एचपीवी टीकाकरण अभियान से सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ मिलेगी मजबूती। 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकार की खास पहल।
ब्लॉक सीएमओ डॉ जैन
बीकानेर, राजस्थान। एचपीवी टीकाकरण अभियान के जरिए राज्य सरकार अब बालिकाओं के स्वास्थ्य को एक नई सुरक्षा देने जा रही है। बीकानेर जिले के ग्राम गुसाईसर में आयोजित रात्रि चौपाल के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए 14 से 15 वर्ष की किशोरियों के लिए संचालित इस निशुल्क टीकाकरण योजना पर विस्तृत प्रकाश डाला। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यदि समय रहते इस टीके को लगवाया जाए, तो भविष्य में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।[1]
ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील जैन ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर के बाद महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। इस भयावह बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार द्वारा चलाया जा रहा एचपीवी टीकाकरण अभियान एक क्रांतिकारी कदम है। जागरूकता के अभाव में अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह टीका बालिकाओं के लिए एक ढाल की तरह काम करता है।
एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग अब घर-घर जाकर पात्र बालिकाओं की सूची तैयार करने की योजना बना रहा है। डॉ. जैन ने बताया कि यदि ग्रामीण सहयोग करें और क्षेत्र की सभी पात्र बालिकाओं की लाइन लिस्ट तैयार कर ली जाए, तो गुसाईसर में ही विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि हर किशोरी तक सरकारी योजना का लाभ भी सुनिश्चित हो सकेगा।
"सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा से संबंधित एक गंभीर बीमारी है। 14 से 15 वर्ष की बालिकाओं के लिए एचपीवी टीका पूर्णतः निःशुल्क है और यह उनके उज्ज्वल व स्वस्थ भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।" - डॉ. सुनील जैन, बीसीएमओ बीकानेर।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और इस टीकाकरण को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं। टीका नहीं लगवाने से स्वास्थ्य के प्रति जो जोखिम बढ़ते हैं, उन्हें समय रहते रोकना ही समझदारी है। टीकाकरण को लेकर लोगों की झिझक को दूर करने के लिए विभाग स्थानीय स्तर पर काउंसलिंग भी कर रहा है ताकि कोई भी बालिका इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
एचपीवी टीकाकरण अभियान के अलावा रात्रि चौपाल में गर्मी के मौसम को देखते हुए लू और तापघात (हीट स्ट्रोक) से बचाव पर भी चर्चा की गई। डॉ. जैन ने कहा कि भीषण गर्मी में पर्याप्त पानी पीना, शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) को रोकना और धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचना ही एकमात्र उपाय है। लू लगने की स्थिति में व्यक्ति को तुरंत छायादार स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार देना चाहिए।
"हीट स्ट्रोक से ग्रसित होने पर तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करना चाहिए। सावधानी ही इस भीषण गर्मी में बचाव का सबसे बड़ा माध्यम है।" - स्वास्थ्य विशेषज्ञ।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता लाने का एक सशक्त माध्यम बनी है। एचपीवी टीकाकरण अभियान और लू से बचाव जैसी योजनाओं की जानकारी ने ग्रामीणों को न केवल जागरूक किया है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आश्वस्त भी किया है। सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर उठाना ही एक जागरूक नागरिक की पहचान है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।