उत्तराखंड

चार धाम यात्रा पंजीकरण की अव्यवस्था से भक्तों में भारी आक्रोश

चार धाम यात्रा पंजीकरण में हो रही देरी से भक्त परेशान हैं। केंद्रों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण हजारों श्रद्धालु मायूस होकर लौट रहे हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
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रजिस्ट्रेशन के लिए अपनी बारी का इन्तेजार करते भक्त

चार धाम यात्रा पंजीकरण की प्रक्रिया में आ रही बाधाओं के कारण इन दिनों हजारों श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण प्रशासन को पंजीकरण प्रक्रिया को सीमित करना पड़ा है, जिसके चलते भक्तों में निराशा व्याप्त है। ऋषिकुल मैदान स्थित अस्थायी पंजीकरण केंद्र पर भारी भीड़ को देखते हुए मंगलवार दोपहर 2 बजे से सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं, जिससे कतार में खड़े भक्त मायूस नजर आए।[1]

यह स्थिति पिछले कई दिनों से बनी हुई है, जहां श्रद्धालु अपनी बारी के इंतजार में रातें बिताने को मजबूर हैं। तीर्थयात्रियों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के पंजीकरण काउंटरों को अचानक बंद कर दिया जाता है। पहले यह केंद्र चौबीसों घंटे सेवाएं प्रदान कर रहा था, लेकिन अब एकाएक बदलाव से तीर्थयात्री खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वे प्रशासन से चार धाम यात्रा पंजीकरण को सुगम बनाने की मांग कर रहे हैं।

तीर्थयात्रियों का दर्द

अपनी पीड़ा साझा करते हुए अजमेर से आईं प्रेमा देवी ने कहा:

"सत्ताईस लोग मेरे साथ यात्रा पर निकले हैं। हम दो दिनों से कतार में खड़े हैं, फिर भी पंजीकरण पूरा नहीं हुआ है। हमारे पास होटल या धर्मशाला में रहने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं, इसलिए हम रात यहीं बिताना चाहते थे, लेकिन अनुमति नहीं मिली। सरकार को सुगम यात्रा के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए।"

इसी प्रकार छत्तीसगढ़ से आए भरतुरम साहू ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा:

"हम सुबह 7 बजे से लाइन में लगे हैं, लेकिन दोपहर 2 बजे पंजीकरण रोक दिया गया। हमारे समूह में 95 लोग हैं और आवास की भारी समस्या है। लोग चिलचिलाती गर्मी में परेशान हो रहे हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर यात्री का पंजीकरण हो सके।"

पंजीकरण में अव्यवस्था

झारखंड से आईं फुलेश्वरी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वे दो दिनों से भटक रही हैं। रात 2 बजे कतार में लगने के बावजूद उनकी बारी नहीं आई। चार धाम यात्रा की योजना पंजीकरण प्रणाली की अव्यवस्था के कारण पूरी तरह चौपट हो गई है। यदि पंजीकरण नहीं हो पाया, तो उन्हें आर्थिक तंगी के कारण घर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक और दुखद है।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केदारनाथ और यमुनोत्री धाम जाने वाले भक्तों की संख्या में अचानक भारी वृद्धि हुई है। जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि चार धाम यात्रा पंजीकरण प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जाएगा और पेयजल, टेंट व चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

प्रशासन का रुख

ऋषिकेश में भी पंजीकरण काउंटरों को दोपहर 2 बजे के बाद बंद करने का निर्णय लिया गया है। काउंटर प्रभारी प्रेमानंद ने बताया कि यात्रियों के अत्यधिक दबाव के कारण पिछले दो दिनों से समय सीमा तय करनी पड़ी है। यह सीमित पंजीकरण प्रक्रिया यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है, क्योंकि वे सीमित बजट के साथ अपनी यात्रा पर निकले हैं और दो दिनों से शहर में फंसे हुए हैं।

अव्यवस्था के कारण कई यात्री अब पंजीकरण केंद्र के परिसर में ही रात बिताने को विवश हैं। चार धाम यात्रा पंजीकरण की यह chaotic स्थिति न केवल भक्तों के समय को बर्बाद कर रही है, बल्कि उनकी आस्था और धैर्य की भी परीक्षा ले रही है। यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस और पारदर्शी व्यवस्था नहीं की, तो यह धार्मिक यात्रा कई लोगों के लिए एक कड़वा अनुभव बनकर रह जाएगी।

अंत में, यह अनिवार्य है कि तीर्थयात्रियों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए पंजीकरण केंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाए। सरकार को चाहिए कि वह ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में पारदर्शिता लाए और ऑफलाइन पंजीकरण के लिए अधिक केंद्रों की स्थापना करे। तभी भक्त बिना किसी डर या असुविधा के अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण कर पाएंगे। चार धाम यात्रा पंजीकरण के बिना यात्रा करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भक्तों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है।

डिस्क्लेमर:

यह रिपोर्ट मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध तथ्यों के संकलन पर आधारित है। इसे केवल जनहित एवं सूचनात्मक उद्देश्य के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक द्वारा जारी किया गया है। किसी भी संदर्भ में विभागीय अथवा आधिकारिक अधिसूचना को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत या व्यावसायिक निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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