राजस्थान

भारतीय किसान संघ ने चंबल को अर्पित की चुनरी: महाआरती हुई

गंगा दशमी पर भारतीय किसान संघ ने चंबल नदी की महाआरती की। राजस्थान में कोटा के सुल्तानपुर में सैकड़ों किसानों ने मां चर्मण्यवती की पूजा कर समृद्धि की कामना की।

By अजय त्यागी 1 min read
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नदी को ओढाई चुनरी

कोटा (शिंभु सिंह शेखावत)। गंगा दशमी की पूर्व संध्या पर कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में भारतीय किसान संघ ने एक अत्यंत श्रद्धापूर्ण और भव्य आयोजन संपन्न किया। मंडावरा गांव में स्थित चंबल नदी पुलिया पर संघ के बैनर तले सैकड़ों किसान एकत्रित हुए। चंबल नदी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आयोजित यह कार्यक्रम न केवल किसानों की खुशहाली के लिए था, बल्कि क्षेत्र की उन्नति और कृषि प्रधान समाज की आस्था का प्रतीक भी बन गया।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां चर्मण्यवती की विशेष पूजा-अर्चना से हुई। चंबल नदी को हाड़ौती क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है, जो सदियों से यहां के किसानों के खेतों को सींचकर उन्हें समृद्ध बना रही है। इस पावन अवसर पर किसानों ने नदी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और यह कामना की कि आने वाला समय कृषि कार्य के लिए हमेशा अनुकूल बना रहे और खेत लहलहाते रहें।

भव्य चुनरी अर्पण

पूजा के पश्चात भारतीय किसान संघ के कोटा जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा और बूंदी जिला अध्यक्ष संतोष दुबे के कुशल नेतृत्व में किसानों ने मां चर्मण्यवती को भव्य चुनरी अर्पित की। चुनरी अर्पण का यह दृश्य बेहद मनमोहक और भक्तिमय था। आयोजकों ने अपने उद्बोधन में कहा, "चंबल नदी हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है, इसीलिए आज हम सब यहां मां का आशीर्वाद लेने के लिए विशेष रूप से एकत्रित हुए हैं।"

चुनरी अर्पण के बाद वातावरण पूरी तरह से धार्मिक रंगों में रंगा नजर आया। इसके बाद सामूहिक महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें हर किसान के हाथों में जलता हुआ दीया था। चंबल की कल-कल बहती धाराओं के बीच हजारों दीपों की रोशनी ने पूरी रात को आलोकित कर दिया। यह दीपदान कार्यक्रम नदी के संरक्षण और शुद्धता का संदेश देने का भी एक माध्यम बना, जिसे वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों ने दिल से सराहा।

किसानों की प्रार्थना

कार्यक्रम के दौरान कोटा और बूंदी जिले से आए सैकड़ों किसान इस भक्ति आयोजन के साक्षी बने। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष जगदीश कलमंडा ने कहा कि "चंबल नदी हाड़ौती क्षेत्र की जीवनरेखा है और यह हमारे किसानों के लिए ईश्वर के वरदान स्वरूप है।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसी परम्पराएं न केवल हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं, बल्कि समाज में एकजुटता का भाव और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी प्रसारित करती हैं।

सैकड़ों की संख्या में आए किसानों ने मिलकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान संघ के तमाम पदाधिकारी, स्थानीय ग्रामीण और क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि हर साल गंगा दशमी के अवसर पर इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को मानसिक संबल मिलता है और उनके बीच आपसी भाईचारे की भावना भी और अधिक मजबूत होती है।

नदी का महत्व

चंबल नदी जिसे पौराणिक ग्रंथों में 'चर्मण्यवती' कहा गया है, वास्तव में राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग के लिए एक वरदान है। यह न केवल सिंचाई का मुख्य स्रोत है, बल्कि वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संघ का यह प्रयास नदी की पवित्रता को जन-जन तक पहुंचाने का एक सराहनीय कदम है, जो जल संरक्षण के प्रति जागरूकता को भी समाज के अंतिम छोर तक प्रभावी ढंग से बढ़ाता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देर रात तक मंडावरा पुलिया के पास किसानों का जमावड़ा लगा रहा। भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि किसान अपनी संस्कृति और प्रकृति का कितना सम्मान करते हैं और कैसे वे जल स्त्रोतों के प्रति कृतज्ञ रहते हैं।

भविष्य की राह

कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भी वे इस प्रकार की परम्पराओं को निरंतर जारी रखेंगे। भारतीय किसान संघ का मुख्य उद्देश्य न केवल किसानों की मांगों को सरकार तक पहुँचाना है, बल्कि उन्हें सामाजिक और धार्मिक रूप से भी जोड़ना है। ऐसी आयोजनों से क्षेत्र के युवाओं को भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर और प्रकृति के सम्मान की सीख मिलती है, जो आज के समय में बेहद अनिवार्य है।

अंत में, सभी किसानों ने मां चर्मण्यवती से प्रार्थना की कि चंबल नदी का जल स्तर सदा बना रहे और यह हाड़ौती के खेतों को सदैव हरा-भरा रखे। इस अद्भुत आयोजन ने सुल्तानपुर में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। सभी उपस्थित पदाधिकारियों ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और गांव के निवासियों का आभार व्यक्त किया। यह दीपदान भविष्य में नदी बचाओ अभियान के लिए भी प्रेरणादायी साबित होगा।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस सामग्री के लिए किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं होंगे। यह रिपोर्ट केवल जनहित में सूचना साझा करने के लिए तैयार की गई है।

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