भारत कंबोडिया सैन्य अभ्यास के तहत दोनों देशों की सेनाओं ने कंबोडिया में चौदह दिनों का संयुक्त युद्धाभ्यास सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
भारत कंबोडिया सैन्य अभ्यास
दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति और रक्षा साझेदारी को मजबूत करते हुए भारतीय सेना ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंबोडिया की धरती पर आयोजित हुआ द्विपक्षीय भारत कंबोडिया सैन्य अभ्यास सिनबैक्स-2026 सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। कम्पोंग स्पू प्रांत में स्थित रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स ट्रेनिंग सेंटर में दोनों देशों के सैनिकों ने चौदह दिनों तक कड़ा पसीना बहाया। इस समापन समारोह के दौरान दोनों देशों के ध्वज फहराए गए और सैन्य अधिकारियों ने परेड की सलामी ली। यह आयोजन दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और सैन्य संबंधों में मील का पत्थर साबित हुआ है।
इस महत्वपूर्ण भारत कंबोडिया सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की बटालियन के एक सौ बीस जांबाज सैनिकों ने हिस्सा लिया। वहीं कंबोडिया की रॉयल कंबोडियन आर्मी की तरफ से एक सौ साठ सैन्य कर्मी इस ड्रिल में शामिल हुए। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अध्याय सात के तहत आयोजित इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद विरोधी अभियानों और अर्ध-शहरी माहौल में सुरक्षा चुनौतियों से संयुक्त रूप से निपटना था। दोनों देशों की टुकड़ियों ने एक-दूसरे की युद्ध तकनीकों, हथियारों के संचालन और रणनीतिक कौशल को बहुत करीब से समझा और साझा किया।
चौदह दिनों तक चले इस सघन प्रशिक्षण शिविर के दौरान सैनिकों को आधुनिक युद्ध के बदलते तौर-तरीकों का कड़ा अभ्यास कराया गया। दोनों सेनाओं ने अत्याधुनिक ड्रोन संचालन, काउंटर-आईईडी नेटवर्क, स्निपर firing और मोर्टार हैंडलिंग जैसी विधाओं में विशेषज्ञता हासिल की।
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में अभ्यास की सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि, “इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों मित्र देशों की सेनाओं के बीच अंतःक्रियाशीलता, आपसी तालमेल और रणनीतिक समझ का एक नया स्तर देखने को मिला है, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में दूरगामी भूमिका निभाएगा।”
इस अभ्यास के अंतिम चरण में एक व्यापक सैन्य सत्यापन सत्र का आयोजन किया गया था। इस सत्र में वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का निर्माण करके सैनिकों की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को परखा गया। इसके साथ ही मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) से जुड़ी आपातकालीन विधाओं का भी सघन अभ्यास किया गया। अचानक आने वाले संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के समय कैसे दोनों देश मिलकर राहत कार्य चला सकते हैं, इसकी एक व्यावहारिक रूपरेखा तैयार की गई। सैन्य अधिकारियों ने माना कि यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।[1]
उल्लेखनीय है कि इस विशेष द्विपक्षीय श्रृंखला का यह दूसरा संस्करण था, जबकि इसका पहला संस्करण वर्ष 2024 में भारत के पुणे में आयोजित किया गया था। पिछले अभ्यास की तुलना में इस बार सैनिकों की संख्या और अभ्यास का दायरा काफी बड़ा रखा गया था।
कंबोडिया के रक्षा विश्लेषकों ने इस विदाई सत्र की सराहना करते हुए कहा कि, “भारतीय सेना के समृद्ध अनुभवों से कंबोडियाई बलों को आधुनिक सुरक्षा खतरों से निपटने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।” इस सफल समापन के बाद भारतीय सैन्य दल कंबोडिया से स्वदेश वापसी के लिए रवाना हो गया है।
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