राजस्थान

टेक्सटाइल मिल में श्रमिकों का आक्रोश: बकाया भुगतान के लिए प्रदर्शन

टेक्सटाइल मिल में श्रमिकों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। बोनस, पीएल और ओवरटाइम के भुगतान के लिए मजदूरों ने किया जोरदार प्रदर्शन।

By अजय त्यागी 1 min read
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टेक्सटाइल मिल में श्रमिकों का आक्रोश

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। टेक्सटाइल मिल में श्रमिकों का आक्रोश शुक्रवार को उस समय चरम पर पहुंच गया, जब बड़ी संख्या में मजदूरों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। वस्त्रनगरी के रीको चतुर्थ फेज स्थित सिल्वर फैब प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एकजुट हुए इन श्रमिकों ने भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के बैनर तले अपनी आवाज बुलंद की। मुखर्जी पार्क से शुरू हुई यह विशाल रैली कलेक्ट्रेट पहुंचकर एक बड़े विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गई।

मजदूरों ने फैक्ट्री मालिक संपत चौरड़िया के खिलाफ कड़ी नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया। आक्रोशित श्रमिकों का कहना है कि प्रबंधन द्वारा उनके साथ किया जा रहा व्यवहार न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि श्रम कानूनों का भी खुला उल्लंघन है। फैक्ट्री की तानाशाही से तंग आकर मजदूरों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है और वे न्याय मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

श्रम कानून का उल्लंघन

सीटू के प्रदेश सचिव ओमप्रकाश देवानी ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन ने बिना किसी युक्तियुक्त कारण के श्रमिकों को अचानक सेवा से पृथक कर दिया है। इसके अलावा, मजदूरों के ओवरटाइम, ग्रेच्युटी, बोनस और पीएल (अर्जित अवकाश) जैसी न्यायसंगत राशियों का भुगतान भी प्रबंधन ने दबाकर रखा है, जो कानूनन मजदूरों का अधिकार है।

इस गंभीर स्थिति पर सीटू के प्रदेश सचिव ने कहा:

"फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के साथ किया गया व्यवहार पूरी तरह से गैर-कानूनी है। मजदूरों का हक छीनना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जब तक भुगतान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।"

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

प्रदर्शन में शामिल टेक्सटाइल यूनियन के अध्यक्ष सोनू शर्मा, उपाध्यक्ष सद्दाम, करण सिंह, गणेश गहलोत और मोतीलाल समेत सैकड़ों मजदूरों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पूर्व में उप श्रम आयुक्त से भी शिकायत की थी। लेकिन वहां से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण मजबूरन उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। पीड़ित श्रमिकों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी ही मिल मालिकों के हौसले बुलंद कर रही है।

जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मजदूरों ने मांग की है कि सिल्वर फैब के मालिक से श्रमिकों के समस्त बकाए का तुरंत भुगतान करवाया जाए। साथ ही, टेक्सटाइल क्षेत्र की अन्य मिलों में भी श्रमिकों से कराए जा रहे जबरन और बिना भुगतान वाले ओवरटाइम पर तत्काल रोक लगाई जाए। मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

अधिकारों की रक्षा जरूरी

प्रदर्शन के दौरान देवराज सिंह, देवीलाल, सत्येंद्र, लादी देवी और जोहराबानू सहित सैकड़ों मजदूर उपस्थित थे। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे मेहनत की कमाई के लिए आज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। टेक्सटाइल मिल में श्रमिकों का आक्रोश यह बताता है कि वस्त्रनगरी की औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों का शोषण किस हद तक बढ़ गया है।

अंततः, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर मजदूरों को उनका हक दिलवाए। औद्योगिक क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रबंधन और श्रमिकों के बीच संवाद जरूरी है। यदि सरकार और श्रम विभाग समय रहते सख्त कदम नहीं उठाता है, तो टेक्सटाइल मिल में श्रमिकों का आक्रोश बड़े औद्योगिक संकट को जन्म दे सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट श्रमिकों और ट्रेड यूनियन द्वारा दिए गए ज्ञापन और बयानों पर आधारित है। प्रबंधन का पक्ष इसमें शामिल नहीं है। किसी भी विवाद में कानूनी प्रक्रिया या श्रम विभाग की जांच का परिणाम ही अंतिम माना जाना चाहिए। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस विषय में किसी भी कानूनी विवाद के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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