आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले में घिरे कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष की मुश्किलें अब बेहद बढ़ गई हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस संस्थान से जुड़े बड़े आर्थिक घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में संदीप घोष के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने की अपनी आधिकारिक और विधिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आदेश के बाद जांच एजेंसियों को पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ मजबूत चार्जशीट दाखिल करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सोमवार देर रात जारी किए गए एक आधिकारिक आदेश में इस बात की पुष्टि की गई है।
आदेश के मुताबिक, सक्षम प्राधिकारी होने के नाते राज्य के राज्यपाल ने इस पूरे मामले से जुड़े विधिक पहलुओं पर विचार करते हुए आरोपी संदीप घोष के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी (प्रॉसिक्यूशन सेंक्शन) प्रदान कर दी है। सरकार द्वारा इस मंजूरी को कड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आरोपी घोष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत केस चलेगा।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के सख्त प्रावधानों के तहत भी उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा। अस्पताल के प्रशासनिक पद पर रहते हुए वित्तीय कोष और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के हेरफेर के गंभीर आरोप उन पर लगे हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि यह महत्वपूर्ण विधिक निर्णय बेहद सतर्कता और गहन प्रशासनिक छानबीन के बाद लिया गया है।
आदेश में कहा गया है कि, “जांच एजेंसी द्वारा आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले में दर्ज की गई एफआईआर (FIR), केस डायरी और जांच से संबंधित सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स का पूरी तरह और बेहद सावधानीपूर्वक परीक्षण करने के बाद ही राज्यपाल महोदय ने अपनी सहमति दी है।” सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि मामले के तथ्य प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करते हैं।
उल्लेखनीय है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी की घटना के बाद यह बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ था।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के कड़े आदेश के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) इस संस्थान में हुई इस बड़ी वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों की समानांतर जांच कर रही है। सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट में पाया था कि संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान मेडिकल सामानों की आपूर्ति और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ था।
अस्पताल के पूर्व कर्मचारियों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ बायो-मेडिकल कचरे की अवैध तस्करी करने और चहेते वेंडरों को अवैध रूप से टेंडर आवंटित करने की शिकायतें दर्ज करवाई थीं।
इन विधिक शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने पहले एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जिसके बाद यह जांच केंद्रीय एजेंसी को ट्रांसफर की गई थी। इस मामले में कई अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और बिचौलियों पर भी जांच की गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
यह विधिक मंजूरी मिलने के बाद अब सीबीआई विशेष अदालत में संदीप घोष और उनके करीबियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकती है।
कोलकाता के स्थानीय नागरिक संगठनों और जूनियर डॉक्टरों के संघ ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने इस मामले में शामिल अन्य रसूखदार चेहरों को भी बेनकाब करने की मांग उठाई है। इस घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी भारी उबाल आ गया है।[1]
कोलकाता पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और अस्पताल के पूर्व प्रबंधन पर विपक्षी दलों द्वारा लगातार तीखे हमले किए जा रहे हैं।
ऐसे में संदीप घोष पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देकर राज्य सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। आरजी कर वित्तीय अनियमितता मामले से जुड़े इस गंभीर घटनाक्रम पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की चिकित्सा व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व पारदर्शिता से जुड़ा हुआ एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
यह समाचार रिपोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश, सीबीआई द्वारा की जा रही जांच की प्राथमिक सूचनाओं और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत विधिक दस्तावेजों के तथ्यों पर आधारित है। आरोपी संदीप घोष के खिलाफ दोषसिद्धि या वित्तीय हेरफेर की अंतिम विधिक पुष्टि माननीय न्यायालय द्वारा जारी अंतिम न्यायिक फैसले के पूर्णतः अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।