भीलवाड़ा के सालरा ग्राम में एक करोड़ की लागत से बनने वाली पेयजल टंकी का भूमि पूजन हुआ, जो अमृत-2 योजना के तहत पेयजल समस्या दूर करेगी।
पेयजल टंकी के निर्माण का भूमि पूजन
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। पेयजल टंकी के निर्माण का भूमि पूजन शुक्रवार को भीलवाड़ा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 56 एवं 57 स्थित सालरा ग्राम में संपन्न हुआ। एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना क्षेत्रवासियों के लिए एक बड़ी सौगात है। कार्यक्रम में भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया।
विधायक अशोक कुमार कोठारी ने अपने संबोधन में कहा कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भावना के अनुरूप लंबे प्रयासों के बाद इस क्षेत्र को अमृत-2 जल योजना के तहत टंकी निर्माण की सौगात मिली है।" उन्होंने बताया कि इस निर्माण कार्य के लिए डीएमएफटी फंड से एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह कदम स्थानीय स्तर पर जल संकट को दूर करने की दिशा में एक प्रभावी निर्णय है।
कोठारी ने आगे कहा कि इस निर्माण कार्य से क्षेत्र की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा तथा ग्रामीणों को पर्याप्त जल उपलब्ध हो पाएगा। उन्होंने इस कार्य की सफलता में क्षेत्रवासियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही विकास के बड़े काम संभव हो पाते हैं। सांसद दामोदर अग्रवाल ने भी इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए अधिकारियों को कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम में पंडित प्रीतम व्यास ने विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन संपन्न कराया। इस अवसर पर जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता किशन खोईवाल, चंबल प्रोजेक्ट के अधीक्षण अभियंता महेश चंद्र तथा सहायक अभियंता दिलराज मीणा सहित कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूरा करना उनकी प्राथमिकता रहेगी, ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भगवान सिंह चौहान, खाखरा वाले देवता के पुजारी श्यामलाल एवं सत्यनारायण गुग्गड ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अतिथियों का अभिनंदन किया। इस दौरान उपस्थित नागरिकों ने क्षेत्र की इस दीर्घकालिक समस्या के समाधान पर संतोष व्यक्त किया और राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से वे पानी की किल्लत से जूझ रहे थे, लेकिन इस पेयजल टंकी के निर्माण से अब उन्हें राहत मिलेगी। कार्यक्रम में महावीर सेन, बद्रीलाल जाट, रामेश्वर गाडरी, भरत पाराशर, कैलाश सेन, मांगीलाल जाट, रामेश्वर लाल, भगत सेन, कैलाश सुवालका एवं प्रहलाद कीर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामवासी उपस्थित रहे। विधायक कार्यालय से एडवोकेट अर्पित कोठारी, संजय राठी और शंभू वैष्णव ने भी कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
यह पेयजल टंकी परियोजना न केवल ग्रामीणों के लिए पानी उपलब्ध कराएगी, बल्कि यह क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का एक उदाहरण भी बनेगी। स्थानीय प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि इस जल परियोजना की देखरेख के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा। ग्रामीण विकास के प्रति सरकार का यह दृष्टिकोण स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पानी की सुलभ उपलब्धता ही स्वस्थ जीवन की पहली शर्त है।
क्षेत्र में पानी की किल्लत को समाप्त करने के लिए यह पेयजल टंकी का निर्माण कार्य मील का पत्थर साबित होगा। लोगों को अब पानी के लिए लंबी दूरी तय करने या निजी टैंकरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन होने से आमजन को कितनी बड़ी राहत मिलती है। भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी ही जल परियोजनाएं शुरू की जाने की योजना है।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि वे पानी की बर्बादी रोकें और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहें। एक करोड़ रुपये की लागत वाली यह योजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया और सामूहिक रूप से इसे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया गया। निर्माण कार्य के अगले कुछ महीनों में पूरा होने की प्रबल संभावना है।
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी स्थानीय कार्यक्रम और आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के तथ्यों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और तकनीकी विनिर्देशों के लिए संबंधित जलदाय विभाग के दस्तावेजों की पुष्टि करना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।