राजस्थान

पहाड़ी खनन का विरोध: सड़कों पर उतरा पूरा मंडोली गांव

पहाड़ी खनन का विरोध: मंडोली गांव के ग्रामीणों ने खनन पट्टा निरस्त करने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा, भारी आक्रोश।

By अजय त्यागी 1 min read
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पहाड़ी खनन का विरोध

नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। पहाड़ी खनन का विरोध करने के लिए आज मंडोली गांव के सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। इस प्रदर्शन में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की बड़ी संख्या ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि स्थानीय पटवारी, ग्राम सेवक और सरपंच की मिलीभगत से उनके गांव की पहाड़ी को नष्ट किया जा रहा है, जिसे वे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे।

हाथों में तख्तियां और बैनर लिए ग्रामीणों का यह हुजूम सरकार और प्रशासन विरोधी नारे लगाते हुए खेतड़ी मोड़ से एसडीएम कार्यालय तक पहुँचा। वहां उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य रूप से खनन पट्टा निरस्त करने व दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की मांग दोहराई। ग्रामीणों का आक्रोश उनके द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में साफ झलकता है, जिसमें उन्होंने पहाड़ी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

अस्तित्व बचाने की लड़ाई

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पास स्थित यह पहाड़ी उनकी संस्कृति और पर्यावरण का अभिन्न अंग है। उनका मानना है कि यदि यहां खनन जारी रहा, तो न केवल पर्यावरण का संतुलन बिगड़ेगा, बल्कि गांव का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रदर्शन के दौरान एक ग्रामीण ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा:

"यह पहाड़ी हमारे गांव की पहचान है और इसे नष्ट करना हमारे साथ अन्याय है। हम किसी भी सूरत में खनन नहीं होने देंगे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं।"

प्रशासन को सख्त चेतावनी

एसडीएम कार्यालय में अपनी बात रखते हुए ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वे खनन पट्टे को तुरंत रद्द करने के अलावा, पूरे क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन की जांच की भी मांग कर रहे हैं। प्रशासन को दी गई चेतावनी में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अब वे और अधिक समय तक अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यह पहाड़ी खनन का विरोध स्थानीय स्तर पर अब एक बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। प्रशासन के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है कि वह जन-भावनाओं का सम्मान कैसे करता है और इस विवादित खनन पट्टे पर क्या निर्णय लेता है। ग्रामीण अब इस उम्मीद में हैं कि उनकी मेहनत और संघर्ष रंग लाएगा और पहाड़ी को खनन माफियाओं से बचाया जा सकेगा।

न्याय की आस में गांव

पूरे गांव की एकजुटता ने यह सिद्ध कर दिया है कि स्थानीय लोग अपने संसाधनों की रक्षा के लिए कितने सजग हैं। पहाड़ी खनन का विरोध का यह मामला अब जिले भर में चर्चा का विषय है। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट संकेत दिया है कि वे अपनी पहाड़ी को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

अंततः, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। ग्रामीण अब शांतिपूर्वक लेकिन दृढ़ता के साथ अपनी मांगों पर टिके हुए हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस पहाड़ी खनन का विरोध को संज्ञान में ले और ग्रामवासियों की उचित मांगों का निराकरण करे ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रदर्शन की जानकारी पर आधारित है। किसी भी कर्मचारी या अधिकारी पर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक इस विषय में किसी भी कानूनी या प्रशासनिक निर्णय के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं।

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