कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच जारी है। ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन के सैंपल लैब में फेल पाए गए हैं। मामले में उच्च स्तरीय जांच चल रही है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के तहत राजस्थान के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उपचार प्रोटोकॉल और दवाओं की आपूर्ति प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की जा रही है। कोटा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में प्रसव के बाद पांच प्रसूता माताओं की दुखद मौतों के बाद राज्य का स्वास्थ्य प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इस पूरी जांच का मुख्य उद्देश्य उपचार प्रक्रिया में अपनाए गए सभी मानदंडों और दवाओं की गुणवत्ता की बारीकी से निगरानी करना है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस समीक्षा प्रक्रिया में वार्ड प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं की तत्परता और प्रसव देखभाल के लिए निर्धारित चिकित्सा दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के दौरान एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों की एक टीम ने भी संबंधित अस्पतालों का दौरा किया है। टीम ने अस्पताल के बुनियादी ढांचे, उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सा कर्मचारियों द्वारा अपनाई जा रही उपचार प्रक्रियाओं का बारीकी से निरीक्षण किया है।[1]
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के अंतर्गत दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों में हुई मौतों को लेकर प्रशासनिक कार्यवाही की जा रही है। इस संदर्भ में एम्स दिल्ली के वरिष्ठ विशेषज्ञों की एक टीम ने दोनों अस्पतालों का दौरा किया है। यह टीम जांच प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है जो इन संस्थानों की कार्यप्रणाली का अवलोकन कर रही है। विभाग अब हर पहलू की गंभीरता से समीक्षा करने की तैयारी में जुटा है ताकि सत्य सामने आ सके।
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के दौरान औषधि नियंत्रण विभाग ने भी अपनी कार्यवाही तेज की है। विभाग ने अस्पतालों के प्रसूति वार्ड और दवा स्टोर से दवाओं के सैंपल एकत्रित किए हैं। इन नमूनों की संख्या 30 से अधिक बताई गई है। औषधि नियंत्रक के अनुसार, 21 नमूनों की रिपोर्ट सुरक्षित आई है, जबकि शेष नमूनों की रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है ताकि स्थिति के बारे में पूर्ण स्पष्टता हो सके।
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के बीच ऑक्सिटोसिन इंजेक्शनों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। विभाग ने संबंधित दवाओं के सैंपल लिए और जांच में इनके मानक के अनुरूप न होने की पुष्टि हुई है। कुल 16,000 इंजेक्शनों की आपूर्ति की गई थी, जिनमें से 3,501 इंजेक्शनों को जब्त कर लिया गया है। विभाग ने बताया कि 12,499 इंजेक्शनों का उपयोग अस्पतालों में पहले ही किया जा चुका है।
औषधि नियंत्रक अजय पाठक ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को संबंधित स्टॉक के वितरण पर निर्देश दिए हैं। कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के तहत राज्य भर के ड्रग वितरकों और मेडिकल स्टोरों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है। विभाग ने प्रभावित बैच के स्टॉक को हटाने के निर्देश जारी किए हैं और पूरी वितरण प्रक्रिया की अब कड़ी निगरानी की जा रही है।
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हुई मौतों और उपयोग की गई दवाओं के बीच सीधा संबंध है या नहीं। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने कहा कि "केवल स्त्री रोग विशेषज्ञ ही जानकारी दे सकते हैं" कि मरीजों को यह दवा दी गई थी या नहीं। विभाग की टीम द्वारा पूरे मामले का तकनीकी विश्लेषण अभी भी जारी है।
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के लिए कोटा और बूंदी के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों ने दवाओं के नमूने एकत्रित किए हैं। इन नमूनों को प्रयोगशाला में भेजा गया है। संबंधित दवाएं अमृतसर की एक कंपनी द्वारा निर्मित की गई थीं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जांच की प्रक्रिया जारी है और एम्स दिल्ली की टीम द्वारा दी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच के बीच ऑक्सिटोसिन का मुद्दा सबसे गंभीर बना हुआ है। लैब टेस्ट के अनुसार, इनमें सक्रिय घटक शून्य पाया गया है। औषधि विभाग ने स्पष्ट किया है कि दवा की गुणवत्ता मानकों के विपरीत पाई गई है। प्रशासन ने अब इस आपूर्तिकर्ता फर्म के पिछले सभी रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में शामिल करने का निर्णय लिया है।
जांच टीम ने यह भी जानने का प्रयास किया है कि प्रसव के दौरान किन परिस्थितियों में इंजेक्शन दिए गए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे किसी भी स्तर पर होने वाली कमी को स्वीकार नहीं करेंगे। कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच अब एक बड़े सुधार की दिशा में बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच में किसी भी तरह की लापरवाही को माफ नहीं किया जाएगा। विभाग के अनुसार, यदि दोषी पाए गए तो संबंधित कंपनी पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। अस्पताल के ड्यूटी रोस्टर और उस समय मौजूद चिकित्सा स्टाफ की भूमिका भी जांच का हिस्सा है। आने वाले कुछ दिनों में पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है, जिसके बाद दोषियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
अधिकारी अब दवाओं की खरीद प्रक्रिया के हर चरण की समीक्षा कर रहे हैं। कोटा में प्रसव उपरान्त महिलाओं की मृत्यु की जांच का यह दौर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक सबक के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने सभी अस्पतालों को दवा भंडारण और वितरण को लेकर नए प्रोटोकॉल जारी करने की भी योजना बनाई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी संभावना को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य केवल घटना का तथ्यात्मक विवरण देना है। किसी भी प्रकार के विवाद के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी तरह के दावे का उत्तरदायित्व स्वीकार नहीं करते हैं।