विनेश फोगाट ट्रायल में हारीं और एशियन गेम्स से बाहर हो गईं। भारतीय कुश्ती संघ पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने सिस्टम पर फोड़ा ठीकरा।
विनेश फोगाट ट्रायल में हारीं:
(दिल्ली)। विनेश फोगाट ट्रायल में हारीं और इसी के साथ उन उम्मीदों का भी अंत हो गया है, जो करोड़ों प्रशंसक एशियाई खेलों में उनकी वापसी को लेकर लगाए बैठे थे। दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल्स के सेमीफाइनल मुकाबले में विनेश को मीनाक्षी गोयत के हाथों 4-6 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। आठ साल बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के सपने के साथ उतरीं विनेश के लिए यह महज एक कुश्ती मैच की हार नहीं, बल्कि उस लंबी लड़ाई का दुखद समापन है, जिसे वे पिछले काफी समय से भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के साथ लड़ रही थीं।[1]
मैदान पर उतरने से पहले ही विनेश जिस मानसिक और प्रशासनिक द्वंद से गुजरीं, उसका असर उनकी बाउट पर साफ दिखाई दिया। ट्रायल की शुरुआत से पहले वजन श्रेणी को लेकर हुए विवाद ने स्पष्ट कर दिया था कि यह सिर्फ दो पहलवानों के बीच का मुकाबला नहीं था। विनेश फोगाट ट्रायल में हारीं और सेमीफाइनल की हार के बाद उन्होंने जो बयान दिया, वह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर एक गहरा और तीखा प्रहार है।
बेशक, प्रत्यक्ष रूप में विनेश फोगाट ट्रायल में हारीं लेकिन उन्होंने सेमीफाइनल की हार के बाद अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए साफ कहा कि वह केवल एक कुश्ती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से लड़ रही थीं। उन्होंने दावा किया कि वे रिंग में अकेली खड़ी थीं, जबकि बाकी पूरा तंत्र उनके खिलाफ लामबंद था।
"मैं हारी नहीं हूं। मैं एक पूरे सिस्टम से लड़ाई लड़ रही थी। मैं एक जगह अकेली खड़ी थी, जबकि दूसरी ओर सब मेरे खिलाफ थे।"
विनेश का यह आरोप साबित करता है कि खेल के मैदान से ज्यादा उनकी लड़ाई फाइलों और फेडरेशन की राजनीति के गलियारों में लड़ी जा रही थी। हालांकि, WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने किसी भी भेदभाव से इनकार करते हुए इसे सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है, लेकिन खिलाड़ी का दर्द प्रशासनिक दावों की पोल खोलता नजर आता है।
ट्रायल के दिन की सुबह जिस तरह से विनेश की वजन श्रेणी को लेकर अनिश्चितता रही, वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की एथलीट के लिए विचलित करने वाली थी। उन्हें पहले सिर्फ 50 किलोग्राम वर्ग में खेलने का फरमान सुनाया गया था, जबकि वे 53 किलोग्राम में प्रतिस्पर्धा करना चाहती थीं। अंततः दबाव में आकर उन्हें अनुमति तो दी गई, लेकिन उस वक्त तक मानसिक ऊर्जा का जो ह्रास हो चुका था, वह उनकी कुश्ती में स्पष्ट झलका।
WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि हमने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया और उन्होंने खुद श्रेणी नहीं चुनी थी। लेकिन सवाल यह है कि यदि एक दो बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक विजेता को अपनी पसंद की श्रेणी के लिए भी संघर्ष करना पड़े, तो क्या इसे 'खेल भावना' माना जाए या फिर किसी खिलाड़ी को तोड़ने की सोची-समझी साजिश?
जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में विनेश की अनुपस्थिति भारतीय दल के लिए एक बड़ा झटका होगी। 2014 के इन्चियोन गेम्स में कांस्य और 2018 के जकार्ता गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली विनेश का ट्रैक रिकॉर्ड यह बताने के लिए काफी है कि उन्होंने क्या खोया है। वहीं, उन्हें हराने वाली मीनाक्षी गोयत का आत्मविश्वास अब आसमान पर है, जिन्होंने इससे पहले अंतिम पंघाल को हराकर अपनी चमक बिखेरी थी।
बहरहाल, विनेश फोगाट ट्रायल में हारीं लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई यही है कि खेल के मैदान पर वही खिलाड़ी टिकता है जिसका ध्यान सिर्फ प्रतिद्वंद्वी पर होता है। लेकिन जब खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा अपने ही फेडरेशन के फैसलों और राजनीति का सामना करना पड़े, तो हार केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि खेल व्यवस्था की होती है। इस अध्याय ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कुश्ती के अखाड़े से ज्यादा खतरनाक राजनीति के मैदान हैं।
यह रिपोर्ट सामान्य सूचना और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया या खेल विवादों के संबंध में संबंधित खेल महासंघ के आधिकारिक रिकॉर्ड को ही अंतिम मानें। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार के राजनीतिक विवाद या अनपेक्षित जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।