विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित दौड़ में उमड़ा जनसैलाब, हर कदम प्रकृति को बचाने की शपथ के साथ, धरा के संरक्षण का एक नया संकल्प।
रन फॉर एनवायरनमेंट जागरूकता रैली
(सीकर, राजस्थान)। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर आज जब सूरज की पहली किरण ने धरा को छुआ, तो प्रकृति के प्रति प्रेम की एक नई लहर दौड़ गई। सीकर जिला प्रशासन और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित 'रन फॉर एनवायरनमेंट' जागरूकता रैली ने साबित कर दिया कि जब बात अस्तित्व की आती है, तो पूरा समाज एकजुट हो जाता है। यह दौड़ केवल सड़कों पर कदमों की ताल नहीं थी, बल्कि यह उस धरती माता के प्रति हमारा आभार और उस जिम्मेदारी का एहसास था जिसे हम अक्सर भागदौड़ भरी जिंदगी में भूल जाते हैं।[1]
आज की यह रैली उस धुएं और कंक्रीट के जंगलों के बीच एक ठंडी बयार की तरह थी। जब हजारों लोग एक साथ पर्यावरण संरक्षण के बैनर तले उतरे, तो लगा जैसे हवाएं भी एक अलग ही गीत गा रही हों। क्या हम वास्तव में अपनी धरती को बचाने के लिए तैयार हैं, या यह सब केवल एक दिन की औपचारिकता बनकर रह जाएगा? यह सवाल हर उस व्यक्ति की आंखों में था जो आज इस महाअभियान का हिस्सा बना, क्योंकि वे जानते हैं कि पर्यावरण है, तो ही कल है।
पर्यावरण संरक्षण केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीने का एक सलीका होना चाहिए। आज की रैली में शामिल हर उम्र के लोगों ने यह संदेश दिया कि प्रकृति हमें जीवन देती है, बदले में हम उसे जहरीली हवा और प्रदूषित नदियां दे रहे हैं। यह दौड़ उस विडंबना के खिलाफ एक कदम था, जो हमें आने वाले समय में एक बंजर भविष्य की ओर धकेल रही है। हर कदम के साथ लोगों ने एक सपना देखा—एक ऐसा हरा-भरा कल जहाँ हर बच्चा शुद्ध हवा में सांस ले सके।
Sikar, Rajasthan: On the occasion of World Environment Day, the Sikar District Administration and the Rajasthan State Pollution Control Board jointly organized a 'Run for Environment' awareness rally pic.twitter.com/wyIWqW5Tqu
— IANS (@ians_india) June 4, 2026
दौड़ के दौरान का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। छोटे बच्चों के उत्साह में प्रकृति को बचाने की मासूम जिद थी, तो बुजुर्गों के अनुभवी कदमों में अपनी पुरानी हरी-भरी दुनिया को वापस पाने की कसक। यह जनसैलाब स्पष्ट कर रहा था कि सीकर के लोग अब पर्यावरण को केवल एक शब्द नहीं, बल्कि अपना जीवन मान चुके हैं। यदि इसी जुनून को हर दिन की आदत बना लिया जाए, तो निश्चित रूप से धरा का भाग्य बदल जाएगा।
"विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है, लेकिन जन-जन में पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार ने एक दिन पूर्व ही विभिन्न स्थानों पर इस दौड़ का आयोजन किया है," सुमेधानंद सरस्वती, भाजपा नेता।
पर्यावरण के प्रति बढ़ती इस संवेदनशीलता के पीछे का कारण आज की पीढ़ियों का बढ़ता डर है। हम देख रहे हैं कि नदियां सूख रही हैं, जंगल कट रहे हैं और तापमान बढ़ रहा है। आज की यह दौड़ इसी बढ़ते खतरों के खिलाफ एक मौन विरोध भी है। जब हम 'विश्व पर्यावरण दिवस' मनाते हैं, तो हम वास्तव में उस मां को याद करते हैं जो हमें गोद में लेकर पालती है। यदि मां ही अस्वस्थ हो जाएगी, तो हम कैसे जीवित रह पाएंगे?
प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे ये प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन इनकी सार्थकता तभी है जब हम हर रोज एक पेड़ लगाने और पानी बचाने का संकल्प लें। यह रैली समाप्त होते ही यदि हम वापस उसी प्रदूषण भरी जीवनशैली में लौट गए, तो यह दौड़ केवल एक शारीरिक कसरत बनकर रह जाएगी। पर्यावरण संरक्षण एक निरंतर चलने वाली तपस्या है, जिसके लिए हमें हर पल सतर्क रहना होगा। आइए, आज एक नई शुरुआत करें और अपनी धरती को फिर से संवारें।
यह रिपोर्ट जन जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें शामिल बयान सार्वजनिक कार्यक्रम पर आधारित हैं। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार के पर्यावरणीय या स्वास्थ्य दावों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। पाठकों को पर्यावरण संरक्षण हेतु स्वयं सक्रिय प्रयास करने हेतु प्रेरित किया जाता है।