अहमदाबाद के मोटेरा में नगर निगम ने अपनी जमीन से अतिक्रमण हटाया। निगम ने अपनी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई, जिसके बाद अब वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
निगम ने अपनी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई
अहमदाबाद, गुजरात। शहर के मोटेरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुटेश्वर गांव में नगर निगम द्वारा एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया गया, जिसके तहत निगम ने अपनी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई। यह कार्रवाई उन अवैध मकानों और ढांचों के खिलाफ की गई, जो नगर निगम द्वारा आवंटित भूखंडों पर अनधिकृत रूप से बनाए गए थे। इस क्षेत्र में लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था, जिसके समाधान के बाद प्रशासन ने अपनी जमीन का पुनः अधिकार प्राप्त कर लिया है।[विडियो]
प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से अहमदाबाद पुलिस ने लगभग 150 पुलिसकर्मियों को मौके पर तैनात किया था। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जिन्होंने सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा था। प्रशासन ने अपनी कार्रवाई के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि निगम ने अपनी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई और वहां अब किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण शेष नहीं है।
VIDEO | Ahmedabad: Demolition drive being carried out near Asaram Ashram against illegal encroachment. Heavy security deployment in the area.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 6, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7)#Ahmedabad pic.twitter.com/bFOpHqMlVz
नगर निगम की टीम और स्थानीय पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने अपना सामान नहीं हटाया था, उन्हें औपचारिक रूप से सूचित करके जगह खाली करने के लिए कहा गया था। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि निवासियों को बिना किसी अफरा-तफरी के बाहर निकाला जाए और उनकी सहायता के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
“मोटेरा के कुटेश्वर गांव में उन भूखंडों पर ध्वस्तीकरण का काम किया गया है जो नगर निगम द्वारा आवंटित किए गए थे, लेकिन वहां अवैध निर्माण कर लिए गए थे। कई निवासी पहले ही जगह खाली कर चुके थे, लेकिन जो अभी भी वहां रह रहे थे, उन्हें औपचारिक रूप से जगह छोड़ने के लिए सूचित किया गया। यदि उन्हें सहायता की आवश्यकता थी, तो नगर निगम के ट्रक और श्रमिक मदद के लिए उपलब्ध थे। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एंबुलेंस, दमकल सेवाओं और पूरे संसाधनों के साथ लगभग 150 पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया था। निवासियों के साथ धैर्यपूर्वक व्यवहार किया गया और उन्हें बिना किसी अव्यवस्था के धीरे-धीरे जगह खाली करने के लिए निर्देशित किया गया।”
वाणी दुधत
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस अभियान के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। जो परिवार वहां रह रहे थे, उन्हें नगर निगम की ओर से ट्रक और लेबर की सुविधा दी गई ताकि वे अपना घरेलू सामान सुरक्षित स्थानांतरित कर सकें। नगर निगम और पुलिस विभाग का मुख्य लक्ष्य क्षेत्र को खाली कराना था, साथ ही यह सुनिश्चित करना था कि स्थानीय लोगों को कम से कम असुविधा हो।
अस्पताल की एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर मौजूद रहीं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का तुरंत समाधान किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश निवासियों ने निगम के आदेशों का पालन करते हुए स्वयं ही स्थान खाली कर दिया, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी राहत रही। जो कुछ लोग वहां मौजूद थे, उन्हें कानूनी प्रक्रिया समझाकर शांतिपूर्वक वहां से हटाया गया, ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए। इसके बाद निगम ने अपनी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई।
यह कदम शहर के नियोजित विकास के लिए एक आवश्यक पहल थी। लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों के समाप्त होने के बाद अब प्रशासन के पास जमीन का पूर्ण अधिकार है। नगर निगम प्रशासन ने उन सभी लोगों को चेतावनी दी है जिन्होंने निगम की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश की है। प्रशासन द्वारा की जा रही यह कार्रवाई कानून के शासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अंत में, यह कार्रवाई प्रशासन की दृढ़ता को दर्शाती है कि सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई इस प्रक्रिया के बाद, अब यह कहा जा सकता है कि निगम ने अपनी भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई है, जिससे कुटेश्वर गांव के इस हिस्से में निगम के आगामी प्रोजेक्ट्स के लिए रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। नगर निगम की यह कार्रवाई कानूनी विवाद के निपटारे के बाद प्रशासनिक निर्देशों के तहत की जा रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।