उत्तर प्रदेश

गंगा दशहरा पर्व: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब

गंगा दशहरा पर्व पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लाखों भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। यह पर्व माँ गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

गंगा दशहरा पर्व पर लाखों भक्तों के लिया गंगा स्नान

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर आज गंगा दशहरा पर्व के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए और पवित्र स्नान किया। श्रद्धालु सूर्योदय से पूर्व ही गंगा के घाटों पर पहुंच गए थे, जहाँ उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस अवसर पर एक भक्त ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, "अपने परिवार की खुशहाली और शांति के लिए आज मैं यहां स्नान करने और पूजा-अर्चना करने आई हूं।" भक्तों का मानना है कि इस दिन संगम में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रयागराज का घाट पूरी तरह से 'हर-हर गंगे' के जयघोष से गुंजायमान रहा।[1]

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन माँ गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरण की पौराणिक कथा से जुड़ा है। कहा जाता है कि राजा भगीरथ की घोर तपस्या के फलस्वरूप माँ गंगा धरती पर आई थीं। इस दिन को गंगा के पूजन, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जल के महत्व को समझने के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है।

मान्यता है कि गंगा के अवतरण से न केवल धरती का कल्याण हुआ, बल्कि भगीरथ के पूर्वजों को भी मोक्ष प्राप्त हुआ। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह समय भीषण गर्मी के बीच आता है, जब जल का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन दस प्रकार के दान करके अपने जीवन में सकारात्मकता और शीतलता का आगमन सुनिश्चित करते हैं।

पर्व मनाने की विधि

गंगा दशहरा पर्व के दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं। भक्त सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करते हैं और सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। इसके पश्चात, विशेष रूप से 'दस' की संख्या में दान किए जाते हैं, जिसमें दस प्रकार के फल, दस प्रकार के वस्त्र, दस प्रकार के अन्न और दस दीपक प्रज्वलित करना शामिल है। घाटों पर मंत्रोच्चार के बीच गंगा आरती का आयोजन किया जाता है।

कुछ श्रद्धालु इस दिन उपवास भी रखते हैं और गंगा सहस्त्रनाम या गंगा लहरी का पाठ करते हैं। दान-पुण्य का यह सिलसिला केवल संगम तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि लोग गरीब और जरूरतमंदों को भोजन कराकर भी पुण्य अर्जित करते हैं। यह पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और नदियों की स्वच्छता का संदेश भी देता है, जो आज के समय में अत्यधिक प्रासंगिक है।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

प्रयागराज जिला प्रशासन ने लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए थे। संगम तट पर गोताखोरों की तैनाती के साथ ही पुलिस बल को भी तैनात किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी और घाटों पर साफ-सफाई के विशेष निर्देश दिए गए थे ताकि आस्था का यह केंद्र स्वच्छ बना रहे।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन ने यातायात और दर्शन की सुगम व्यवस्था सुनिश्चित की। विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी घाटों पर पानी, फल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। भक्तों के उत्साह ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के युग में भी भारतीय अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति कितने समर्पित हैं। यह पर्व श्रद्धा के साथ-साथ एकता का भी प्रतीक बना।

सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश

गंगा भारत की जीवनरेखा है और इस पर्व का मूल संदेश नदियों की पवित्रता को बनाए रखना है। यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे कृतज्ञ होने का दिन है। गंगा दशहरा पर्व हमें याद दिलाता है कि यदि हम नदियों को शुद्ध रखेंगे, तो नदियाँ हमें जीवन और समृद्धि देंगी। सरकार और समाज दोनों के सहयोग से ही गंगा को अविरल और निर्मल बनाया जा सकता है।

अतः, हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प लेना चाहिए। गंगा के प्रति हमारा सम्मान केवल पूजा तक सीमित न रहकर उनके संरक्षण तक जाना चाहिए। इस गंगा दशहरा पर्व पर लिया गया एक छोटा सा संकल्प—नदी में कचरा न डालना—भी गंगा की स्वच्छता में बड़ा योगदान दे सकता है। आइए, इस पावन अवसर पर माँ गंगा को निर्मल बनाने का प्रण लें।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी धार्मिक मान्यताओं, स्थानीय सूत्रों और उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। नदी तटों पर सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

𝕏 Tweet Embedded Post
#GangaDussehra #GangaDussehra2026 #HarHarGange #MaaGanga #GangaSnan #SanatanDharma
Read Full Article on RexTV India