अंतरराष्ट्रीय

केन्या इबोला क्वारंटाइन विरोध: सड़कों पर उतरे नागरिक, सिस्टम पर सवाल

केन्या इबोला क्वारंटाइन विरोध ने पकड़ा जोर। नन्युकी में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर सुविधा बनाने के खिलाफ सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे।

By अजय त्यागी 1 min read
Twitter Facebook WhatsApp

अमेरिका समर्थित इबोला क्वारंटाइन योजना का विरोध

नन्युकी, केन्या। केन्या इबोला क्वारंटाइन विरोध की लपटें अब उस नन्युकी शहर की सड़कों पर साफ दिखाई दे रही हैं, जहाँ अमेरिकी प्रशासन की एक कथित स्वास्थ्य सुविधा ने स्थानीय आबादी के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एयर फोर्स बेस पर 50 बिस्तरों वाली क्वारंटाइन यूनिट बनाने की योजना के खिलाफ सैकड़ों स्थानीय निवासी सड़कों पर उतर आए हैं। हाई कोर्ट द्वारा योजना को अस्थायी रूप से निलंबित करने के बावजूद, अमेरिकी विमानों की आवाजाही और बेस पर बढ़ती सैन्य हलचल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीतिक समझौतों के आगे स्थानीय अदालती आदेशों की कोई खास अहमियत नहीं रह गई है।[1]

रॉयटर्स के तथ्यों के मुताबिक, वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बताया था कि यह इकाई उन अमेरिकियों के लिए है जो वायरस के संपर्क में आए हैं। वहीं, केन्या के स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुअल ने शनिवार को एक बयान में पुष्टि की कि यह आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने की एक व्यापक योजना का हिस्सा है। क्या क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का ढोंग रचकर केन्या सरकार और अमेरिकी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं? नन्युकी जैसा एक छोटा शहर, जहाँ सैन्य कर्मी और आम नागरिक एक-दूसरे से जुड़े हैं, वहां इबोला मरीजों को लाने की योजना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।

अदालत बनाम अमेरिकी ताकत

केन्या इबोला क्वारंटाइन विरोध का मुख्य कारण वह डर है जो नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए सड़कों पर ले आया है। रॉयटर्स के अनुसार, शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने इस योजना पर रोक लगाई थी, लेकिन शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री का बयान और उसके बाद सैन्य विमानों का बेस पर आना यह दर्शाता है कि कानून के शासन और वैश्विक शक्तियों की महत्वाकांक्षाओं के बीच एक गहरी खाई है। क्या यह मान लिया जाए कि एक बार जब 'विदेशी शक्ति' किसी जमीन को अपना ठिकाना बना लेती है, तो वहां की जनता के स्वास्थ्य की कीमत कागजी आदेशों से कहीं कम हो जाती है?

"हम अपनी जिंदगी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। नन्युकी एक बहुत छोटा शहर है। यहां के सैन्य कर्मी हमारे साथ ही रहते हैं, हमारे बच्चे एक ही स्कूल में जाते हैं, ऐसे में अगर कोई संक्रमित हुआ तो हम सब संक्रमित हो जाएंगे।" - पैट्रिक वाहोमे, आयोजक, प्रदर्शन।

प्रदर्शनकारियों ने 9 जून तक इस सुविधा को स्थायी रूप से बंद करने का अल्टीमेटम दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बेस की ओर जाने वाली सड़कों पर पुलिस और सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है। जब एक स्थानीय कैफे मालिक पैट्रिक मैना जैसे लोगों को अपना व्यापार बंद करना पड़ जाए, तो यह कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक असफलता है।

कूटनीति की काली सच्चाई

केन्या इबोला क्वारंटाइन विरोध ने यह भी उजागर किया है कि वैश्विक राजनीति में 'आपातकालीन प्रतिक्रिया' के नाम पर कैसे आम नागरिकों को प्रयोग की वस्तुओं के रूप में देखा जाता है। फ्लाइटराडार24 की सर्विस के अनुसार, शुक्रवार की दोपहर भी एक अमेरिकी सैन्य C-130 विमान नन्युकी पहुंचा था, जो अदालत के आदेश के बावजूद चल रही गतिविधियों को दर्शाता है। सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच यह संतुलन हमेशा से ही सत्ताधारियों के लिए फायदे का सौदा रहा है।

"हम सुबह से अपना व्यापार नहीं खोल पाए हैं और स्थिति कल और भी खराब होने की संभावना है।" - पैट्रिक मैना, कैफे मालिक, रॉयटर्स के अनुसार।

केन्या इबोला क्वारंटाइन विरोध की यह लहर केवल एक बेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे को तोड़ने वाली घटना है जो किसी भी लोकतंत्र की नींव होती है। यदि सरकार और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अपनी जनता की आवाज को अनसुना करना जारी रखते हैं, तो आने वाले दिन नन्युकी के लिए और भी अस्थिर हो सकते हैं। शांति की जगह धुंए से भरी ये सड़कें केवल एक चेतावनी हैं कि जब अस्तित्व पर खतरा हो, तो जनता के सामने केवल लड़ने का ही विकल्प बचता है।

Source Source
#KenyaEbolaProtest #NanyukiUnrest #USMilitaryBase #PublicHealthCrisis #KenyaNews #ProtestForLife
Read Full Article on RexTV India