स्वास्थ्य

एम्स के डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा: लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर निलंबित

कोटा के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की संदिग्ध मौत के बाद केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय मेडिकल टीम ने अस्पताल पहुंचकर विधिक जांच शुरू कर दी है।

By अजय त्यागी 1 min read
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अस्पताल में निरिक्षण करती टीम

राजस्थान के कोटा शहर में प्रसव के बाद चार गर्भवती महिलाओं की कथित चिकित्सा लापरवाही के कारण हुई अचानक मृत्यु ने पूरे राज्य के प्रशासनिक और स्वास्थ्य ढांचे में हड़कंप मचा दिया है। इस बेहद गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेष उच्च स्तरीय विधिक विशेषज्ञ टीम शनिवार को कोटा पहुंच गई। एम्स दिल्ली और एम्स जोधपुर के शीर्ष डॉक्टरों से मिलकर बनी इस केंद्रीय टीम ने आते ही न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जे के लोन अस्पताल के विभिन्न वार्डों का विधिक और तकनीकी निरीक्षण शुरू कर दिया है। विधिक टीम ने अस्पताल के लेबर रूम, ऑपरेशन थिएटर और प्रसव कक्षों की स्वच्छता और वहां अपनाए जाने वाले संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का कई घंटों तक बारीकी से विधिक विश्लेषण किया, ताकि इन दुखद मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की वार्ता के बाद विधिक समिति गठित

इस दर्दनाक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में स्थानीय सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से नई दिल्ली में सीधी विधिक वार्ता की थी। केंद्रीय मंत्री के कड़े निर्देशों के बाद तुरंत इस उच्च स्तरीय जांच समिति का विधिक गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता एम्स दिल्ली की प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रीता माहेय कर रही हैं। इस विशेष विधिक समिति में प्रसूति रोग विशेषज्ञों के अलावा प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (PSM), अस्पताल प्रबंधन, माइक्रोबायोलॉजी, एनेस्थीसिया और बाल रोग विशेषज्ञों को भी विधिक रूप से शामिल किया गया है। कोटा पहुंचते ही इस विधिक दल ने भर्ती मरीजों के चिकित्सा रिकॉर्ड, नर्सिंग चार्ट और ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाओं और जीवन रक्षक विधिक उपकरणों की गहनता से पड़ताल की।

चिकित्सा प्रबंधन का पक्ष और मरीजों का भरोसा बहाल करने की विधिक कोशिश

जांच के दौरान जे के लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉक्टर निर्मला शर्मा ने विधिक जांच के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समिति महिलाओं की गंभीर बीमारी और मृत्यु के अंतर्निहित विधिक व तकनीकी कारणों का पता लगाने का पूरा प्रयास कर रही है। डॉक्टर निर्मला शर्मा ने अपने आधिकारिक विधिक बयान में कहा कि, “अस्पताल में भर्ती मरीजों के नर्सिंग रिकॉर्ड की बहुत गहराई से जांच की गई है; इसके अलावा मरीजों की गंभीर स्थिति को संभालने के लिए डॉक्टरों द्वारा अपनाए गए विधिक प्रोटोकॉल और की गई चिकित्सीय जांचों के संबंध में भी विस्तृत विधिक जानकारी जुटाई गई है।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि नए अस्पताल भवन के खुलने के बाद शुरुआती दो दिनों में मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित विधिक उछाल आया था, जिसके कारण तंत्र पर भारी दबाव बढ़ा।

उच्च जोखिम वाली गर्भधारण व्यवस्था और डॉक्टरों के खिलाफ विधिक निलंबन

अस्पताल प्रशासन ने वर्तमान में आम जनता के भीतर फैले गहरे डर और अविश्वास को दूर करने के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं। अधीक्षक ने विधिक रूप से आश्वस्त करते हुए आगे कहा कि, “अब यहाँ सिजेरियन और सामान्य प्रसव दोनों की संख्या में विधिक गिरावट आई है, लेकिन हम मरीजों को भरोसा दिला रहे हैं कि स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है; हमारे पास ज्यादातर अत्यधिक गंभीर और उच्च जोखिम वाले मामले ही आते हैं, और हमें उम्मीद है कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर जनता का विधिक विश्वास जल्द ही पूरी तरह बहाल हो जाएगा।” इस बीच, जांच टीम ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों से विधिक पूछताछ भी की है। राज्य सरकार ने इस कथित घोर लापरवाही के मामले में त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों के वरिष्ठ डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है, जबकि दोनों मुख्य अस्पतालों के अधीक्षकों को कारण बताओ विधिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।[1]

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समसामयिक समाचार रिपोर्ट कोटा के सरकारी अस्पतालों में हुई दुखद घटनाओं, लोकसभा अध्यक्ष व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई विधिक पहलों और एम्स की उच्च स्तरीय जांच समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राथमिक विधिक तथ्यों पर पूरी तरह आधारित है। इस मामले में दवाओं के लैब परीक्षण, डॉक्टरों की विधिक जवाबदेही या अंतिम जांच निष्कर्षों के वैधानिक संदर्भ के लिए राजस्थान राज्य स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक विधिक रिपोर्ट को ही अंतिम और प्रामाणिक माना जाना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल जनहित में स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक विकास की निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं हैं।

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