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इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला 

इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला। कांगो में फैली महामारी के बीच भारत ने भेजी जीवन रक्षक दवाओं की बड़ी खेप।

By अजय त्यागी 1 min read
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भारत ने आपातकालीन दवाइयों की खेप भेजी

इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला जब भारत ने कांगो में फैल रही घातक महामारी को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन दवाइयों की खेप भेजी। अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) ने बुधवार को पुष्टि की कि भारत द्वारा दान की गई चिकित्सा सामग्री युगांडा पहुँच चुकी है, जिसे पूर्वी कांगो के प्रभावित समुदायों तक पहुँचाया जाएगा। यह कदम वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

इस खेप में आवश्यक डायग्नोस्टिक्स, चिकित्सीय उपकरण, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण सामग्री, तथा केस प्रबंधन के लिए जरूरी सहायता शामिल है। इबोला का 'बुन्डिबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन अत्यंत घातक है, जो पहली बार 2007 में युगांडा में पहचाना गया था। अफ्रीका सीडीसी ने इस सहयोग के लिए भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मदद महाद्वीप पर जीवन बचाने और स्वास्थ्य सुरक्षा को उन्नत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।[1]

महामारी की गंभीर चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बुन्डिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ अभी तक कोई भी अधिकृत दवा या टीका मौजूद नहीं है, जो इस संकट को और अधिक गंभीर बना देता है। इबोला एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित शरीर के तरल पदार्थ, दूषित सामग्री या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव शामिल है। ऐसे में इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला है 

एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "अफ्रीका सीडीसी कांगो में जारी इबोला आउटब्रेक पर प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिए भारत सरकार और लोगों द्वारा उदारतापूर्वक दान की गई आपातकालीन दवा आपूर्ति का स्वागत करता है।" यह वायरस मुख्य रूप से जंगली जानवरों के संपर्क से मनुष्यों में प्रवेश करता है। वर्तमान में स्वास्थ्य एजेंसियां इस महामारी के वास्तविक प्रसार का आकलन करने में जुटी हैं।

वैश्विक स्वास्थ्य साझेदारी

भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीकी देशों के साथ स्वास्थ्य और विकास साझेदारी का विस्तार किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारत ने दुनिया भर में दवाओं और टीकों की आपूर्ति कर एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी छवि बनाई थी। इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला जो इसी नीति का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के समय मानवता की सेवा को प्राथमिकता देता है।

17 मई को WHO ने कांगो और युगांडा में चल रहे इस प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया था। मंगलवार तक, एक हजार से अधिक संदिग्ध संक्रमण और 220 से अधिक मौतों की सूचना मिली थी, हालांकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला जो ऐसे समय में मील का पत्थर साबित हो रहा है, जब प्रभावित क्षेत्रों में संसाधनों की भारी कमी है।

एकजुटता की आवश्यकता

इबोला जैसी जानलेवा महामारी से निपटने के लिए संसाधनों के साथ-साथ जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। भारत द्वारा भेजी गई यह मदद उन स्थानीय टीमों के लिए एक बड़ा सहारा है जो दिन-रात इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए संघर्ष कर रही हैं। इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला जो यह संदेश देता है कि वैश्विक स्वास्थ्य संकटों का मुकाबला केवल एकजुटता और आपसी सहयोग से ही संभव है।

यह सहयोग स्पष्ट करता है कि भारत वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में कार्य कर रहा है। इबोला संकट में भारत का मानवीय चेहरा देखने को मिला जो न केवल प्रभावित समुदायों को चिकित्सा राहत पहुँचा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के ढांचे को भी मजबूती दे रहा है। 

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