ट्रंप मुआवजा फंड विवाद ने वाशिंगटन में मचाई हलचल। रिपब्लिकन सीनेटरों की बगावत के बाद राष्ट्रपति के 1.8 बिलियन डॉलर के फंड पर लगी रोक।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक अमेरिकी कैपिटल की दीवारों पर चढ़ गए
वाशिंगटन, अमेरिका। ट्रंप मुआवजा फंड विवाद ने अमेरिकी राजनीति में सत्ता के गलियारों के भीतर एक ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसकी गूंज व्हाइट हाउस से लेकर कैपिटल हिल तक सुनाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लगभग 1.8 बिलियन डॉलर का वह प्रस्तावित फंड, जिसे कथित सरकारी 'हथियारीकरण' के पीड़ितों के मुआवजे के लिए बनाया गया था, फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यह फैसला तब आया जब रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही ट्रंप के प्रति असंतोष की लहर दौड़ गई, जो खुद राष्ट्रपति के उस वफादारी वाले एजेंडे को चुनौती देती नजर आ रही है।[1]
रिपब्लिकन सीनेटरों की यह बगावत उस समय हुई है जब वाशिंगटन के कानून निर्माता 72 बिलियन डॉलर के उस बिल पर गतिरोध का सामना कर रहे हैं, जो ICE और बॉर्डर पेट्रोल ऑपरेशनों के लिए अत्यंत आवश्यक है। सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून ने स्पष्ट कर दिया था कि यह फंड अब एक बोझ बन चुका है, जिसे खत्म करना ही एकमात्र विकल्प है। क्या यह ट्रंप की अपनी पार्टी पर गिरती पकड़ का संकेत है, या यह राजनीति का वह हिस्सा है जहाँ वफादारी से ऊपर बजट की गणित को प्राथमिकता दी जाती है?
ट्रंप मुआवजा फंड विवाद तब और गहरा गया जब यह खुलासा हुआ कि इस पैसे का उपयोग उन लोगों के लिए भी हो सकता है जिन्होंने 6 जनवरी, 2021 को यूएस कैपिटल पर हमला किया था। आलोचकों ने इसे सीधा-सीधा एक 'स्लश फंड' करार दिया, जिसका उपयोग राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया जा रहा है। कोर्ट द्वारा फंड पर अस्थायी रोक और रिपब्लिकन सीनेटरों के तीखे तेवरों ने ट्रंप प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है।
"उन्होंने हमें अल्टीमेटम दिया था, और हमारे पास इस फंडिंग पैकेज को तेजी से पारित कराने के लिए इस फंड को रोकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।" - व्हाइट हाउस का एक आधिकारिक सूत्र।
न्याय विभाग का यह कहना कि वे अदालती फैसलों का पालन करेंगे, यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन इस मोर्चे पर फिलहाल हार स्वीकार करने को मजबूर है। हालांकि, विभाग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या यह फंड पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, या फिर यह किसी अन्य रूप में भविष्य में फिर से सामने आएगा।
ट्रंप मुआवजा फंड विवाद के बीच कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन पर ट्रंप के कथित दुश्मनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने का दबाव है, लेकिन इस फंड के कारण पैदा हुए आक्रोश ने उनकी स्थायी नियुक्ति की उम्मीदों को अधर में लटका दिया है। कानून निर्माताओं द्वारा ब्लैंच को खरी-खरी सुनाने की घटना यह दर्शाती है कि प्रशासनिक निर्णयों में अब राजनीतिक चश्मे का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ चुका है।
"इस सप्ताह, सीनेट डेमोक्रेट्स इस स्लश फंड को प्रतिबंधित करने के लिए कानून लाएंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी राष्ट्रपति फिर कभी ऐसा करने की हिम्मत न करे।" - चक शूमर, सीनेट अल्पसंख्यक नेता।
राष्ट्रपति ट्रंप, जो अपनी मर्जी के मालिक माने जाते हैं, वे इस 'पीछे हटने' से निश्चित रूप से खुश नहीं हैं, लेकिन सत्ता के खेल में सामंजस्य बैठाना उनकी मजबूरी बन गया है। ट्रंप मुआवजा फंड विवाद यह साबित करता है कि लोकतंत्र में जब भी जनता के पैसों का राजनीतिक उपयोग करने का प्रयास किया जाता है, तो कानून और विपक्ष का दबाव उसे रोकने की कोशिश करता है। क्या यह महज एक अस्थायी विराम है, या ट्रंप को झुकने पर मजबूर करने वाली कोई बड़ी राजनीतिक हलचल?
यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों के, विश्वस्त समाचार एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए, तथ्यों के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य सूचना के लिए है। इस आधार पर लिए गई किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।