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तिरुपति लड्डू घोटाला: मिलावटी घी के सौदागरों पर ईडी का शिकंजा कसा

तिरुपति लड्डू घोटाला मामले में ईडी ने देशभर में 15 ठिकानों पर छापेमारी कर 60 लाख नकद और 45 करोड़ के निवेश का बड़ा खुलासा किया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

डिंडीगुल, तमिलनाडु। करोड़ों सनातनी भक्तों की आस्था का केंद्र तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के पवित्र प्रसाद में तिरुपति लड्डू घोटाला ने न केवल पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि हर उस भक्त का हृदय छलनी कर दिया है जो भगवान वेंकटेश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखता है। जब पवित्र प्रसाद में गोमांस की चर्बी और मछली के तेल जैसे निंदनीय पदार्थों की मिलावट की पुष्टि हुई, तो सनातनी समाज का आक्रोश सातवें आसमान पर था। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस कलंकित खेल के सूत्रधारों के खिलाफ सख्त कानूनी चाबुक चलाकर यह संदेश दिया है कि प्रभु की सेवा में की गई गद्दारी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।[1]

आस्था की इस पवित्रता को बचाने के लिए की जा रही जांच ने कई भयावह सत्यों को उजागर किया है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक विस्तृत जाल बिछाया है ताकि उन दानवों तक पहुंचा जा सके, जिन्होंने लाभ के लालच में करोड़ों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को कुचला। यह महज एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि मानवता और धर्म के विरुद्ध किया गया एक जघन्य कृत्य है।

बीकानेर में ईडी की दबिश

तिरुपति लड्डू घोटाला मामले की इस देशव्यापी जांच का असर राजस्थान के बीकानेर में भी स्पष्ट रूप से देखा गया है। ईडी की टीम ने बीकानेर की कोयला गली स्थित आशीष अग्रवाल के घी गोदाम पर अचानक धावा बोल दिया। सूत्रों के अनुसार, गोदाम के साथ-साथ अग्रवाल से संबंधित अन्य व्यावसायिक दुकानों और उनके निवास स्थान पर भी गहन छापेमारी की गई। पूर्व में इनकम टैक्स विभाग और एसआईटी द्वारा की गई जांच के बाद अब ईडी की एंट्री ने इस पूरे मामले को एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है।

आरोपियों का काला जाल

हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने 3 जून 2026 को तिरुपति लड्डू घोटाला मामले में एक साथ 15 स्थानों पर बड़ी छापेमारी की। इस कार्रवाई की जद में डिंडीगुल, बीकानेर, देहरादून, दिल्ली, गुंटूर, मुंबई और रुड़की जैसे शहर शामिल थे। जांच में ए.आर. डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाएं घेरे में हैं। छापेमारी में पोमिल जैन, विपिन जैन, राजू राजशेखरन, राजेश मनसुखलाल चावड़ा, मचिंद्रा शांताराम लंके और अजय कुमार सुगंध जैसे नाम मुख्य रूप से सामने आए हैं।

ईडी ने इस तलाशी अभियान में 60 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। लेकिन सबसे बड़ी कामयाबी वह दस्तावेज हैं जो यह बताते हैं कि इस तिरुपति लड्डू घोटाला की काली कमाई को 45 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था। जांच एजेंसियों को पता चला है कि इन आरोपियों ने एक जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल कर फर्जी खरीद-फरोख्त के जरिए अवैध धन को सफेद करने का काम किया, जो यह साबित करता है कि यह सब कुछ सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।

भ्रष्टाचार और मिलावट का मेल

ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि मिलावटी घी की आपूर्ति टीटीडी को करके संस्थाओं ने अनुचित लाभ कमाया। टीटीडी के कुछ अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर पवित्र प्रसाद की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया। प्रयोगशाला की रिपोर्टों में जब सोयाबीन तेल, मछली का तेल और चर्बी जैसे पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई, तो करोड़ों भक्तों का मन द्रवित हो उठा। आपूर्ति किए गए घी का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही मानकों को पूरा करता था, जो एक बड़ी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

"इन 15 स्थानों पर की गई छापेमारी के दौरान 60 लाख रुपये नकद और अपराध से प्राप्त धन (पीओसी) के 45 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों में निवेश का खुलासा हुआ है," प्रवर्तन निदेशालय, आधिकारिक बयान।

न्याय की उम्मीद

सच्चाई सामने आने के बाद ए.आर. डेयरी फूड (पी) लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। अब ईडी की पीएमएलए के तहत कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के नाम पर हुए इस विश्वासघात के दोषियों को कठोर दंड भुगतना होगा। आगे की जांच अभी जारी है और केंद्रीय एजेंसियां इस नेटवर्क के हर उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिसने इस पवित्र प्रसाद की शुद्धता को नष्ट किया। भक्त अब केवल न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि कब इन दोषियों को उनके किए की सजा मिलेगी।

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