केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण देश में दवा दुकानें बंद हैं। दवा विक्रेता ऑनलाइन दवा बिक्री नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल
केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान ने आज पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर डाला है। मुंबई सहित कई महानगरों में दवाइयों की दुकानें सुबह से ही पूरी तरह बंद देखी गईं। केमिस्टों का आरोप है कि महामारी के दौरान जारी की गई कुछ सरकारी अधिसूचनाओं ने ऑनलाइन माध्यमों से दवाओं की बिक्री को एक तरह से खुला निमंत्रण दे दिया है, जिसका दुरुपयोग हो रहा है।(1)
केमिस्टों का मानना है कि दवाओं की अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री से न केवल स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के दवा विक्रेताओं का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि, "ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी कड़े नियम के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे नकली दवाओं के आने और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की संभावनाएं भी काफी बढ़ गई हैं।"
मुंबई के दादर, परेल और अंधेरी जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में दवा दुकानों के शटर डाउन रहे, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर की गलियों में जहां केमिस्ट शॉप पर भीड़ रहती थी, वहां सन्नाटा पसरा है। एसोसिएशन के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट कहा, "हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार इन अधिसूचनाओं को वापस लेने की घोषणा नहीं कर देती।"
केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि डिजिटल तकनीक से आम जनता को घर बैठे दवाइयां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इसके बावजूद, केमिस्टों का कड़ा रुख यह बताता है कि यह लड़ाई आने वाले समय में और अधिक तीव्र हो सकती है।
केमिस्टों की मांग है कि दवाओं की बिक्री को सिर्फ पंजीकृत फार्मेसियों तक ही सीमित रखा जाए, ताकि हर बिक्री की निगरानी हो सके। उन्होंने मांग की है कि सरकार को, "दवाओं के वितरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कठोर नियम लागू करने चाहिए," ताकि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। केमिस्टों का कहना है कि वे किसी तकनीकी प्रगति के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे बिना नियम वाली बिक्री के खिलाफ हैं।
प्रशासनिक अधिकारी लगातार इस कोशिश में हैं कि एसोसिएशन के नेताओं के साथ बातचीत का कोई रास्ता निकाला जाए। मुंबई जैसे बड़े शहरों में इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के पास की कुछ दुकानों को खुला रखने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन हड़ताल का असर व्यापक रहा है। दवा विक्रेताओं की मांग है कि यदि ई-फार्मेसी को जारी रखना है, तो उन पर भी वही नियम लागू होने चाहिए जो फिजिकल दुकानों पर होते हैं।
दवा उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह केवल एक हड़ताल नहीं, बल्कि एक बड़ा नीतिगत विवाद है। ऑनलाइन कंपनियों की सुविधा और लाखों छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी के बीच का संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। केमिस्टों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है, जो सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।
अंत में, केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने दवा वितरण प्रणाली में सुधार की मांग को मुखर कर दिया है। आज के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि केमिस्ट अपनी मांगों को लेकर कितने गंभीर हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है और देखना होगा कि मरीजों के हितों और व्यवसायियों की चिंताओं को ध्यान में रखकर सरकार आने वाले दिनों में क्या बड़ा कदम उठाती है।
यह समाचार रिपोर्ट दवा विक्रेताओं की हड़ताल और उनकी मांगों से संबंधित प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी नीतियां, दवाओं की बिक्री के तय नियम और औषधीय वितरण प्रणाली में कोई भी परिवर्तन पूरी तरह से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित औषधीय महानियंत्रक के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अधीन है। इस रिपोर्ट के लेखक और प्रकाशक/संपादक द्वारा व्यक्त किए गए विचार पूरी तरह से तटस्थ हैं और किसी भी व्यावसायिक विवाद या नीतिगत निर्णय के लिए संस्था उत्तरदायी नहीं है।
VIDEO | Maharashtra: The All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) called for a nationwide bandh demanding the withdrawal of notifications issued during the COVID-19 pandemic that allegedly enabled the misuse of online medicine sales. Visuals show closed chemist… pic.twitter.com/IyI0adiRXI
— Press Trust of India (@PTI_News) May 20, 2026