राजस्थान

महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम, गूंजे भजनों के स्वर

भीलवाड़ा में चंद्र शेखर आजाद नगर माहेश्वरी महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम आयोजित हुआ। गौमाताओं की सेवा के साथ ही भक्ति संगीत से गौशाला परिसर हुआ सराबोर।

By अजय त्यागी 1 min read
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महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम

भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। भीलवाड़ा के चंद्र शेखर आजाद नगर माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा हाल ही में अधिक मास के पवित्र अवसर पर एक अत्यंत प्रेरणादायी एवं भक्तिपूर्ण आयोजन किया गया। स्थानीय श्री सीताराम गौशाला में आयोजित महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम भक्तिपूर्ण रहा जिसके दौरान सेवा और अध्यात्म का अद्भुत मेल देखने को मिला। महिला मंडल की अध्यक्ष चंदा जागेटिया एवं सचिव ललिता राठी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य गौमाताओं की सेवा करना और प्रभु भक्ति के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना था।

कार्यक्रम की भव्य शुरुआत भगवान श्री राम और श्री कृष्ण की महाआरती के साथ हुई, जिसने पूरे गौशाला परिसर के वातावरण को दिव्य बना दिया। गौशाला में निवास कर रही गौमाताओं को अत्यंत श्रद्धाभाव के साथ लापसी का भोग लगाया गया और उन्हें ताज़ा हरा चारा खिलाकर पुण्य लाभ अर्जित किया गया। महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम न केवल सेवा का एक उदाहरण बना, बल्कि इसने समाज के अन्य वर्गों को भी गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य किया है।

भक्ति और सेवा का समन्वय

गौशाला परिसर में उपस्थित महिलाओं ने सुमधुर भजनों की बहार पेश की, जिससे वहां का पूरा वातावरण भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। भजनों की गूंज ने उपस्थित सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला मंडल की अध्यक्ष चंदा जागेटिया ने इस अवसर पर कहा कि गौ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और अधिक मास में किया गया यह कार्य आत्मिक शांति प्रदान करता है। सभी महिलाओं ने पूरी निष्ठा के साथ गौमाताओं की सेवा में अपना योगदान दिया।

इस धार्मिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चंद्र शेखर आज़ाद नगर माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष कमलेश काबरा और सचिव अश्विन तोतला ने अपना विशेष सानिध्य प्रदान किया। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष अंकित सोमानी और सचिव शुभम् सोमानी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। महिला मंडल के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों का भावभीनी स्वागत एवं अभिनंदन किया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आत्मीय बन गया।

सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयास

इस अनूठे आयोजन को सफल बनाने में महिला मंडल की सभी सक्रिय सदस्यों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। कल्पना माहेश्वरी, शिल्पा बसेर, सुनीता जागेटिया, रेखा हेडा, पार्वती पटवारी, सुमन अजमेरा, अनीता लढा, अंजना, कांता और बसंता बाहेती जैसी प्रबुद्ध महिलाओं ने अथक परिश्रम कर व्यवस्थाओं को संभाला। उनकी सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि जब संकल्प सेवा का हो, तो सामूहिक प्रयास से बड़ी से बड़ी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकता है।

महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने न केवल गौ माता की सेवा की, बल्कि सेवा के महत्व पर भी चर्चा की। सदस्यों का मानना है कि गौशालाओं में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने से न केवल गौवंश का संरक्षण होता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी भारतीय संस्कृति और गौ सेवा के संस्कारों से जोड़ने में मदद मिलती है। गौशाला प्रबंधन ने भी महिला मंडल के इस नेक प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है।

सामाजिक उत्तरदायित्व और गौ संरक्षण

माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष कमलेश काबरा ने अपने संबोधन में कहा कि महिला मंडल द्वारा संचालित यह सेवा कार्य प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण आज के समय की मांग है और समाज की महिलाओं द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है। महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम समाज के अन्य संगठनों के लिए भी एक मार्गदर्शक का कार्य करेगा। ऐसी गतिविधियों से न केवल गौवंश का कल्याण होता है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।

आने वाले समय में भी महिला मंडल द्वारा समाज सेवा के ऐसे ही अन्य कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इस कार्यक्रम के समापन पर सभी ने गौमाता से आशीर्वाद प्राप्त किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। भीलवाड़ा शहर के लोगों ने महिला मंडल के इस प्रयास को सराहा है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी सेवा के ऐसे कार्य निरंतर जारी रहेंगे। यह दिन भक्ति, सेवा और सामूहिक संकल्प की एक सुंदर याद बनकर रह गया।

निष्कर्ष और सामूहिक संकल्प

अंत में, यह कहना अनुचित नहीं होगा कि अधिक मास के दौरान आयोजित इस सेवा कार्यक्रम ने समाज को जोड़ने और सेवा भाव को प्रेरित करने का कार्य किया है। महिला मंडल का गौ सेवा कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि निस्वार्थ भाव से किया गया सेवा कार्य ही समाज को श्रेष्ठ बनाता है। गौशाला के परिसर में भजनों की ध्वनि और सेवा की गूंज इस बात का प्रमाण थी कि भीलवाड़ा का समाज आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति के प्रति पूर्णतः समर्पित है।

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