सोना तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश। दुबई से मुंबई पहुंचे तस्कर, 2.6 किलो विदेशी सोना जब्त, करोड़ों का अवैध कारोबार हुआ उजागर।
4.2 करोड़ रुपये का सोना बरामद
मुंबई, महाराष्ट्र। सोना तस्करी सिंडिकेट के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी कामयाबी हासिल की है। दुबई से भारत में अवैध रूप से सोना लाने की फिराक में लगे एक गिरोह को खुफिया इनपुट के आधार पर दबोच लिया गया। इस कार्रवाई में न केवल दो कोरियर पकड़े गए, बल्कि नवी मुंबई का एक ज्वैलर भी रंगे हाथों गिरफ्तार हुआ, जो इस तस्करी के माल को रिसीव करने के लिए हवाई अड्डे पर पहुंचा था।[1]
अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए सोने का वजन 2.6 किलोग्राम है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 4.2 करोड़ रुपये आंकी गई है। तस्करों ने बड़ी चालाकी से 24 कैरेट शुद्ध सोने को पिघलाकर उसे 'मोम' (wax) का आकार दे दिया था, ताकि सुरक्षा जांच के दौरान वे आसानी से पकड़ में न आएं। इस पूरे 'ऑपरेशन' को अंजाम देने के लिए सोना तस्करी सिंडिकेट ने खास तौर पर कोरियर चुने थे, जो दुबई से यह खेप लेकर मुंबई तक पहुंचे थे।
सोना तस्करी सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि नवी मुंबई का यह ज्वैलर इस तस्करी का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दुबई से सोना मंगवाने की साजिश रची थी। डीआरआई की टीम ने इस सिंडिकेट के सदस्यों पर काफी समय से निगरानी रखी हुई थी। जैसे ही तस्करों ने हवाई अड्डे से बाहर निकलने का प्रयास किया, उन्हें धर दबोचा गया।
"यह सिंडिकेट संगठित तरीके से तस्करी कर रहा था। विदेशी सोने को वैक्स में बदलकर लाना इनका मुख्य तरीका था।" - डीआरआई के आधिकारिक सूत्र।
देश में सोने पर बढ़ते आयात शुल्क और टैक्स के कारण सोना तस्करी सिंडिकेट की सक्रियता बढ़ गई है। विदेशी मुद्रा को बचाने और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए सरकार ने जिस तरह से नियमों को सख्त किया है, उससे अवैध कारोबार करने वालों में एक नई छटपटाहट देखी जा रही है। क्या यह सख्ती इन गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए काफी है, या ये तस्कर नए-नए तरीकों से सरकारी खजाने को चूना लगाते रहेंगे?
सोना तस्करी सिंडिकेट का यह मामला साफ करता है कि कैसे कुछ लालची लोग चंद रुपयों के लिए देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। डीआरआई ने सभी आरोपियों के खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों की तलाश की जा रही है। क्या इस बार केवल 'मोहरे' ही जेल जाएंगे, या इन बड़े तस्करों के पीछे छिपे उन दिग्गजों तक भी जांच पहुंचेगी जो पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल को नियंत्रित करते हैं?
"डीआरआई पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि सिंडिकेट के हर एक सदस्य को बेनकाब किया जा सके।" - आधिकारिक जांच रिपोर्ट।
अवैध तरीके से सोना लाने की यह होड़ दर्शाती है कि कानून के डर से ऊपर 'मुनाफे' की भूख भारी पड़ रही है। डीआरआई की यह कार्रवाई केवल एक बरामदगी नहीं है, बल्कि एक चेतावनी भी है कि सरकारी एजेंसियां अब कहीं अधिक सतर्क हैं। सोने के चमकते हुए इन टुकड़ों के पीछे का काला सच अब धीरे-धीरे साफ हो रहा है। सवाल यह है कि कब तक तस्कर ऐसी नापाक कोशिशें करते रहेंगे, जब तक कि जड़ें न उखाड़ी जाएं?