राजस्थान

आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन: गौसेवा में झलकी करुणा की मूरत

आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन ने पुरुषोत्तम मास में गौसेवा और जनसेवा का अनूठा उदाहरण पेश कर समाज में करुणा और एकता का संदेश दिया।

By अजय त्यागी 1 min read
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आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा आयोजित सेवा कार्यों ने आज यह साबित कर दिया है कि जब नारी शक्ति सेवा का संकल्प लेती है, तो वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाती है। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर अध्यक्ष श्रीमती पल्लवी लढा और सचिव श्रीमती रंजना बिरला के नेतृत्व में संगठन की बहनों ने गौसेवा और मानव कल्याण का जो मार्ग चुना, वह न केवल दिल को छू लेने वाला है, बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है। गौशाला की उन पगडंडियों पर जब ये बहनें उतरीं, तो वातावरण में ममता और सेवा की सुगंध बिखर गई।

गौशाला में नन्हे बछड़ों को अपने हाथों से बोतल से दूध पिलाती इन महिलाओं के चेहरे पर जो निश्छल मुस्कान थी, वह शब्द बयां नहीं कर सकते। उन मासूम बछड़ों की चंचलता ने मानो पूरे परिसर को किसी स्वर्ग से सुंदर बना दिया। आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन के लिए यह क्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईश्वर की सेवा का एक माध्यम था। गौमाताओं को हरा चारा खिलाना और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करना, इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति में जीव-मात्र के प्रति करुणा का कितना महत्व है।

गौशाला में गूंजी गीता की वाणी

गौशाला के उस शांत और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक पावन बनाने के लिए इन बहनों ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के एक अध्याय का पाठ किया। जब गीता के श्लोक गौशाला परिसर में गूंजे, तो ऐसा लगा मानो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण इस सेवा भाव को देख मुस्कुरा रहे हों। यह क्षण सभी के लिए भावुक कर देने वाला था, जहां सेवा और अध्यात्म का अद्भुत संगम दिखाई दिया। गीता के इन श्लोकों ने वहां मौजूद हर सदस्य के हृदय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर दिया।

इस पूरे आयोजन की धुरी बनीं इंदिरा हेडा, सुमित्रा दरगड़, चंद्रकांता गगरानी, सुनीता मुंदड़ा सहित अन्य सभी सदस्याएं, जिन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। पूजा-अर्चना के दौरान सभी बहनों ने गौमाताओं की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन के ये प्रयास दर्शाते हैं कि यदि मन में सेवा का भाव हो, तो समाज की हर कुरीति को मिटाया जा सकता है और करुणा के बीज बोए जा सकते हैं।

राहगीरों को राहत का मरहम

"भीषण गर्मी में राहगीरों को मिल्क रोज पिलाकर जो तृप्ति मिली, वह शब्दों से परे है। सेवा केवल दान नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को अपना समझना है," श्रीमती वंदना नुवाल, नेतृत्वकर्ता।

सेवा की इसी कड़ी में, श्रीमती वंदना नुवाल के नेतृत्व में राहगीरों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए 'मिल्क रोज' का वितरण किया गया। चिलचिलाती धूप में जब कोई राहगीर इस ठंडी सेवा को प्राप्त करता है, तो उसके चेहरे की वह संतुष्टि ही समाज सेवा का सबसे बड़ा पुरस्कार है। आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन ने इस तरह की मानवीय गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि हमारा धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि पीड़ितों और जरूरतमंदों के आंसू पोंछना भी है।

सांस्कृतिक मूल्यों का संचार

आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा किए गए ये सेवा कार्य न केवल एक दिन की गतिविधि हैं, बल्कि ये आने वाली पीढ़ी के लिए संस्कारों की एक नींव हैं। पुरुषोत्तम मास का यह पावन अवसर हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक है जब वह दूसरों के काम आए। इस संगठन की बहनों ने जिस तरह से सामूहिक एकता का परिचय दिया, वह आज के दौर में बहुत आवश्यक है। यह संगठन आज हर उस महिला के लिए एक मिसाल है जो समाज में बदलाव लाना चाहती है।

इन गतिविधियों का भाव यह है कि करुणा, संस्कार और सहयोग ही वह शक्ति है जो समाज को जोड़कर रखती है। कार्यक्रम में सम्मिलित हुई सभी महिलाओं ने न केवल सेवा दी, बल्कि स्वयं भी इस आध्यात्मिक अनुभव से तृप्त होकर लौटीं। भीलवाड़ा की धरती पर आरकेआरसी माहेश्वरी महिला संगठन के ये कदम आने वाले समय में सेवा के और भी नए आयाम स्थापित करेंगे। यह समाज सेवा का वह स्वरूप है जो न केवल आत्मा को शांति देता है, बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा प्रदान करता है।

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