स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश के 97 प्रतिशत शहरी वार्डों में घर घर कचरा संग्रहण की सुविधा शुरू हो चुकी है। कचरा प्रसंस्करण में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
शहरी भारत की स्वच्छता व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत अब देश के लगभग 97 प्रतिशत शहरी वार्डों में घर घर कचरा संग्रहण की सुविधा अनिवार्य रूप से पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि भारत के शहरी परिदृश्य को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है।[1]
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी बयान में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रसंस्करण की दर में आश्चर्यजनक उछाल आया है। साल 2014 में यह दर मात्र 16 प्रतिशत थी, जो 2026 तक बढ़कर 81 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। मंत्रालय का कहना है कि "यह वृद्धि देश भर की नगर पालिकाओं में बुनियादी ढांचा विकसित करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।"
मंत्रालय ने पुराने कचरे के ढेरों (लेगेसी वेस्ट) के निपटान में हुई तेज प्रगति पर भी प्रकाश डाला है। देश भर के 2,482 डंपसाइट्स पर लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा था, जिसमें से 65 प्रतिशत कचरे का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। यह प्रक्रिया केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण सुधारने में भी काफी मदद मिल रही है।
इस महाभियान के सकारात्मक परिणाम जमीन की उपलब्धता के रूप में भी सामने आए हैं। मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पुराने कचरा ढेरों को हटाकर अब तक लगभग 9,000 एकड़ शहरी भूमि को उत्पादक उपयोग के लिए पुनः प्राप्त कर लिया गया है। इस जमीन का उपयोग अब पार्कों, खेल के मैदानों और सामुदायिक केंद्रों के निर्माण के लिए किया जा रहा है, जिससे शहरों का कायाकल्प हो रहा है।
देश के छोटे-बड़े सभी शहरों में कचरा प्रबंधन को लेकर एक नई संस्थागत क्षमता विकसित हुई है। स्वच्छता मानकों को अब केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे धरातल पर उतारा गया है। आज नगर पालिकाओं के पास कचरे को अलग-अलग करने और उसे वैज्ञानिक तरीके से संसाधित करने की बेहतर तकनीकी सुविधा उपलब्ध है, जिससे घर घर कचरा संग्रहण का कार्य और अधिक सुचारू रूप से चल रहा है।
स्वच्छता में सुधार का सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहा है। कचरे का सही समय पर उठान होने से मोहल्लों में गंदगी और मच्छरों का प्रकोप कम हुआ है। शहरी क्षेत्रों में घर घर कचरा संग्रहण की बढ़ती पहुंच ने बीमारियों की रोकथाम में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे शहरों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, आने वाले समय में कचरा मुक्त शहरों के लक्ष्य को पूरी तरह हासिल करने के लिए काम जारी है। स्वच्छता के साथ-साथ शहरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपशिष्ट को धन (वेस्ट टू वेल्थ) में बदलने की प्रक्रिया भी तेज की गई है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि घर घर कचरा संग्रहण के कारण शहरों की सूरत बदल रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक साफ सुथरा भविष्य तैयार हो रहा है।
यह रिपोर्ट विभिन्न सरकारी विभागों और समाचार एजेंसियों से प्राप्त प्रारंभिक सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी परिस्थिति में संबंधित विभागों अथवा एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट को ही मान्य समझा जाएगा। रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए जाने वाले किसी भी निर्णय अथवा होने वाले परिणाम के लिए लेखक और प्रकाशक/संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।