क्राइम

आधार कार्ड साइबर फ्रॉड: फर्जी खातों के जरिए करोड़ों की लूट का खेल

आधार कार्ड साइबर फ्रॉड के जरिए जामताड़ा गैंग का नया कारनामा। फर्जी बैंक खातों और ठगी के जाल में फंस रहे हैं युवा, पुलिस हुई सतर्क।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

रांची, झारखंड। आधार कार्ड साइबर फ्रॉड का एक बेहद डरावना और संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। कुख्यात जामताड़ा साइबर गैंग के तार अब रांची तक फैल चुके हैं, जहां अपराधी भोले-भाले युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। ये ठग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के [Aadhaar Redacted] कार्ड्स को छोटी रकम के बदले हासिल करते हैं और फिर उन्हें डिजिटल ठगी का बड़ा हथियार बना देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जो सामने आया है, वह किसी फिल्म की पटकथा से भी अधिक चिंताजनक है।[1]

रांची के गोंदा थाना क्षेत्र में चल रहे इस रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने पाया कि अपराधी बेहद शातिराना तरीके से पहचान पत्र के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। शहर के पुलिस अधीक्षक (SP) पारस राणा ने खुलासा किया कि अपराधी पहले [Aadhaar Redacted] की जानकारी को फर्जी पते से बदल देते हैं, ताकि बैंक में नया खाता खोला जा सके। खाता खुलते ही, वे जानकारी को वापस मूल स्थिति में ले आते हैं। इससे न केवल पहचान पत्र असली दिखता है, बल्कि पुलिस के लिए ट्रैक करना भी लगभग नामुमकिन हो जाता है।

अदृश्य नेटवर्क का सच

आधार कार्ड साइबर फ्रॉड को अंजाम देने के लिए अपराधी इन फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए करते हैं। जब से साइबर सेल ने 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है, तब से इन गैंग्स ने पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों पर आधारित नए खातों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। बरामद किए गए दर्जनों हेरफेर किए हुए [Aadhaar Redacted] दस्तावेज इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई मामूली अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर युद्ध है।

"वास्तविक [Aadhaar Redacted] को पहले एक नकली पहचान में बदला गया। बैंक खाता खुलने के बाद, विवरणों को फिर से सही कर दिया गया ताकि वह असली दिखाई दे।" - पारस राणा, रांची सिटी एसपी।

पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि जामताड़ा से जुड़े ये गैंग सक्रिय रूप से बेरोजगार युवाओं को अपनी जाल में फंसा रहे हैं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को कॉल सेंटर या ऑनलाइन बैंकिंग असिस्टेंट के नाम पर नौकरी का झांसा दिया जाता है। काम मिलने की खुशी में युवा अनजाने में ही अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं, जहां से उनका वापस लौटना बहुत मुश्किल हो जाता है।

युवाओं का हो रहा इस्तेमाल

आधार कार्ड साइबर फ्रॉड की कड़वी सच्चाई यह है कि अपराधी कमीशन का लालच देकर युवाओं के बैंक खाते और एटीएम कार्ड तक अपने कब्जे में ले लेते हैं। इन युवाओं को अक्सर यह पता भी नहीं होता कि उनके खातों का इस्तेमाल ओटीपी स्कैम, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी और फर्जी कॉल्स के लिए किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड, जिसकी पहचान 'निखिल भैया' के रूप में हुई है, फिलहाल फरार है और उसकी धर-पकड़ के लिए छापेमारी जारी है।

"पुलिस बरामद दस्तावेजों और उन बैंक खातों की व्यापक जांच कर रही है जिन्हें हेरफेर किए गए [Aadhaar Redacted] दस्तावेजों के माध्यम से खोला गया था।" - आधिकारिक जांच रिपोर्ट।

रांची पुलिस ने अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए एक विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जिन दस्तावेजों और खातों का पता चला है, वे सिर्फ एक शुरुआत हैं। क्या 'निखिल भैया' की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट का पर्दाफाश हो पाएगा, या यह गैंग एक नए अवतार में फिर से सामने आएगा? प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी शातिर क्यों न हो।

सतर्कता ही एकमात्र बचाव

आधार कार्ड साइबर फ्रॉड की यह घटना देश के हर नागरिक के लिए एक चेतावनी है। अपने पहचान पत्रों को किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें और कमीशन के लालच में आकर अपने बैंक खाते का उपयोग किसी और को न करने दें। तकनीक के इस दौर में सुरक्षा ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि इन साइबर अपराधियों के पूरे तंत्र को ध्वस्त किया जा सके।

यह रिपोर्ट पुलिस विभाग द्वारा जारी आधिकारिक तथ्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर तैयार की गई है। न्यायिक प्रक्रिया और जांच की गोपनीयता को देखते हुए, अंतिम निष्कर्षों के लिए आधिकारिक पुलिस बयानों का ही संदर्भ लें। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर सेल को देने का सुझाव देते हैं।

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