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नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई कस्टडी में लातूर का कोचिंग संचालक

नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दसवें अभियुक्त लातूर के कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर को छह दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में मचे राष्ट्रव्यापी बवाल के बीच दिल्ली की विशेष अदालत से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए महाराष्ट्र के लातूर स्थित आरसीसी कोचिंग क्लास के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को लेकर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच एजेंसी की दलीलों को स्वीकार करते हुए आरोपी मोटेगांवकर को छह दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेजने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के बाद अब केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारी आरोपी को अपने साथ मुख्यालय ले जाकर कड़ाई से पूछताछ करेंगे।

शाम को आया आदेश

इससे पहले दोपहर के समय दोनों पक्षों के वकीलों के बीच करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक तीखी कानूनी बहस चली थी।

सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष आरोपी के मोबाइल से प्रश्नपत्र मिलने और जांच में सहयोग न करने की बात कहते हुए पूरे 10 दिनों की रिमांड मांगी थी। वहीं बचाव पक्ष के वकील ने इस कस्टडी का पुरजोर विरोध किया था। कोर्ट ने दोपहर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और शाम ठीक 4:30 बजे अपना आदेश सुनाते हुए आरोपी को छह दिनों के लिए केंद्रीय एजेंसी की रिमांड पर सौंपने की अनुमति दे दी।

मास्टरमाइंड की होगी तलाश

सीबीआई के आला अधिकारियों का मानना है कि मोटेगांवकर की यह छह दिनों की कस्टडी इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए नीट पेपर लीक मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।

जांच एजेंसी मुख्य रूप से इस बात का पता लगाएगी कि आरोपी कोचिंग संचालक के पास परीक्षा से पहले यह गोपनीय प्रश्नपत्र आखिर किस माध्यम से पहुंचा था। सीबीआई को संदेह है कि मोटेगांवकर देश के बड़े अंतरराज्यीय पेपर लीक सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं के सीधे संपर्क में था और उसने इस काम के लिए मोटी रकम का लेन-देन भी किया था।

मोबाइल डेटा की जांच

हिरासत के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो की साइबर और फोरेंसिक टीमें आरोपी के जब्त किए गए मोबाइल फोन के डेटा को पूरी तरह खंगालने का प्रयास करेंगी।

प्रारंभिक जांच में जो प्रश्नपत्र और हल किए गए उत्तर उसके फोन से मिले थे, वे किन-किन व्हाट्सएप ग्रुप्स या टेलीग्राम चैनलों पर फॉरवर्ड किए गए थे, इसकी पूरी तकनीकी मैपिंग की जाएगी। इसके साथ ही, उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों की भी सीडीआर (कॉले डिटेल रिकॉर्ड) निकाली जा रही है, जिनसे आरोपी ने परीक्षा से ठीक दो दिन पहले लगातार लंबी बातचीत की थी।

छात्रों की बढ़ेगी मुश्किलें

इस बड़ी कार्रवाई के बाद लातूर और उसके आसपास के उन छात्रों और अभिभावकों की मुश्किलें भी बहुत ज्यादा बढ़ने वाली हैं, जिन्होंने इस कोचिंग के संपर्क में रहकर पेपर हासिल किया था।

सीबीआई के सूत्रों का दावा है कि रिमांड के दौरान मोटेगांवकर से उन सभी परीक्षार्थियों की सूची उगलवाई जाएगी, जिन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र रटवाया गया था। कस्टडी के दौरान मिलने वाले इन नामों को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के साथ साझा किया जा सकता है, जिसके बाद ऐसे संदिग्ध छात्रों का परीक्षा परिणाम रद्द करने या उन्हें भविष्य के लिए डिबार करने की कार्रवाई संभव है।

लातूर में हड़कंप

शिवराज मोटेगांवकर की छह दिनों की कस्टडी मिलने की खबर जैसे ही महाराष्ट्र के लातूर और पुणे के कोचिंग हब तक पहुंची, वहां के अन्य कोचिंग संचालकों में भारी हड़कंप मच गया।

लातूर को मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी का एक बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने वहां के पूरे शैक्षणिक माहौल पर एक बड़ा दाग लगा दिया है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी अब उन सभी केंद्रों पर नजर रख रहा है, जो किसी न किसी रूप में मोटेगांवकर के व्यावसायिक नेटवर्क या अन्य गतिविधियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।

व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश

केंद्रीय जांच ब्यूरो, नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य नौ आरोपियों और इस दसवें आरोपी को आमने-सामने बिठाकर भी पूछताछ करने की योजना बना रही है।

नीट पेपर लीक मामले में बिहार, झारखंड और दिल्ली के आरोपियों के बीच जो कड़ियां टूटी हुई थीं, उन्हें जोड़ने में मोटेगांवकर से मिलने वाले सुराग बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। सीबीआई इस बात को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है कि इस बार कोर्ट से मिली कस्टडी की अवधि के भीतर देश के इस सबसे बड़े परीक्षा घोटाले के असली मास्टरमाइंड के चेहरे को बेनकाब किया जा सके, ताकि लाखों छात्रों को न्याय मिल सके।(1)

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह समाचार रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही जांच और राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा जारी रिमांड आदेश के आधिकारिक सोर्सेज से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। परीक्षा लीक सिंडिकेट से जुड़े इस मामले में आरोपी की अंतिम विधिक संलिप्तता और दोषसिद्धि पूरी तरह से सक्षम अदालत के अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी व्यक्तिगत दृष्टिकोण या निष्कर्ष के परिणामों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

 

 

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