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सिविल डिफेंस वालंटियर के नियमितीकरण और कर्मचारियों जैसे दर्जे की मांग 

सिविल डिफेंस वालंटियर के नियमितीकरण को लेकर आपदा के योद्धाओं ने सरकार से स्थायी रोजगार और सरकारी कर्मचारियों का दर्जा देने की मांग की।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

(बीकानेर, राजस्थान)। सिविल डिफेंस वालंटियर के नियमितीकरण की मांग को लेकर अब आवाजें मुखर होने लगी हैं। समाज सेवी मंगल चंद प्रजापत ने केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर देश भर के नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों के भविष्य को सुरक्षित करने की पुरजोर अपील की है। पत्र में मांग की गई है कि इन जवानों को 365 दिन की नियमित ड्यूटी सुनिश्चित की जाए और 1968 की नियमावली में संशोधन कर इन्हें केंद्रीय अथवा राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

नागरिक सुरक्षा वालंटियर्स, जो आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों में देश की रीढ़ माने जाते हैं, वे आज रोजगार की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। प्रजापत ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से अपनी सेवाएं देने के बावजूद इन जवानों को स्थायी रोजगार का अभाव है, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। यह विसंगति उन युवाओं के लिए निराशाजनक है जो हर आपदा में जान जोखिम में डालकर सबसे आगे रहते हैं।

अनुभव का सम्मान जरूरी

सिविल डिफेंस के जवान जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर के अधीन और विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से रिक्त पदों के विरुद्ध अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन्हें आपदाओं से निपटने का व्यापक अनुभव है, फिर भी इन्हें स्थायी रोजगार से वंचित रखा जाना एक गंभीर विषय है। सरकार की उपेक्षा के चलते इन जवानों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, जबकि इन्हें किसी भी अन्य सरकारी विभाग की भांति कार्यकुशल माना जा सकता है।

प्रजापत ने सिविल डिफेंस वालंटियर के नियमितीकरण की मांग को तर्कसंगत बताते हुए कहा:

"सिविल डिफेंस मुख्यालय पर काम करने वाला एक बड़ा संगठन है जो इंडिया लेवल पर सक्रिय है। समस्त राज्यों और जिलों में सरकार को इसे मजबूती से खड़ा करना चाहिए और इन्हें 365 दिन का रोजगार देकर केंद्रीय या राज्य कर्मचारी का दर्जा देना चाहिए।"

बढ़ते खतरों का सामना

आज के समय में मानव निर्मित और प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में सिविल डिफेंस का महत्व और अधिक बढ़ गया है। आपदा की घड़ी में यह संगठन 24 घंटे अपनी सेवाएं देने में सक्षम है। लेकिन यदि इन वालंटियर्स को आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो वे आने वाली चुनौतियों के लिए अपनी पूरी ऊर्जा के साथ तैयार नहीं रह पाएंगे।

सरकार से अपेक्षा है कि वह सिविल डिफेंस वालंटियर के नियमितीकरण की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और सिविल डिफेंस वालंटियर्स के हित में ठोस कदम उठाए। इन्हें केवल एक स्वयंसेवक मानकर न छोड़ते हुए, इन्हें हर प्रकार की सरकारी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। सिविल डिफेंस वालंटियर का नियमितीकरण केवल एक मांग नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और सेवा में लगे जवानों का अधिकार है, जिसे जल्द पूरा करना आवश्यक है।

राष्ट्रहित में निर्णायक कदम

समाज सेवी प्रजापत का मानना है कि यदि इन जवानों को स्थायी रोजगार मिल जाता है, तो ये और भी अधिक मजबूती और निष्ठा के साथ देश के लिए काम कर पाएंगे। किसी भी आपदा या संकट के समय, ये जवान पहले की तरह ही मुस्तैदी से खड़े रहेंगे, जरूरत है तो बस सरकार की एक छोटी सी नीतिगत पहल की। यह कदम न केवल इन परिवारों को सहारा देगा, बल्कि आपदा प्रबंधन ढांचे को भी सुदृढ़ करेगा।

निष्कर्ष के तौर पर, अब गेंद सरकार के पाले में है। गृह मंत्रालय को चाहिए कि वह 1968 की नियमावली की समीक्षा करे और समय की मांग के अनुरूप बदलाव लाए। अंततः, सिविल डिफेंस वालंटियर का नियमितीकरण ही एकमात्र रास्ता है जिससे देश की सेवा में लगे इन योद्धाओं का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा और वे आने वाले कठिन समय में देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा घेरा बन सकेंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट एक व्यक्तिगत पत्र और समाज सेवी द्वारा उठाई गई मांगों पर आधारित है। यह केवल एक सूचनात्मक रिपोर्ट है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी सरकारी नीति या भविष्य में होने वाले प्रशासनिक निर्णयों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

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