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रायगढ़ में हाथी शावक की मौत: वन विभाग के प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह

नहीं थम रहा सिलसिला, रायगढ़ में हाथी शावक की मौत की एक और दुखद घटना ने वन विभाग की प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

By अजय त्यागी 1 min read
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रायगढ़ में हाथी शावक की मौत

रायगढ़, छत्तीसगढ़। रायगढ़ में हाथी शावक की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खरसिया रेंज की गुरदा संगम नदी में आज सुबह एक नन्हे हाथी का शव तैरता हुआ मिला, जिसे देखकर स्थानीय ग्रामीण भी स्तब्ध रह गए। सुबह 9 बजे के आसपास जब ग्रामीणों ने नदी में शावक के शव को देखा, तो तत्काल इसकी सूचना वन विभाग और हाथी मित्र दल को दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन यह घटना फिर से उसी पुराने सवाल को जीवंत कर गई है कि आखिर हाथियों की सुरक्षा के नाम पर हो क्या रहा है?

पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में 50 से अधिक हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है। अनुमान है कि बीती रात पानी की तलाश में नदी पार करते समय यह हादसा हुआ। लेकिन सवाल यह है कि यदि हाथियों का इतना बड़ा दल क्षेत्र में मौजूद था, तो वन विभाग की निगरानी टीमें कहाँ थीं? क्या वन विभाग की जिम्मेदारी केवल शव मिलने के बाद उसे निकालने तक ही सीमित रह गई है? रायगढ़ में हाथी शावक की मौत का यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक गहरा तंज है।[1]

प्रबंधन की विफलता

जनवरी माह से अब तक रायगढ़ में हाथी शावक की मौत के नौ मामले सामने आ चुके हैं। आंकड़ों का यह ग्राफ केवल संख्या नहीं, बल्कि वन प्रबंधन की नाकामी की कहानी बयां करता है। अधिकांश मामलों में पानी में डूबकर मौत होना यह दर्शाता है कि हाथियों के लिए सुरक्षित जल स्रोतों की व्यवस्था करने में विभाग पूरी तरह विफल रहा है। क्या विभाग को हाथियों के विचरण मार्ग और उनके लिए पानी की उपलब्धता का अंदाजा नहीं था? यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

जब रायगढ़ में हाथी शावक की मौत के मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, तब भी जिम्मेदार अधिकारी कागजी जांच के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हाथियों के इतने बड़े दल की मॉनिटरिंग के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। यदि समय रहते इन संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में यह सिलसिला और भी भयावह रूप ले सकता है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर हाथियों का अस्तित्व अब उनके लिए महज आंकड़ों का खेल बन चुका है?

जवाबदेही का अभाव

हाथी शावकों की जान जाना प्रकृति के असंतुलन का स्पष्ट संकेत है। रायगढ़ में हाथी शावक की मौत के लगातार सामने आ रहे मामले यह सिद्ध करते हैं कि वन विभाग की निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं गहरी चूक है। अधिकारी अक्सर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए 'दुर्घटना' का बहाना बना लेते हैं, लेकिन एक-दो नहीं, नौ मौतों के बाद भी कोई ठोस सुधार न होना किसी बड़ी मिलीभगत या प्रशासनिक ढिलाई की ओर इशारा करता है।

अंततः, राजनीति और प्रशासन के फेर में बेजुबान जानवर अपनी जान गँवा रहे हैं। यदि वन प्रबंधन अपनी कार्यक्षमता नहीं बढ़ा सकता, तो उन्हें इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद की गरिमा के अनुरूप कार्यवाही करनी चाहिए। जंगल और वन्यजीवों को केवल फाइलों में बचाने का दिखावा कब तक चलेगा? रायगढ़ में हाथी शावक की मौत का यह तांडव कब रुकेगा, यह बड़ा प्रश्न आज हर नागरिक की जुबान पर है।

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