भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर में बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और देशभक्ति की शिक्षा देकर उन्हें आदर्श नागरिक बनाया जा रहा है।
भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। भारत विकास परिषद वीर शिवाजी शाखा द्वारा कूडोज किड्स स्कूल में आयोजित यह सात दिवसीय शिविर बच्चों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। इस शिविर में अनुशासन, देशभक्ति और जीवन उपयोगी शिक्षाएं प्रदान की जा रही हैं।
शिविर के दौरान प्रतिदिन विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रेरणादायक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चों को खेल-खेल में जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है। प्रथम दिन डॉ. रूपा पारिक ने बच्चों का परिचय सत्र आयोजित करते हुए "मेरा लक्ष्य क्या है" विषय पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि "जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत एवं अनुशासन के साथ आगे बढ़ना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।"
दूसरे दिन डॉ. राधेश्याम श्रोत्रिय ने गायत्री मंत्र का महत्व समझाते हुए बच्चों को संस्कारित जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि "घर एवं विद्यालय में बड़ों का सम्मान करना और अभिवादन करना ही वास्तविक संस्कार हैं।" इसके अलावा, शिविर के तीसरे दिन प्रसिद्ध कवि योगेंद्र शर्मा ने देशभक्ति से ओत-प्रोत विचारों के माध्यम से बच्चों में राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करने का कार्य किया।
कवि योगेंद्र शर्मा ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा, "मोबाइल की रील इसलिए नहीं देखता, क्योंकि मैं देशभक्त हूँ।" उन्होंने बच्चों को एक सुंदर कविता सुनाई, "संस्कारों की ज्योति जलाओ, भारत का भविष्य चमकाओ। माता-पिता गुरु का मान करो, जीवन में ऊँचा नाम करो।" यह सुनकर पूरा वातावरण देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया और बच्चों में अत्यधिक उत्साह देखने को मिला।
शाखा अध्यक्ष कमलेश बोड़ाना ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति एवं अच्छे संस्कारों से जोड़कर उन्हें आदर्श नागरिक बनाना है। यह प्रयास समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहीं, महिला संयोजिका वर्षा मित्तल ने कहा कि प्रतिदिन खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को व्यावहारिक जीवन की शिक्षा दी जा रही है। योगेश मित्तल द्वारा संचालित खेल गतिविधियाँ बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
कार्यक्रम प्रभारी सुशीला कोठारी ने बताया कि शिविर के चौथे दिन संगीता बंसल द्वारा बच्चों को स्वच्छता, साफ-सुथरे रहने एवं व्यवस्थित जीवन शैली के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। इन सत्रों से बच्चों के आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता में भारी वृद्धि हो रही है। शिविर में पुनीत भूतड़ा, चंद्रशेखर सारस्वत, दुर्गालाल सोनी, हरीश अग्रवाल, दीपक चोरड़िया, हुकम सिंह, हितेश तोषणीवाल, वर्षा मित्तल, खुशबू सोनी, शशि बोड़ाना, मधुबाला यादव, सुभाष मोटवानी एवं धर्मेंद्र देवनानी जैसे सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया है।
आने वाले दिनों में शिविर में और भी नई गतिविधियों को शामिल किया जाएगा ताकि बच्चों का चहुंमुखी विकास हो सके। आज के आधुनिक युग में जब तकनीक का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में बच्चों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती है। आज के समय में भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर का आयोजन इस चुनौती को स्वीकार करते हुए एक सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रहा है।
संस्कार और शिक्षा का मेल ही भारत के स्वर्णिम भविष्य की आधारशिला है। भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर के माध्यम से बच्चों को अनुशासित करने का प्रयास सफल हो रहा है। भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर की प्रासंगिकता अब और अधिक बढ़ गई है। अंततः, बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए भीलवाड़ा में बाल एवं युवा संस्कार शिविर जैसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता बनी रहेगी।
इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी आयोजन और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए प्रकाशक/संपादक जिम्मेदार नहीं होंगे। यह लेख केवल जनहित और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। शिविर से संबंधित अधिक जानकारी या भागीदारी के लिए संबंधित संस्था से संपर्क करें। स्वास्थ्य या शिक्षा संबंधी किसी भी निर्णय के लिए विशेषज्ञों और अभिभावकों की सलाह लेना हमेशा उचित रहता है।