राजस्थान

संविदा कर्मियों की आजीविका पर संकट: सेवा समाप्ति के आदेश से रोष

संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने के लिखित आदेश से हड़कंप, नौकरी से निकाले जाने के बाद 48 कर्मियों ने अस्पताल में किया प्रदर्शन।

By अजय त्यागी 1 min read
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नर्सिंग कर्मियों का धरना

(भीलवाड़ा, राजस्थान)। संविदा कर्मियों के रूप में वर्षों से सेवाएं दे रहे 48 नर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं लिखित आदेश के माध्यम से समाप्त कर दी गई हैं। अखिल राजस्थान कर्मचारी महासंघ के बैनर तले जिला अध्यक्ष लक्की ब्यावट के निर्देशानुसार और कार्यकारी जिला अध्यक्ष अमित व्यास के नेतृत्व में महात्मा गांधी चिकित्सालय परिसर में आज प्रदर्शन किया गया। यह घटनाक्रम इन 48 संविदा कर्मियों की आजीविका पर सीधे प्रहार के रूप में देखा जा रहा है, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है। विडियो के लिए क्लिक करें...

यह प्रदर्शन संविदा कर्मियों की सेवाओं को समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय के विरोध में किया गया है। प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत इन 48 कर्मियों को लिखित आदेश देकर नौकरी से हटा दिया गया है, जिसने चिकित्सा विभाग के इन कर्मचारियों के भविष्य के सामने बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। इसी के विरोध में कर्मचारी अस्पताल परिसर में एकत्र हुए और अपनी सेवाएं बहाल करने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

आदेश के बाद बढ़ा आक्रोश

अस्पताल में कार्यरत इन 48 संविदा कर्मियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक सेवाएं दी हैं, लेकिन अब लिखित आदेश जारी कर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है। अचानक सेवा समाप्ति के इस निर्णय ने कर्मियों के भीतर गहरा आक्रोश भर दिया है। जो कर्मचारी अस्पताल में रहकर मरीजों की सेवा में जुटे थे, आज वे खुद सरकारी आदेश के कारण नौकरी से बाहर हो गए हैं। इस निर्णय के चलते सभी 48 कर्मियों को अपनी आजीविका खोने का संकट झेलना पड़ रहा है।

इन कर्मियों की आर्थिक स्थिति का आकलन इसी से किया जा सकता है कि वे 7,320 रुपये के मासिक वेतन पर कार्य कर रहे थे। इस राशि में अपनी गृहस्थी चला रहे इन 48 नर्सिंग कर्मियों के सामने अब परिवार के भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है। लिखित आदेश के जरिए नौकरी से हटाए जाने का यह कदम सीधे तौर पर उनके रोजगार और भविष्य को प्रभावित कर रहा है, जिसके कारण कर्मचारियों ने विभाग के इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं।

"वर्षों तक सेवा देने के बावजूद एक लिखित आदेश के जरिए 48 संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कार्मिकों के प्रति विभागीय उदासीनता को दर्शाता है," कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमित व्यास।

न्याय की मांग और चेतावनी

संविदा कर्मी अपनी सेवाओं को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर अडिग हैं। विधायक अशोक कोठारी और सांसद दामोदर अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय दिलाने की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे 48 कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई और आदेश वापस नहीं लिए गए, तो वे आगामी दिनों में भूख हड़ताल जैसा कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।

पूर्व में भी इस विषय पर गुहार लगाई गई थी, जिसके बावजूद अब सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। अस्पताल परिसर में इन 48 कर्मचारियों का यह धरना अपनी रोजगार सुरक्षा के लिए है। संविदा कर्मियों का यह आंदोलन अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। शासन और प्रशासन के निर्णय पर टिकी इन 48 परिवारों की उम्मीदें अब इस बात पर निर्भर करती हैं कि क्या लिखित आदेश को वापस लेकर उन्हें पुनः सेवा में लिया जाएगा।

आंदोलन की आगामी स्थिति

अखिल राजस्थान कर्मचारी महासंघ द्वारा किया जा रहा यह प्रदर्शन अब गति पकड़ रहा है। महात्मा गांधी चिकित्सालय के भीतर इन 48 नर्सिंग कर्मियों का यह विरोध स्पष्ट करता है कि संविदा कर्मी अपनी नौकरी पर आए संकट को लेकर गंभीर हैं। इन कर्मियों ने अपनी ऊर्जा मरीजों के उपचार में लगाई थी, लेकिन आज वे स्वयं रोजगार छिन जाने की स्थिति का सामना कर रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या इनकी सेवाओं का मूल्यांकन केवल एक लिखित आदेश तक सीमित है?

अब निर्णय शासन और प्रशासन के स्तर पर लिया जाना है। क्या इन 48 परिवारों की रोजगार संबंधी समस्याओं का समाधान करते हुए लिखित आदेश की समीक्षा की जाएगी? यह विषय अब उनकी आजीविका की सुरक्षा से जुड़ा है। भीलवाड़ा में इन संविदा कर्मियों का विरोध प्रदर्शन जारी है और वे अपनी सेवाओं की बहाली के लिए निरंतर मांग कर रहे हैं।

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट कर्मचारियों द्वारा दी गई जानकारी और मौके के हालातों पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी प्रकार के प्रशासनिक निर्णयों, रोजगार विवादों या दावों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

(विडियो रिपोर्ट के अंत में भी...  ↓)

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