गूगल पर कोर्ट का जुर्माना: ट्रेडमार्क के दुरुपयोग और एडवर्ड्स पॉलिसी के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल पर लगाया 30 लाख का भारी जुर्माना।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
(दिल्ली)। गूगल पर कोर्ट का जुर्माना ट्रेडमार्क के दुरुपयोग के मामले में एक बड़ा कानूनी पड़ाव बनकर सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सैनिटरीवेयर कंपनी हिंदवेयर के ट्रेडमार्क को अपने एडवर्ड्स प्रोग्राम में कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने के लिए गूगल को 30 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। अदालत ने इसे व्यापार में अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करार दिया है।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने दो मुकदमों की सुनवाई करते हुए कहा कि गूगल का यह कृत्य ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत अनुचित लाभ की श्रेणी में आता है। अदालत ने गूगल एलएलसी और गूगल इंडिया को 'हिंदवेयर' या इससे जुड़े अन्य मिलते-जुलते शब्दों को अपने विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने से तुरंत प्रभाव से रोक दिया है।[1]
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि गूगल को यह जुर्माना आठ सप्ताह के भीतर चुकाना होगा। इसके साथ ही, कंपनी को मुकदमे से जुड़ी वास्तविक कानूनी लागत भी वहन करनी होगी, जिसके लिए उन्हें अपना 'बिल ऑफ कॉस्ट' जमा करना होगा। अदालत ने पाया कि गूगल का एडवर्ड्स प्रोग्राम मुख्य रूप से एक व्यावसायिक उद्यम है, जो विज्ञापनों के जरिए मुनाफा कमाने के लिए सर्च इंजन का इस्तेमाल करता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की:
"गूगल का एडवर्ड्स प्रोग्राम एक व्यावसायिक उद्यम है। अपने विज्ञापन व्यवसाय को लाभ पहुँचाने के लिए किसी प्रसिद्ध ट्रेडमार्क की प्रतिष्ठा का शोषण करना गलत है।"
अदालत ने माना कि गूगल ने प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धियों को उन उपयोगकर्ताओं को इंटरसेप्ट करने में सक्षम बनाया जो हिंदवेयर ब्रांड में रुचि रखते थे। ऐसा करके गूगल ने न केवल एक 'अनुचित व्यवहार' का सहारा लिया, बल्कि विज्ञापन व्यवसाय से मुनाफा कमाने के लिए ब्रांड की विशिष्ट पहचान का भी फायदा उठाया। अदालत ने यह भी नोट किया कि गूगल ने किसी भी चरण पर संबंधित कंपनी से ट्रेडमार्क इस्तेमाल की अनुमति नहीं ली थी। इसलिए गूगल पर कोर्ट का जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा, अदालत ने आईटी अधिनियम की धारा 79(1) के तहत गूगल के 'सेफ हार्बर' सुरक्षा दावे को भी खारिज कर दिया। अदालत के अनुसार, ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में नीलाम करना और बेचना कानूनी जिम्मेदारी से छूट के दायरे में नहीं आता है। यह मामला गूगल की उस व्यावसायिक नीति पर सवाल उठाता है, जिसे उसने 2009 के बाद भारत में लागू किया था।
वर्ष 2009 से पहले, गूगल स्वयं भारत में ट्रेडमार्क को कीवर्ड के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं देता था, लेकिन बाद में कंपनी ने अपनी नीति बदल ली। अदालत ने कहा कि गूगल की वर्तमान व्यावसायिक नीति स्पष्ट रूप से ट्रेडमार्क वाले शब्दों को कीवर्ड के रूप में बढ़ावा देने और उनसे व्यावसायिक लाभ कमाने के लिए ही डिजाइन की गई है। यह फैसला भविष्य में डिजिटल विज्ञापन जगत के लिए एक बड़ी नजीर साबित हो सकता है।
कोर्ट के इस सख्त निर्देश के बाद अब टेक दिग्गज कंपनियों को अपनी विज्ञापन नीतियों और कीवर्ड ऑक्शन सिस्टम पर पुनर्विचार करना होगा। ट्रेडमार्क धारकों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत है। गूगल पर कोर्ट का जुर्माना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब अपनी नीतियों की आड़ में किसी भी ब्रांड की साख का व्यावसायिक शोषण नहीं कर पाएंगे।
यह रिपोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया न्यायिक फैसले पर आधारित है। यह केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे किसी कानूनी सलाह के रूप में न लिया जाए। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी कानूनी परिणाम या कंपनी की आंतरिक नीतियों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।