अखिल मारवाड़ी महिला समिति ने भीलवाड़ा के सुभाष नगर और मलाण क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाकर नालियों की सफाई की और लोगों को जागरूक किया।
अखिल मारवाड़ी महिला समिति द्वारा स्वच्छता अभियान
राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में सामाजिक सरोकारों के प्रति सदैव अग्रणी रहने वाली अखिल मारवाड़ी महिला समिति ने एक बार फिर अपनी सक्रियता का परिचय दिया है। समिति द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से समिति की सदस्याओं ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि स्वच्छता केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य भी है। कार्यक्रम में समिति की महिलाओं ने न केवल वैचारिक स्तर पर स्वच्छता का महत्व साझा किया, बल्कि स्वयं धरातल पर उतरकर श्रमदान भी किया, जिससे स्थानीय निवासियों को प्रेरणा मिल सके।
स्वच्छता अभियान के दौरान समिति की सदस्याओं ने विशेष रूप से सुभाष नगर बस्ती और मलाण क्षेत्र का चयन किया। इन क्षेत्रों में जाकर महिलाओं ने सड़कों के किनारे फैले कचरे और नालियों के आसपास जमा गंदगी को साफ किया। मानसून की आहट को देखते हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नालियों में कचरा जमा न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि नालियों में अवरोध होने के कारण वर्षा का पानी सड़कों और लोगों के घरों में प्रवेश कर जाता है, जिससे काफी नुकसान होता है। समिति ने नालियों के बहाव को सुचारू बनाने के लिए वहाँ से प्लास्टिक और अन्य ठोस अपशिष्ट को हटाया, ताकि आगामी वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो।
सफाई कार्य के साथ-साथ समिति के सदस्यों ने बस्तीवासियों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें कचरा प्रबंधन की बारीकियां भी समझाईं। लोगों को प्रेरित किया गया कि वे कभी भी कचरा सड़क पर न फेंकें और हमेशा कचरा पात्र (डस्टबिन) का ही उपयोग करें। समिति ने विशेष रूप से 'गीले और सूखे कचरे' को अलग-अलग रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्हें बताया गया कि कचरा प्रबंधन की शुरुआत घर से ही होती है। जब नगरपालिका का ऑटो टिपर घर आए, तो कचरा उसी में डालें। इस दौरान महिलाओं ने घर-घर जाकर यह समझाया कि कूड़े के ढेर न केवल गंदगी फैलाते हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
अभियान के दौरान समिति ने स्वास्थ्य और स्वच्छता के अंतर्संबंधों पर भी प्रकाश डाला। सदस्याओं ने स्थानीय निवासियों को चेतावनी दी कि आसपास कचरा जमा होने से वर्षा ऋतु में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है। मच्छरों के पनपने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए, मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए स्वच्छता बनाए रखना ही सबसे बड़ा बचाव है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकर स्थानीय लोगों ने भी स्वच्छता बनाए रखने में अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
इस सफल कार्यक्रम का नेतृत्व समिति की अध्यक्ष मधु लढा और सचिव अनुपमा मंत्री ने किया। कार्यक्रम को प्रभावी बनाने में सुमन असावा, निर्मला बाहेती, उर्मिला अजमेरा, रेखा बांगड़, सलोनी, मंजू जैन और प्रिया राजपूत सहित समिति की अन्य सदस्याओं का विशेष योगदान रहा। विशेष रूप से मंजू बलदवा के सहयोग ने कार्यक्रम के प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाया। मारवाड़ी समाज की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि संगठित होकर किए गए छोटे-छोटे प्रयास समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी महिलाओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे एक स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगी।
कार्यक्रम के समापन पर समिति की पदाधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता अभियान जारी रखने की घोषणा की। उनका मानना है कि जब तक जन-जन में स्वच्छता की भावना जागृत नहीं होगी, तब तक शहर को पूर्णतः कचरा मुक्त बनाना संभव नहीं है। समिति ने आने वाले दिनों में स्कूलों और कॉलेजों में भी स्वच्छता सेमिनार आयोजित करने की योजना बनाई है। भीलवाड़ा के इन क्षेत्रों में मारवाड़ी महिला समिति द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल सराहनीय है, बल्कि अन्य सामाजिक संगठनों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण भी है। इस अभियान ने न केवल सड़कों की सफाई की, बल्कि लोगों के विचारों में भी स्वच्छता के प्रति एक नई अलख जगाई है।
यह रिपोर्ट अखिल मारवाड़ी महिला समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राप्त तथ्यों और समिति द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। स्वच्छता और स्वास्थ्य से संबंधित तकनीकी परामर्श के लिए स्थानीय नगरपालिका या स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें। प्रस्तुत लेख का उद्देश्य जन-जागरूकता फैलाना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी व्यक्तिगत या सामाजिक निर्णय के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।