बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित रक्तदान उत्सव 2026 में 83 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। छात्रों और कर्मचारियों ने मानवता की मिसाल पेश की है।
कुलसचिव यशपाल अहूजा ने स्वयं किया रक्तदान
बीकानेर, राजस्थान। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) के परिसर में स्थित संत मीरा बाई सभागार में एक प्रेरणादायी और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। विश्वविद्यालय की कर्मचारी कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित रक्तदान उत्सव 2026 ने मानवता के प्रति विश्वविद्यालय परिवार की प्रतिबद्धता को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। "रक्तदान-महादान" के संकल्प के साथ शुरू हुए इस शिविर में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों, अधिकारियों और छात्रों ने पूरी ऊर्जा के साथ सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने की, जबकि भाजपा युवा नेता रविशेखर मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर कांग्रेस देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, कुलसचिव यशपाल अहूजा, वित्त नियंत्रक देवेंद्र सिंह राठौड़, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजाराम चोयल, DSW डॉ. प्रभुदान चारण और कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे। मंच संचालन का कुशल दायित्व रामावतार उपाध्याय ने निभाया।
रक्तदान शिविर का औपचारिक शुभारंभ कुलसचिव यशपाल अहूजा ने स्वयं रक्तदान करके किया। मीडिया प्रभारी उमेश शर्मा ने बताया कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चले इस शिविर में कुल 83 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। पीबीएम अस्पताल के डॉ. ऋषि माथुर की टीम ने इस आयोजन में तकनीकी सहयोग प्रदान किया। रक्तदान उत्सव 2026 की सफलता ने न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि बीकानेर को 'रक्तवीरों का शहर' सिद्ध कर दिया।
कुलसचिव यशपाल अहूजा ने अपने संबोधन में कहा:
"MGSU परिवार सिर्फ शिक्षा नहीं देता, जीवन भी देता है। आज हर रक्तदाता भगवान का रूप है, जिन्होंने स्वयं को कष्ट देकर दूसरों को जीवन दान दिया है।"
कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष श्रीकृष्ण जाट ने बताया कि यद्यपि 50 यूनिट का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रतिभागियों के भारी उत्साह के चलते यह आंकड़ा 83 यूनिट तक पहुँच गया। उन्होंने कहा कि 1 यूनिट रक्त से 3 जिंदगियां बचती हैं, जिसका अर्थ है कि आज इस शिविर के माध्यम से 250 से अधिक जिंदगियों को बचाने का पुण्य कार्य पूरा हुआ है। रक्तदान उत्सव 2026 ने साबित कर दिया कि विश्वविद्यालय परिवार समाजहित में एक जुट खड़ा है।
उन्होंने आगे कहा:
"350 ml खून, यानी एक कोल्डड्रिंक जितना, लेकिन इससे 3 घरों के चिराग जलते हैं। आज बीकानेर ने दिखा दिया कि ये सिर्फ भुजिया और रसगुल्लों का ही नहीं, रक्तवीरों का भी शहर है।"
मुख्य अतिथि रविशेखर मेघवाल ने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है और विश्वविद्यालय परिवार का यह प्रयास अनुकरणीय है। वहीं, विशिष्ट अतिथि बिशनाराम सियाग ने रेखांकित किया कि सेवा के इस कार्य में राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर सभी का एक मंच पर आना समाज को एक सकारात्मक और शक्तिशाली संदेश देता है। उपस्थित सभी अतिथियों ने प्रतिभागियों के इस समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु और कुलसचिव ने रक्तदान के वैज्ञानिक और नैतिक महत्व को साझा करते हुए युवाओं को भविष्य में भी ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। इस शिविर में रक्तदाताओं के लिए दूध, फल और अल्पाहार की विशेष व्यवस्था की गई थी, साथ ही प्रत्येक रक्तदाता को उनके इस निस्वार्थ योगदान के लिए प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए। रक्तदान उत्सव 2026 की व्यवस्थाओं में छात्रों और कर्मचारियों का आपसी समन्वय देखते ही बनता था।
अंत में, यह कार्यक्रम बीकानेर के शैक्षिक संस्थानों द्वारा दी जा रही सामाजिक भूमिका का एक सशक्त उदाहरण बना। विश्वविद्यालय की कर्मचारी कल्याण समिति ने जिस प्रकार का माहौल तैयार किया, उससे स्पष्ट है कि शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी पाठ्यक्रम का हिस्सा है। सभी अतिथियों ने इस रक्तदान अभियान को भविष्य के लिए एक मॉडल के रूप में सराहा।
बीकानेर के इस ऐतिहासिक आयोजन में उमड़ी भीड़ और सेवा का जज्बा वाकई में काबिले तारीफ रहा। विश्वविद्यालय परिवार ने यह सिद्ध किया है कि जब संकल्प सेवा का हो, तो सफलता निश्चित है। आने वाले वर्षों में रक्तदान उत्सव 2026 को एक बड़ी परंपरा के रूप में देखा जाएगा, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को जीवन का संबल प्राप्त होता रहेगा। यह उत्सव निस्संदेह बीकानेर के सेवा इतिहास में एक मील का पत्थर है।