरा संग्रहण के कार्य में जुटी रहती हैं। इसके अलावा कपिल मंडी, रामलीला मैदान और भूदौली रोड जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी नियमित रूप से कचरा उठवाया जा रहा है ताकि सुबह होते ही शहर साफ-सुथरा नजर आए।
सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नगरपालिका ने संसाधनों का बेहतरीन प्रबंधन किया है। कचरा संग्रहण के लिए ट्रैक्टरों और ऑटो टिपरों की तैनाती अलग-अलग समय पर की गई है ताकि कचरा अधिक समय तक सड़क पर न पड़ा रहे। प्रशासन द्वारा निर्धारित समय सारणी के अनुसार सुबह 2 ट्रैक्टर कार्य करते हैं, जबकि सुबह 11 बजे 2 ट्रैक्टर और 2 ऑटो टिपर कचरा उठाते हैं। दोपहर 2 बजे पुन: 2 ट्रैक्टरों को काम पर लगाया जाता है। इसी प्रकार शाम 6 बजे और देर रात्रि में भी 2-2 ट्रैक्टर निरंतर कचरा संग्रहण सुनिश्चित कर रहे हैं। संसाधनों का यह विभाजन यह सुनिश्चित करता है कि दुकानों और घरों से निकलने वाला कचरा तुरंत हटाया जा सके।
नगरपालिका प्रशासन ने उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है जो शहर की आर्थिक गतिविधियों के केंद्र हैं। बाजारों और मुख्य सड़कों पर अक्सर दुकानों से निकलने वाला कचरा बड़ी समस्या बनता है। अभियान के तहत इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि डंपिंग पॉइंट पर कचरा एकत्रित न हो। अधिशासी अधिकारी रणजीत सिंह स्वयं इन कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे कचरा निर्धारित पात्रों में ही डालें। प्रशासन का लक्ष्य है कि शहर के प्रमुख बाजारों में गंदगी के ढेर न लगें और आगंतुकों को स्वच्छ वातावरण मिले।
स्वच्छता अभियान की सफलता के लिए अधिशासी अधिकारी रणजीत सिंह ने आमजन से भावनात्मक अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपनी पूरी क्षमता और संसाधनों के साथ शहर को स्वच्छ रखने का प्रयास कर रहा है, लेकिन बिना नागरिकों के सहयोग के कोई भी अभियान पूर्णतः सफल नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे कचरा इधर-उधर न फेंकें और नगरपालिका की गाड़ियों का ही उपयोग करें। जब शासन और नागरिक मिलकर एक ही दिशा में प्रयास करते हैं, तभी 'स्वच्छ शहर' की परिकल्पना धरातल पर उतरती है। नागरिकों को अपने उत्तरदायित्व का बोध कराते हुए उन्होंने निर्धारित स्थानों पर ही कूड़ा डालने की सलाह दी है।
प्रशासन का यह अभियान केवल तात्कालिक सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक स्थायी समाधान की ओर बढ़ता कदम है। नियमित सफाई से न केवल शहर की छवि बेहतर होती है, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। आने वाले समय में नगरपालिका कचरा प्रबंधन के आधुनिक तरीकों को अपनाने पर भी विचार कर रही है। अधिशासी अधिकारी का मानना है कि इस निरंतर प्रयास से शहर में स्वच्छता के प्रति एक नया संस्कार विकसित होगा। इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासन संकल्पित हो, तो सीमित संसाधनों में भी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।
यह रिपोर्ट नगरपालिका प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं और स्थानीय सफाई व्यवस्था के विवरणों पर आधारित है। स्वच्छता अभियान के समय और संसाधनों की उपलब्धता में प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तन संभव है। लेख का उद्देश्य जन जागरूकता फैलाना और सरकारी प्रयासों की जानकारी देना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत अथवा कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।