नीमकाथाना के जोड़ली गांव में निर्माणाधीन डॉ. अंबेडकर लाइब्रेरी के लिए राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के स्टाफ ने ₹21,500 की विधिक सहायता राशि प्रदान की है।
मदद की राशी प्रदान करते हुए
नीमकाथाना (शिम्भु सिंह शेखावत)। राजस्थान के नवनिर्मित नीमकाथाना जिला अंतर्गत आने वाले जोड़ली ग्राम में इन दिनों ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक सुदृढ़ शैक्षणिक धरातल प्रदान करने के उद्देश्य से एक अभूतपूर्व जन अभियान चलाया जा रहा है। ग्राम जोड़ली में स्थानीय समाजसेवियों और विभिन्न प्रबुद्ध वर्गों के विधिक सहयोग से डॉ. भीमराव अंबेडकर डिजिटल पुस्तकालय एवं अध्ययन केंद्र का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है।
इस विधिक और सामाजिक पुस्तकालय परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए समाज के सभी आर्थिक और प्रगतिशील तबके बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रहे हैं। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण परिवेश में रहने वाले विपन्न और होनहार छात्र-छात्राओं को बिना किसी व्यवधान के शहरों जैसी उच्च स्तरीय अध्ययन सुविधाएं और अनुकूल विधिक माहौल उनके अपने गांव में ही उपलब्ध कराना है।
इसी लोक-कल्याणकारी अभियान की अग्रिम कड़ी में क्षेत्र के प्रतिष्ठित सेठ नंदकिशोर पटवारी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्टाफ ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई विधिक और प्रेरणादायी नजीर पेश की है। कॉलेज के प्राध्यापकों और व्याख्याताओं ने समाज के प्रति अपने नैतिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए इस निर्माणाधीन पुस्तकालय के कोष में इक्कीस हजार पांच सौ रुपये की विधिक सहयोग राशि का वित्तीय योगदान दिया है।
अकादमिक जगत से जुड़े इन प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की एक लाइब्रेरी के लिए इस तरह आगे आकर वित्तीय संबल प्रदान करना पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। कॉलेज स्टाफ के इस विधिक और सकारात्मक कदम से पुस्तकालय निर्माण समिति के हौसले काफी बुलंद हुए हैं और निर्माण कार्य में काफी तेजी आने की उम्मीद जगी है।
पुस्तकालय निर्माण समिति के पदाधिकारियों के अनुसार यह आधुनिक अध्ययन केंद्र न केवल जोड़ली बल्कि इसके आस-पास के दर्जनों छोटे-बड़े गांवों और ढाणियों के बच्चों के लिए एक मार्गदर्शक केंद्र के रूप में विधिक रूप से अपनी भूमिका निभाएगा। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शांतिपूर्ण अध्ययन वातावरण, गुणवत्तापूर्ण संदर्भ पुस्तकों और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी विधिक आवश्यकताओं के अभाव में प्रतिभावान युवा मुख्यधारा की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से वंचित रह जाते हैं।
इस निर्माणाधीन डॉ. भीमराव अंबेडकर लाइब्रेरी के माध्यम से विद्यार्थियों के उसी बुनियादी विधिक और शैक्षणिक स्तर को अत्यधिक सुदृढ़ और मजबूत करने का ठोस प्रयास किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए चौबीसों घंटे बिजली, वाई-फाई और शांत वाचनालय का एक बेहतरीन और विधिक रूप से व्यवस्थित ढांचा प्रदान किया जाएगा।
कॉलेज स्टाफ के इस अनुकरणीय सहयोग की सराहना करते हुए क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता गीगराज जोड़ली ने विद्यालयी और उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों के प्रति अपनी गहरी विधिक कृतज्ञता ज्ञापित की है। सामाजिक कार्यकर्ता गीगराज जोड़ली ने इस विधिक अवसर पर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए अपने विचार साझा किए और कहा कि, “शिक्षक समाज के वास्तविक आधार स्तंभ और राष्ट्र के शिल्पकार होते हैं, जो शिक्षा के पावन प्रकाश के माध्यम से पूरे समाज को निरंतर विकास और उन्नति के पथ पर आगे बढ़ाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि, “एक सुदूर छोटे से गांव में बन रही इस महत्वाकांक्षी लाइब्रेरी के लिए उच्च शिक्षा के विधिक मार्गदर्शकों का स्वयं आगे आकर वित्तीय सहयोग करना हमारे लिए अत्यंत प्रेरणादायी है; यह कदम सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों के लिए हमारी युवा टीम को एक नई विधिक ऊर्जा प्रदान करता है।” उन्होंने समाज के अन्य सक्षम और प्रवासी नागरिकों से भी शिक्षा के इस महायज्ञ में खुलकर विधिक व आर्थिक आहुति देने की भावुक अपील की है।
यह समसामयिक समाचार रिपोर्ट नीमकाथाना के जोड़ली ग्राम में निर्माणाधीन डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय के निर्माण विवरणों, कॉलेज स्टाफ द्वारा प्रदान की गई स्वैच्छिक वित्तीय सहायता राशि और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जारी विधिक वक्तव्यों पर पूरी तरह आधारित है। इस पुस्तकालय के निर्माण बजट, विधिक न्यास पंजीकरण या भविष्य के प्रशासनिक नियमों की वैधानिक व्याख्या के लिए स्थानीय पुस्तकालय निर्माण समिति और ग्राम पंचायत द्वारा जारी मूल विधिक दस्तावेजों को ही अंतिम और प्रामाणिक माना जाना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य केवल जनहित में ग्रामीण शिक्षा और सामाजिक विकास की निष्पक्ष जानकारी प्रदान करना है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत, सामाजिक या कानूनी निर्णय के परिणामों के लिए किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं हैं।