भीलवाड़ा में आईसीएआई द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स में 50 से अधिक सीए प्रोफेशनल्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियां सीख रहे हैं।
सीए प्रोफेशनल्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियां सीख रहे हैं।
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। डिजिटल क्रांति और तेजी से विकसित होती तकनीकों के इस युग में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आईसीएआई की भीलवाड़ा शाखा तथा 'एआई फॉर आईसीएआई' समिति के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर सर्टिफिकेट कोर्स” का शुक्रवार को पटेल नगर स्थित आईसीएआई भवन में भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, युवा प्रोफेशनल्स और आर्टिकल असिस्टेंट्स ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस सत्र ने यह स्पष्ट कर दिया कि वित्त और लेखांकन का भविष्य अब पूरी तरह से तकनीक और एआई आधारित प्रणालियों पर निर्भर होने जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में शाखा अध्यक्ष सीए दिनेश सुथार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एआई की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है। वर्तमान में टैक्सेशन, ऑडिटिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और डेटा मैनेजमेंट जैसे मुख्य वित्तीय क्षेत्रों में एआई अपनी प्रभावी भूमिका स्थापित कर चुका है। सुथार ने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में एआई आधारित तकनीकों का उपयोग प्रत्येक पेशेवर क्षेत्र में अनिवार्य होगा। ऐसे में सीए सदस्यों के लिए इन तकनीकों को समझना और उन्हें अपने कार्य में शामिल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आईसीएआई द्वारा आयोजित यह कोर्स सदस्यों को डिजिटल परिवेश में अधिक प्रतिस्पर्धी और सक्षम बनाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास है।
शाखा सचिव सीए पुलकित राठी ने बताया कि इस तीन दिवसीय पाठ्यक्रम को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि प्रतिभागियों को एआई के बुनियादी सिद्धांतों से लेकर इसके उन्नत व्यावसायिक उपयोगों तक की विस्तृत जानकारी मिल सके। कोर्स के पहले दिन मेरठ से आए मुख्य वक्ता सीए सुलभ गुप्ता ने तकनीकी सत्र का संचालन किया। उन्होंने आर्टिफिशियल नैरो इंटेलिजेंस, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसे जटिल विषयों को बहुत ही सरल भाषा और व्यावसायिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में 'डेटा' सबसे मूल्यवान संसाधन है और एआई आधारित निर्णय प्रणाली संगठनों की कार्यशैली का अभिन्न अंग बनेगी। उन्होंने लाइव डेमो के माध्यम से दिखाया कि कैसे एआई टूल्स प्रोफेशनल्स की उत्पादकता बढ़ाकर उनके कार्यभार को काफी कम कर सकते हैं।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। सीए सदस्यों ने एआई तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग, वित्तीय डेटा विश्लेषण में ऑटोमेशन, साइबर सुरक्षा के खतरों और एआई से जुड़े प्रोफेशनल एथिक्स (नैतिकता) पर अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञ वक्ता सुलभ गुप्ता ने सभी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सुझाव दिया कि भविष्य में केवल पारंपरिक ज्ञान सफलता के लिए पर्याप्त नहीं होगा; तकनीकी दक्षता ही पेशेवर मजबूती का आधार बनेगी। उन्होंने यह भी आगाह किया कि एआई टूल्स का उपयोग जिम्मेदारीपूर्वक और नैतिकता के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। शाखा उपाध्यक्ष सीए सत्यनारायण लाठी ने जानकारी दी कि आगामी दिनों में सीए अखिल पचोरी और सीए ऋषिर सोनी जैसे विशेषज्ञ एआई के उन्नत उपयोगों, डिजिटल वर्कफ्लो और डेटा विजुअलाइजेशन पर गहन चर्चा करेंगे।
आईसीएआई भीलवाड़ा शाखा की यह पहल क्षेत्र के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सीए प्रोफेशनल्स अपनी सेवाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बना सकेंगे। ऑडिटिंग के दौरान धोखाधड़ी का पता लगाने (Fraud Detection) से लेकर जटिल वित्तीय भविष्यवाणियां (Forecasting) करने तक, एआई के पास असीमित संभावनाएं हैं। भीलवाड़ा शाखा द्वारा आयोजित यह सर्टिफिकेट कोर्स न केवल सदस्यों के कौशल विकास में सहायक होगा, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी अग्रणी रखेगा। इस कोर्स ने जिले के प्रोफेशनल्स के बीच एक नई तकनीकी चेतना का संचार किया है।
यह रिपोर्ट आईसीएआई भीलवाड़ा शाखा द्वारा आयोजित एआई सर्टिफिकेट कोर्स के दौरान साझा की गई जानकारी और प्रेस विज्ञप्ति के तथ्यों पर आधारित है। एआई तकनीकों के उपयोग और उनके परिणाम विभिन्न सॉफ्टवेयर और डेटा इनपुट की सटीकता पर निर्भर करते हैं। पाठकों और प्रोफेशनल्स को सलाह दी जाती है कि किसी भी एआई टूल का उपयोग करने से पहले आईसीएआई के दिशा-निर्देशों और एथिक्स कोड का अध्ययन अवश्य करें। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।