कोलकाता के साल्टलेक में बिधाननगर नगर निगम के टीएमसी कार्यालय से सौ से अधिक आधार कार्ड और अवैध जमीन सौदे के दस्तावेज बरामद हुए हैं।
सौ से अधिक आधार कार्ड जब्त
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पॉश इलाके साल्टलेक में बिधाननगर नगर निगम के वार्ड नंबर छतीस के अंतर्गत आने वाली बसंती देवी कॉलोनी से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ स्थानीय नागरिकों की सक्रियता के बाद सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक स्थानीय पार्टी कार्यालय से सौ से अधिक महत्वपूर्ण आधार कार्ड और सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े बेहद संवेदनशील दस्तावेज भारी मात्रा में बरामद किए गए हैं। इस औचक घटनाक्रम के बाद पूरे साल्टलेक और कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मच गया है।
इस पूरे संदिग्ध मामले का खुलासा उस समय हुआ जब स्थानीय निवासियों ने काफी समय से बंद पड़े इस राजनीतिक दल के कार्यालय को खोला। वहां भारी मात्रा में लोगों के पहचान पत्र और सरकारी जमीनों के विलेख देखकर जनता का गुस्सा भड़क गया।
स्थानीय लोगों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तुरंत इस घटना की लिखित सूचना बिधाननगर दक्षिण पुलिस थाने को दी। सूचना मिलते ही बिधाननगर दक्षिण थाने की पुलिस टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुँची और त्वरित कार्रवाई करते हुए टीएमसी दफ्तर में मौजूद सभी संदिग्ध पहचान पत्रों और जमीनी विलेखों को विधिक रूप से अपने कब्जे में ले लिया।
इस गंभीर बरामदगी के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्य पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने टीएमसी के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके आम जनता के अधिकारों का हनन किया गया।
बिधाननगर विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक डॉ. शरदवत मुखर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, “इससे पहले भी लोग लगातार यह कह रहे थे कि आधार कार्ड और मतदाता से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों को गलत तरीके से रखा और संभाला जा रहा है, जो डाकघरों से सीधे सही व्यक्तियों तक पहुँचने के बजाय राजनीतिक दल के कार्यालयों में ट्रांसफर हो रहे थे; अब इस ताजा घटना ने उन सभी गंभीर आरोपों की जमीनी तौर पर पुष्टि कर दी है।”
घटना स्थल पर मौजूद आक्रोशित स्थानीय नागरिकों ने पुलिस और मीडिया के समक्ष अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। लोगों का कहना है कि वे महीनों से अपने पहचान पत्रों को अपडेट कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, जबकि उनके कार्ड यहाँ छिपाकर रखे गए थे।
जांच अधिकारियों ने जनभावनाओं को शांत करते हुए कहा कि, “इलाके के स्थानीय लोगों के मुताबिक टीएमसी दफ्तर में मिले ये सभी पहचान पत्र पूरी तरह से इसी क्षेत्र के गरीब नागरिकों के हैं, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने या अन्य किसी विधिक प्रक्रिया के बहाने यहाँ जमा कराया गया था या फिर डाक से यहाँ मँगाया गया था।”
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शुरुआती छानबीन में यह बात भी सामने आई है कि पहचान पत्रों के साथ मिले अन्य कागज सरकारी संपत्तियों और भूखंडों के अवैध हस्तांतरण से जुड़े हुए हैं।
बिधाननगर पुलिस के एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने मामले की विधिक गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि, “पार्टी कार्यालय के भीतर से इतनी बड़ी संख्या में पहचान पत्रों के साथ सरकारी भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों का मिलना एक बड़े संगठित रैकेट की तरफ इशारा करता है, जिसकी गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष विधिक टीम का गठन किया जा रहा है और बहुत जल्द दोषियों को विधिक रूप से चिन्हित कर लिया जाएगा।”
इस बड़ी बरामदगी के बाद साल्टलेक में बिधाननगर नगर निगम क्षेत्र में राजनीतिक पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। भाजपा विधायक ने इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी दखल देने की मांग उठाई है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की गोपनीयता के साथ हुए इस खिलवाड़ का पूरा सच सामने आ सके।(1)
दूसरी तरफ पुलिस विभाग बरामद किए गए सभी पहचान पत्रों के नंबरों और उन पर दर्ज पतों की सत्यता की जांच में जुटा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इनका उपयोग किसी प्रकार के फर्जी वित्तीय लेनदेन या चुनावों में किया गया था। इस घटना से पूरे पश्चिम बंगाल में एक नई विधिक और राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
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