राजस्थान

बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण के लिए अनूठा प्रकृति महोत्सव

बीकानेर में वन्देमातरम टीम ने विश्व पर्यावरण दिवस को पर्यावरण संरक्षण महोत्सव के रूप में मनाया। पीपल की पूजा कर और पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर संकल्प लिया गया।

By अजय त्यागी 1 min read
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पर्यावरण संरक्षण के लिए अनूठा प्रकृति महोत्सव

बीकानेर, राजस्थान। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर बीकानेर शहर में वन्देमातरम टीम द्वारा एक अत्यंत प्रेरणादायी और अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। सादुल स्कूल भ्रमण पथ पर टीम के सदस्यों ने इस दिन को एक उत्सव की तरह मनाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना और वृक्षों के महत्व को समाज के समक्ष रेखांकित करना रहा। शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम के संयोजक पुरुषोत्तम सुथार ने बताया कि सादुल स्कूल परिसर में वृक्षारोपण के साथ-साथ पहले से लगे हुए पुराने वृक्षों को मोली (रक्षा सूत्र) बांधकर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया गया। स्कूली बच्चों ने भी इस दौरान अपने जन्मदिन पर पौधे लगाने का विशेष संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल पौधे लगाने तक सीमित रहा, बल्कि उन वृक्षों को सहेजने का भी संदेश दिया जो वर्षों से हमें ऑक्सीजन, छाया और फल प्रदान कर रहे हैं।

पेड़ों का मान और संरक्षण

वन्देमातरम टीम के प्रतिनिधि कमल सेन ने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे, तो हमें वृक्षों को बचाना ही होगा। उन्होंने बताया कि 5 जून को प्रातः 8 बजे सादुल स्कूल पार्क में नए पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया है। टीम की योजना है कि आने वाले जुलाई माह में एक बड़े पौधरोपण अभियान का संचालन किया जाए, जिससे बीकानेर के हरित क्षेत्र को और अधिक विस्तार दिया जा सके।

टीम के संयोजक विजय कोचर ने बताया कि आज के कार्यक्रम में उन वृक्षों का सामूहिक रूप से सम्मान किया गया जो वर्षों से मानव समाज और जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान कर रहे हैं। रक्षा सूत्र बांधकर इन वृक्षों को बचाने का संकल्प लेना यह दर्शाता है कि बीकानेर की जनता अब प्रकृति के प्रति कितनी जागरूक हो गई है। यह आयोजन समाज में वृक्षों की महत्ता को फिर से स्थापित करने का एक शानदार प्रयास है।

धार्मिक आस्था और प्रकृति

इस पर्यावरण महोत्सव में आध्यात्मिक और धार्मिक भाव का भी समावेश देखने को मिला। उमा बागड़ी, जसोदा खत्री और उमा शर्मा ने सामूहिक गायत्री मंत्रोच्चार के साथ पीपल के वृक्षों की पूजा की। वृक्षों के चारों ओर परिक्रमा कर उन्हें रक्षा सूत्र बांधा गया, जो भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा को दर्शाता है। इस प्रकार की पहल से पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक आस्था के साथ जोड़कर एक गहरा और स्थायी संदेश दिया गया है।

महिलाओं द्वारा की गई यह पूजा न केवल पारंपरिक रही, बल्कि इसने पर्यावरण को बचाने के संकल्प को एक नया आधार दिया है। पीपल के वृक्षों की सुरक्षा और उनके संरक्षण का लिया गया संकल्प यह सुनिश्चित करता है कि लोग अब केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वास्तव में वृक्षों को अपने परिवार का सदस्य मान रहे हैं। यह भावनात्मक जुड़ाव ही भविष्य में सफल वृक्षारोपण की कुंजी सिद्ध होगा।

जनभागीदारी से बढ़ती जागरूकता

कार्यक्रम में विजय कोचर, पुरुषोत्तम सुथार, चेतन सिंह पंवार, गोविन्द सिंह कच्छावा, किशन, जीतू, अक्षय, लक्ष्य, यश, निखिल, श्री गोपाल चौधरी, श्री गोपाल जाट, कन्हैयालाल टाक और महावीर पारीक सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त राजस्थान सरकार के राज्य अनुसूचित आयोग के सदस्य सूरजाराम नायक ने भी इस कार्यक्रम में भाग लेकर टीम के प्रयासों की सराहना की। सामूहिक भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण की यह मुहिम अब बीकानेर के कोने-कोने तक पहुंच रही है।

वन्देमातरम टीम बीकानेर के जिला संयोजक मुकेश जोशी, कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम सुथार और प्रवक्ता दिलीप गुप्ता ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वृक्ष ही हमारे जीवन के आधार हैं और उनकी रक्षा करना हमारा प्राथमिक धर्म है। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ और पर्यावरण के प्रति लोगों का उत्साह देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि बीकानेर के निवासी अब एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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