राजस्थान

पर्यावरण संरक्षण: जयपुर की ट्री एंबुलेंस बनी मिसाल

जयपुर में सुशील कुमार अग्रवाल की 'ट्री एंबुलेंस टीम 10' पिछले 12 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण कर रही है। 1.65 लाख पौधे लगाकर बना चुकी है एक अनूठी मिसाल।

By अजय त्यागी 1 min read
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अपनी ट्री एंबुलेंस के साथ सुशील कुमार अग्रवाल

जयपुर, राजस्थान। कहते हैं कि अगर किसी काम को करने का सच्चा जुनून दिल में हो, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जयपुर के विद्याधर नगर निवासी सुशील कुमार अग्रवाल ने। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों के किनारे दम तोड़ते पेड़-पौधों और फैली गंदगी को देखकर सुशील कुमार के मन में जो टीस उठी, उसने 'ट्री एंबुलेंस टीम 10' को जन्म दिया। आज यह टीम न केवल पौधे लगा रही है, बल्कि उन्हें परिवार के सदस्य की तरह संरक्षित कर रही है।

पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इस टीम ने पिछले 12 वर्षों से बिना एक भी छुट्टी लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अटूट समर्पण दिखाया है। चाहे भीषण गर्मी हो, कड़ाके की ठंड या मूसलाधार बारिश, ट्री एंबुलेंस का काम निरंतर जारी रहता है। यह टीम न केवल पौधों को जीवनदान दे रही है, बल्कि पूरे विद्याधर नगर क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित करने में जुटी है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए अनोखी पहल

ट्री एंबुलेंस टीम 10 के संस्थापक सुशील कुमार अग्रवाल बताते हैं कि करीब 12 साल पहले विद्याधर नगर में पेड़ों की दयनीय स्थिति देखकर उन्हें इस मुहिम की प्रेरणा मिली। पेड़ों की जड़ों में खाद के बजाय कचरा जमा था और ट्री गार्ड उन्हें नुकसान पहुंचा रहे थे। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, तब उन्होंने निर्णय लिया कि पेड़ों की देखभाल और सफाई के लिए एक विशेष वाहन तैयार किया जाए, जिसमें सभी जरूरी उपकरण मौजूद हों।

इस अनूठी पहल को 5 जुलाई 2014 को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हरी झंडी दिखाकर विधिवत शुरुआत दी थी। सुशील अग्रवाल का दावा है कि यह इंडिया की पहली ट्री एंबुलेंस है। आज यह ट्री एंबुलेंस टीम न केवल क्षेत्र में हरियाली बढ़ा रही है, बल्कि यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी पौधा बिना पानी के न सूखे। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि विद्याधर नगर जयपुर के सबसे हरे-भरे क्षेत्रों में गिना जाता है।

एक चलती-फिरती जीवन रक्षक मशीन

यह ट्री एंबुलेंस किसी अस्पताल की एंबुलेंस से कम नहीं है, जिसमें पौधों के इलाज के लिए सभी पुख्ता इंतजाम हैं। इसमें परात, फावड़ा, कैंची, दंताली, स्प्रे मशीन, खाद, दीमक की दवा, आरी और कुल्हाड़ी जैसे तमाम उपकरण हर समय तैयार रहते हैं। सुशील अग्रवाल के अनुसार, वे प्रतिदिन मजदूरों के साथ मिलकर कार्य करते हैं और स्वयं भी सफाई व देखभाल में जुट जाते हैं। यह पूरी कवायद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

टीम के संचालन के लिए एक समिति बनाई गई है जिसमें रामानंद मोदी, योगेश गोयल और अशोक अग्रवाल जैसे समर्पित सदस्य शामिल हैं। सुशील अग्रवाल ने बताया कि इस पूरे कार्य पर हर महीने लगभग पांच लाख रुपये का खर्च आता है, जो समिति के सदस्य स्वयं वहन करते हैं और कुछ भामाशाहों का सहयोग मिलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सेवा कार्य के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है, बल्कि वे नि:स्वार्थ भाव से समाज सेवा कर रहे हैं।

हरियाली का बढ़ता हुआ कारवां

ट्री एंबुलेंस टीम 10 की ओर से 12 वर्षों में अब तक 1 लाख 65 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 90 फीसदी जीवित हैं। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, टीम का उद्देश्य यह है कि क्षेत्र में कोई भी पेड़ पानी की कमी से न मरे, जिसके लिए प्रतिदिन 15 टैंकर पानी डाला जाता है। यह टीम केवल पौधे ही नहीं लगाती, बल्कि पार्कों की सफाई, फुटपाथ की मरम्मत और कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन भी करती है।

टीम के सक्रिय सदस्य योगेश अग्रवाल, जो पिछले 11 महीनों से इस मुहिम से जुड़े हैं, बताते हैं कि वे सुशील जी के समर्पण से प्रभावित होकर इस टीम का हिस्सा बने। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे भी इस मुहिम से जुड़ें और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। जब तक आम नागरिक जागरूक नहीं होगा, तब तक हरियाली का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता।

पर्यावरण संरक्षण हेतु निरंतर सेवा

सुशील अग्रवाल की यह मुहिम समाज के लिए एक प्रेरणा है। ट्री एंबुलेंस टीम 10 केवल विद्याधर नगर तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वे चाहते हैं कि उनके प्रयासों से अन्य लोग भी प्रेरित हों। पर्यावरण संरक्षण के लिए उनका यह नि:स्वार्थ कार्य यह सिद्ध करता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो एक छोटी सी टीम भी बड़े बदलाव ला सकती है। हमें उनके इस जज्बे का सम्मान करते हुए अपनी ओर से भी प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।

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