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यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल असम विधानसभा में पेश: विपक्षी दलों का विरोध

असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश किया गया है। यह विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को विनियमित करेगा।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल आज राज्य की विधानसभा में आधिकारिक रूप से पेश कर दिया गया है। यह विधेयक असम के विधायी इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान कानूनी ढांचे के अंतर्गत लाना है। सरकार का तर्क है कि यह कदम समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

विधेयक के पटल पर आते ही सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी विधायकों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए मांग की कि "इस बिल को लाने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए था।" विपक्ष का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव के लिए समाज के हर तबके की राय लेना आवश्यक है, ताकि किसी भी समुदाय के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।[1]

बिल के मुख्य प्रावधान

विधेयक की रूपरेखा काफी व्यापक और स्पष्ट है। यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल का एक प्रमुख उद्देश्य राज्य में बहुविवाह यानी पॉलीगेमी पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाना है। इसके अतिरिक्त, विवाह के लिए न्यूनतम आयु सीमा को भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है, जिसके अनुसार पुरुषों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है। सरकार का कहना है कि यह प्रावधान बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने में मददगार होगा।

विधेयक का एक और महत्वपूर्ण पहलू लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण है। प्रस्तावित कानून के तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने रिश्ते का आधिकारिक पंजीकरण कराना आवश्यक होगा, ताकि उन्हें कानूनी सुरक्षा मिल सके। प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल महिला अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि सामाजिक विवादों की स्थिति में न्याय प्रक्रिया को और अधिक सरल, स्पष्ट तथा पारदर्शी बनाने में भी सहायता प्रदान करेगा।

कानूनी और सामाजिक चुनौतियाँ

कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के व्यापक बदलावों को धरातल पर लागू करना एक बड़ी चुनौती है। विवाह और उत्तराधिकार जैसे निजी कानून सदियों से धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित रहे हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे आधुनिकता की ओर एक प्रगतिशील कदम मानते हैं, जबकि अन्य इसे मौजूदा परंपराओं के साथ एक बड़ा टकराव के रूप में देख रहे हैं।

विपक्षी दलों की स्पष्ट मांग है कि बिल की बारीकियों पर गहन चर्चा हो। उनका कहना है कि "बिना किसी विस्तृत विचार-विमर्श के ऐसे कानूनों को लागू करना सामाजिक ढांचे के लिए जोखिम भरा हो सकता है।" दूसरी ओर, सरकार पूरी तरह से आश्वस्त है कि यह कदम राज्य में एक समान कानून व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। अब यह बिल सदन की विभिन्न समितियों में गहन जांच और विचार-विमर्श के लिए भेजा जा सकता है।

आगे की प्रक्रिया

विधानसभा में बिल के पेश होने के बाद अब गेंद पूरी तरह से विधायी समितियों और सदन के पटल पर है। यदि यह कानून पारित होता है, तो असम देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जो अपने स्तर पर इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रहे हैं। सरकार इस बिल के माध्यम से न केवल शासन प्रणाली में सुधार करना चाहती है, बल्कि एक समान न्याय व्यवस्था की मिसाल भी पेश करना चाहती है।

आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियाँ तेज होने की पूरी संभावना है। विभिन्न नागरिक समाज संगठन और धार्मिक समूह इस कानून के विरोध या समर्थन में लामबंद हो सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे सभी चिंताओं को सुनने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे कानून लाने के अपने उद्देश्य पर अडिग हैं। जनता की निगाहें अब पूरी तरह से इस बिल की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।

संतुलन बनाने की आवश्यकता

किसी भी कानून की सफलता उसके क्रियान्वयन और जनता की स्वीकार्यता पर निर्भर करती है। यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक सोच का प्रतिनिधित्व करता है। शासन और विपक्ष को मिलकर इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कानून का पालन करते समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो और समाज में सद्भाव का वातावरण भी बना रहे। संवाद ही लोकतंत्र में किसी भी समाधान का मार्ग होता है।

अंत में, यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इन कानूनी और राजनीतिक बाधाओं को कैसे पार करती है। यदि सरकार विपक्ष के सुझावों को शामिल करती है, तो यह कानून न केवल अधिक प्रभावी होगा बल्कि व्यापक रूप से स्वीकार्य भी बनेगा। भविष्य ही बताएगा कि यह बड़ा बदलाव असम के सामाजिक ताने-बाने को किस दिशा में ले जाता है। प्रशासन और जनता दोनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी विधानसभा में पेश किए गए बिल और सार्वजनिक समाचार स्रोतों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी कानूनी कार्यवाही या बिल के विवरण के लिए आधिकारिक सरकारी गजट देखें। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी हेतु लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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