हैदराबाद पुलिस का एआई संचालित सोसआई प्लेटफॉर्म लॉन्च कर दिया गया है, जो साइबर अपराध और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वालों को तुरंत दबोचेगा।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
हैदराबाद पुलिस का एआई संचालित सोसआई प्लेटफॉर्म लॉन्च होने के साथ ही साइबर अपराध और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ एक बेहद आधुनिक तकनीकी युद्ध की शुरुआत हो गई है। महानगरीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से हैदराबाद पुलिस के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विंग ने "सोशल मीडिया ऑब्जर्वेशन एंड साइबर इंटेलिजेंस" यानी सोसआई (SOCEYE) नामक एक अत्याधुनिक सर्विलांस प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक रूप से एक्टिव कर दिया है।[1]
हैदराबाद पुलिस का एआई संचालित सोसआई प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया नेटवर्क्स पर भड़काऊ भाषण (हेट स्पीच), झूठी अफवाहें, और सांप्रदायिक उन्माद भड़काने वाली पोस्ट्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग करेगा।
कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने और नफरत जनित अपराधों (हेट क्राइम्स) पर अंकुश लगाने के लिए यह तकनीक एक गेम-चेंजर साबित होगी। वीआईपी दौरों, बड़े त्योहारों और संवेदनशील सार्वजनिक रैलियों के दौरान पुलिस इसका विशेष रूप से उपयोग करने जा रही है।
हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर (सीपी) वी. सी. सज्जनार ने इस हाई-टेक सुरक्षा पहल के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी देते हुए एक बड़ा बयान जारी किया है।
कमिश्नर वी. सी. सज्जनार ने आधिकारिक रूप से बताया कि, “यह नया सोसआई सिस्टम कई महत्वपूर्ण स्रोतों जैसे कि डायल 100 कॉल्स, ग्राउंड फील्ड इंटेलिजेंस और स्थानीय थाना क्षेत्रों की सूचनाओं को एक ही सिंगल इंटेलिजेंट डैशबोर्ड पर एकीकृत करता है, जिससे ऑन-ड्यूटी अधिकारियों को त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद मिलती है।”
हैदराबाद पुलिस का एआई संचालित सोसआई प्लेटफॉर्म प्रणाली उन्नत एनालिटिकल टूल्स से पूरी तरह लैस है, जो बार-बार सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने वाले पुराने अपराधियों की डिजिटल पहचान करने में सक्षम है।
यह अपराधियों के छिपे हुए नेटवर्क का पता लगाती है जो संगठित रूप से विवादित और भड़काऊ कंटेंट को ऑनलाइन री-पोस्ट कर वायरल करते हैं। इसके लिए आधुनिक साइबर जांच प्रणाली के तहत सोशल मीडिया इंटेलिजेंस (SOCMINT) और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) पद्धतियों का बेहतरीन तालमेल किया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने खुलासा किया कि इस साल की शुरुआत में किए गए पायलट रन के दौरान इस सॉफ्टवेयर ने बेहद शानदार और हैरतअंगेज परिणाम दिए हैं।
जब पुराने शहर के पुराना पुल चौराहे के पास अचानक कुछ स्थानीय तनाव भड़का था, तब सोसआई ने तुरंत काम करते हुए इंटरनेट पर तेजी से फैल रही 85 नफरत भरी पोस्टों की पहचान की और उन्हें तुरंत डिलीट करवाया। इसी तरह गुडीमलकापुर के एक संवेदनशील धार्मिक विवाद के दौरान भी इस सिस्टम ने हालात बिगड़ने से पहले ही 126 आपत्तिजनक पोस्टों को ब्लॉक करवा दिया था।
यह प्लेटफॉर्म केवल भड़काऊ भाषणों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मादक पदार्थों की तस्करी (ड्रग ट्रैफिकिंग), साइबर बुलिंग, महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन स्टॉकिंग और बाल यौन शोषण जैसी गंभीर अनैतिक गतिविधियों पर भी चौबीसों घंटे पैनी नजर रखता है।
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ऑनलाइन खतरों की गंभीरता के अनुसार स्वतः ही उनकी रेटिंग तय करता है और सोशल मीडिया कंपनियों को सीधे शिकायत भेजकर पोस्ट हटवा देता है।
इस अत्याधुनिक प्रणाली के भीतर आम जनता के लिए एक विशेष ग्रीवांस (शिकायत) मॉनिटरिंग मैकेनिज्म भी जोड़ा गया है।
जब भी कोई पीड़ित नागरिक सोशल मीडिया पर नागरिक सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या दर्ज कराता है, तो यह प्रणाली स्वतः ही उसे एक यूनिक ट्रैकिंग नंबर आवंटित कर देती है। इसके बाद जब तक संबंधित थाना या साइबर विंग उस समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर देती, तब तक इस शिकायत की प्रशासनिक लेवल पर ट्रैकिंग होती रहती है।
शहर में होने वाले बड़े प्रदर्शनों, जुलूसों और धरनों को ट्रैक करने के लिए इसमें "इवेंट-बेस्ड मॉनिटरिंग" सिस्टम को भी इनबिल्ट किया गया है।
विशिष्ट कीवर्ड्स और ऑनलाइन ट्रेंड्स पर नजर रखकर पुलिस किसी भी संभावित हिंसक स्थिति का पहले ही अंदाजा लगा सकती है। आखिरकार, हैदराबाद पुलिस का एआई संचालित सोसआई प्लेटफॉर्म लॉन्च होने के इस बड़े कदम से पुलिस बल का काम का बोझ काफी कम होगा और अत्याधुनिक तकनीक की मदद से महानगर में शांति और अमन-चैन को स्थायी रूप से कायम रखा जा सकेगा।
यह आधुनिक तकनीकी सुरक्षा और साइबर निगरानी से जुड़ी समाचार रिपोर्ट हैदराबाद शहर पुलिस के आईटी विंग द्वारा जारी आधिकारिक विवरणों, पुलिस कमिश्नर के बयानों और साइबर अपराध जांच के प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित है। सोसआई सॉफ्टवेयर के तकनीकी मापदंडों, डेटा प्राइवेसी सुरक्षा और सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा पोस्ट हटाए जाने की समय-सीमा का अंतिम निर्णय पूरी तरह से गृह मंत्रालय और तय प्रशासनिक नियमों के अधीन है। लेखक और प्रकाशक/संपादक इस समाचार जानकारी के आधार पर पाठकों द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी दृष्टिकोण के परिणामों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।