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चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना से हिमाचल को मिलेगा बड़ा लाभ

चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना को मिली मंजूरी। 2600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से हिमाचल के जल और ऊर्जा संकट का होगा स्थायी समाधान।

By अजय त्यागी 1 min read
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चिनाब नदी

चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश में विकास के नए द्वार खुल गए हैं। सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद, सरकार ने अब अपने जल संसाधनों के पूर्ण उपयोग की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है। 2352 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना लाहुल-स्पीति जिले में 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग के निर्माण पर केंद्रित है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चिनाब की सहायक चंद्राभागा नदी का अतिरिक्त पानी सुरंग के जरिए ब्यास बेसिन में मोड़ा जाएगा। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि भारतीय नदियां अपना पानी पाकिस्तान न बहाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि, "चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना देश के हितों और हिमाचल की समृद्धि के लिए एक अत्यंत आवश्यक रणनीतिक कदम है।"[1]

सुरंग और ऊर्जा विकास

हिमाचल प्रदेश के लाहुल घाटी में कोक्सर गांव के पास 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा, जो जल मोड़ की प्रक्रिया को सुगम बनाएगा। चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना के माध्यम से न केवल जल की कमी को पूरा किया जाएगा, बल्कि राज्य की जलविद्युत उत्पादन क्षमता में भी भारी वृद्धि की उम्मीद है। राष्ट्रीय हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) इस निर्माण कार्य को पूरी तत्परता से पूरा करेगा।

स्थानीय विशेषज्ञ प्रवीण शर्मा के अनुसार, यह सुरंग न केवल पानी के प्रवाह को ब्यास नदी में मिलाएगी, बल्कि ब्यास को बारहमासी बनाने में भी मदद करेगी। सरकार का यह निर्णय लंबे समय से लंबित उन प्रस्तावों पर आधारित है, जो भारत के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर देते थे। चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को नया जीवन मिलेगा और आर्थिक सुदृढ़ीकरण होगा।

सुरक्षा और सामरिक महत्व

चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना का एक अन्य पहलू जम्मू और कश्मीर के सलाल बांध पर सिल्ट प्रबंधन का कार्य है, जिस पर 268 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह कदम भारत की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए उठाया गया है। जानकारों का कहना है कि अब भारत अपनी नदियों के पानी का उपयोग अपने नागरिकों के कल्याण के लिए करने में पूरी तरह सक्षम है।

सिल्ट प्रबंधन और सुरंग निर्माण का यह दोहरा लाभ पूरे उत्तरी भारत को मिलेगा। चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना न केवल जल संकट को दूर करेगी, बल्कि यह क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद के खिलाफ भी एक कड़ा संदेश है। संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रहित में सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही बड़ी रणनीतिक परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है।

भविष्य की सुखद संभावनाएं

अंत में, चिनाब नदी बुनियादी ढांचा परियोजना का क्रियान्वयन हिमाचल के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। यह परियोजना जल और बिजली की कमी को दूर करके राज्य की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार लाएगी। यह सुनिश्चित है कि अब चिनाब का पानी भारत की प्रगति में पूरी तरह से योगदान देगा। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त और निर्णायक कदम है जो आने वाली पीढ़ियों को जल सुरक्षा प्रदान करेगा।

डिस्क्लेमर:

प्रस्तुत रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सरकारी विभाग से तथ्यों की पुष्टि करें। किसी भी कानूनी विवाद के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह के दावे का उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं करते हैं।

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