भीलवाड़ा में भारत विकास परिषद द्वारा दिव्यांगों (दिव्यांग भाई-बहनों) के लिए दस दिवसीय आत्मनिर्भरता प्रशिक्षण शिविर शुरू किया गया है।
विशेष प्रशिक्षण शिविर
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में अग्रणी संस्था भारत विकास परिषद (स्वामी विवेकानंद शाखा) द्वारा सेवाश्रम, पटेल नगर में समाज के एक अत्यंत संवेदनशील हिस्से के लिए एक सराहनीय और मानवीय पहल की शुरुआत की गई है। भीलवाड़ा में भारत विकास परिषद की ओर से विशेष बौद्धिक दिव्यांग भाई-बहनों के लिए एक 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ किया गया है। इस अभिनव ग्रीष्मकालीन शिविर का मुख्य उद्देश्य इन विशेष बच्चों और युवाओं के भीतर छिपी हुई अद्भुत रचनात्मकता को पहचानना, उसे सही दिशा देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाना है।
भारत विकास परिषद द्वारा दिव्यांगों के इस 10 दिवसीय विशेष आवासीय सह गैर-आवासीय शिविर में दिव्यांग भाई-बहनों को उनकी रुचि, मानसिक और शारीरिक क्षमता के अनुसार विभिन्न रचनात्मक विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शारीरिक और मानसिक विकास के लिए इस अनूठे प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई है। शिविर में मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। पहला नृत्य जो उनके शारीरिक समन्वय और मानसिक आनंद को बढ़ा रहा है; दूसरा चित्रकला जिसके माध्यम से बच्चे अपनी अंतर्निहित भावनाओं को कैनवास पर खूबसूरती से उकेर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त तीसरा सबसे महत्वपूर्ण विषय सिलाई, हस्तशिल्प व क्राफ्ट मेकिंग है जो उन्हें भविष्य में आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने में बेहद मददगार साबित होगा।
शाखा अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल ने शिविर के व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भारत विकास परिषद द्वारा दिव्यांगों के लिए आयोजित इस विशेष शिविर में विनीता गुरनानी द्वारा नृत्य (डांस), राहुल सुवालका द्वारा शारीरिक जिमनास्टिक, रेखा सिंह द्वारा आर्ट एंड क्राफ्ट, आशा काबरा द्वारा वोकेशनल क्लास, मुकेश शर्मा द्वारा स्विमिंग (तैराकी), दृष्टिबाधित बच्चों के लिए आदित्य सिंह द्वारा लूडो व डांस एवं बनवारी लाल द्वारा संगीत सिखाया जा रहा है।
भारत विकास परिषद द्वारा दिव्यांगों के लिए आयोजित इस विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण शिविर की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत यह है कि यहाँ केवल पारंपरिक या औपचारिक रूप से बच्चों को सिखाया नहीं जा रहा है।
बल्कि, यहाँ नियुक्त किए गए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और चिकित्सकों द्वारा हर एक दिव्यांग भाई-बहन की व्यक्तिगत ग्रहण क्षमता का गहन और सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है। शिविर की गतिविधियों के दौरान यह बहुत बारीकी से देखा जा रहा है कि कौन सा बच्चा किस विशिष्ट क्षेत्र में सबसे बेहतर, सहज और आनंदित महसूस कर रहा है, ताकि भविष्य में उन्हें उसी दिशा में आगे करियर बनाने के लिए विधिक मार्गदर्शन दिया जा सके।
परिषद की स्वामी विवेकानंद शाखा के प्रबुद्ध सदस्यों ने समाज के सभी वर्गों और सक्षम नागरिकों से एक बेहद मार्मिक और भावनात्मक अपील जारी की है।
संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि, “विशेष बच्चों को समाज की सहानुभूति या दया की कतई आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें सही अवसर, उचित सहयोग और सम्मान की दरकार है; भारत विकास परिषद द्वारा दिव्यांगों के लिए आयोजित यह शिविर उनके खोए हुए आत्मविश्वास को बढ़ाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।” इस प्रकार के प्रशिक्षण से इन बच्चों के एकाकीपन को दूर कर उनके भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र के दौरान सेवाश्रम के पदाधिकारी, परिषद के समस्त सदस्य, विषय विशेषज्ञ, थेरेपिस्ट, ट्रेनर्स और बच्चों के भावुक अभिभावक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी ने भारत विकास परिषद के इस सेवाभावी, अनुकरणीय और दूरदर्शी प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की और बच्चों का तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही परिषद ने अपने अन्य सेवा कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि शास्त्री नगर स्थित परिषद भवन पर हर रविवार को नियमित रूप से निशुल्क मधुमेह दवा वितरण और एक्यूप्रेशर चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया जाता है एवं वहां एक आधुनिक फिजियोथैरेपी सेंटर भी संचालित है।
शिविर के माध्यम से दिव्यांग बच्चों द्वारा तैयार की जाने वाली कलाकृतियों और हस्तशिल्प उत्पादों की अंतिम दिन एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
इस प्रदर्शनी से होने वाली आय को सीधे तौर पर इन विशेष बच्चों के कल्याण के लिए उपयोग में लाया जाएगा। भीलवाड़ा में भारत विकास परिषद के इस दूरगामी और कल्याणकारी कदम की पूरे जिले में व्यापक चर्चा हो रही है। इस सफल आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए स्थानीय समाजसेवियों, युवा स्वयंसेवकों और महिला विंग की विभिन्न टोलियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो प्रतिदिन इन बच्चों की भोजन व्यवस्था से लेकर सुरक्षित आवागमन की पूरी निगरानी मुस्तैदी से कर रही हैं।
यह सामाजिक और मानवीय सरोकार की समाचार रिपोर्ट भारत विकास परिषद (स्वामी विवेकानंद शाखा) भीलवाड़ा द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन, पदाधिकारियों के वक्तव्यों और स्थानीय संवाददाता (पंकज पोरवाल) द्वारा प्रेषित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। शिविर के नियम, चिकित्सा परामर्श और वोकेशनल कोर्स की रूपरेखा पूरी तरह से संबंधित संस्था के विधिक और आंतरिक दिशानिर्देशों के अधीन हैं। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।