पटना में इस्कॉन नौका विहार महोत्सव पहली बार आयोजित हुआ। भव्य फूलों से सजी नाव पर राधा-कृष्ण की सवारी देख लाखों श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
पटना में इस्कॉन नौका विहार महोत्सव
बिहार की राजधानी पटना में इस्कॉन नौका विहार महोत्सव का आयोजन अत्यंत भव्यता और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की मूर्तियों को फूलों से सुसज्जित एक नाव पर विराजमान कर विहार कराया गया। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े और पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
इस्कॉन मंदिर प्रबंधन के सदस्य राधपति धर्मदास ने कार्यक्रम की भव्यता के बारे में बताया, "यह बिहार में पहली बार आयोजित किया गया है और यहाँ हजारों-लाखों लोग एकत्रित हुए हैं।" उन्होंने जानकारी दी कि इस आयोजन के लिए मायापुर से विशेष कीर्तन मंडली को आमंत्रित किया गया था। मंदिर प्रशासन ने भक्तों के लिए व्यापक प्रसाद की व्यवस्था भी की थी, जिससे कोई भी भक्त बिना प्रसाद ग्रहण किए न लौटे।[1]
इस महोत्सव के लिए पटना का इस्कॉन मंदिर परिसर एक दिव्य लोक जैसा प्रतीत हो रहा था। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, "400 टन से अधिक फूलों का उपयोग इस नौका विहार महोत्सव को सजाने के लिए किया गया है।" फूलों की मनमोहक सुगंध और सजावट ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न प्रकार के कीर्तन और संकीर्तन की धुनें वातावरण को और भी अधिक भक्तिपूर्ण बना रही थीं।
भक्तों की भीड़ इतनी अधिक थी कि मंदिर परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं से भर गया। इस्कॉन द्वारा आयोजित इस नौका विहार ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित किया। कीर्तन मंडलियों के द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में डुबो दिया, जिससे हर कोई भावविभोर होकर झूमता नजर आया।
परंपरागत रूप से इस्कॉन द्वारा मंदिरों में अनेक उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन नौका विहार की यह शैली बिहार के लिए पूरी तरह से नई और अनूठी रही। मायापुर के कलाकारों द्वारा की गई कीर्तन की प्रस्तुति ने पूरे आयोजन में प्राण फूंक दिए। पटना में इस्कॉन नौका विहार महोत्सव ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में भक्ति और श्रद्धा के प्रति जनमानस में अटूट विश्वास बना हुआ है।
Patna, Bihar: For the first time ISKCON organized the Nauka Vihar Mahotsav, where idols of Lord Krishna and Radha Rani were taken on a flower-decorated boat ride. A large number of devotees attended the event and were seen immersed in devotion and prayers.
— IANS (@ians_india) May 25, 2026
(24/05/2026) pic.twitter.com/jnIyty6J11
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनमानस को भक्ति भाव से जोड़ना और राधा-कृष्ण की लीलाओं के प्रति प्रेम जगाना था। राधपति धर्मदास ने बताया कि व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि लाखों की संख्या में आए भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी बहुत व्यवस्थित थी, जिससे सभी भक्तों को ससम्मान और सरलता से महाप्रसाद उपलब्ध कराया जा सका।
इस तरह के सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों से समाज में प्रेम और सद्भाव का संदेश जाता है। पटना में इस्कॉन नौका विहार महोत्सव ने एकता और भक्ति के धागे को और अधिक मजबूत किया है। इस्कॉन संस्था न केवल धार्मिक अनुष्ठान करती है, बल्कि अपने विशाल भंडारों और प्रसाद व्यवस्थाओं के माध्यम से मानवता की सेवा का कार्य भी अनवरत रूप से करती आ रही है।
आयोजन की सफलता को देखते हुए अब मंदिर प्रबंधन की ओर से भविष्य में भी ऐसे महोत्सवों के आयोजन की संभावना जताई गई है। भक्तों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है, जो आने वाले वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में ताजा रहेगा। बिहार के लोग इस अनूठे अनुभव के लिए इस्कॉन की पूरी टीम का आभार व्यक्त कर रहे हैं।
भक्ति का यह अद्भुत संगम शाम ढलते-ढलते और भी भव्य हो गया। विद्युत सजावट और फूलों की महक के बीच राधा-कृष्ण की नाव जब आगे बढ़ी, तो जयकारों से पूरा पटना गूंज उठा। पटना में इस्कॉन नौका विहार महोत्सव का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को भी दर्शाता है। इस्कॉन के प्रयासों से पटना आने वाले समय में कृष्ण भक्ति का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी मंदिर प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों एवं संबंधित आयोजनों के विवरण पर आधारित है। यह जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।