अंतरराष्ट्रीय

भारत और इस्राइल की मित्रता का प्रतीक बनेंगे शिवाजी महाराज

भारत और इस्राइल के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार से सहयोग की अपील की गई है।

By अजय त्यागी 1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India (AI)

मुंबई, महाराष्ट्र। भारत और इस्राइल के बीच मित्रता के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। मुंबई स्थित इस्राइली महावाणिज्य दूतावास ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस्राइल में मराठा गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की पहल के लिए समर्थन और आवश्यक सहयोग का आग्रह किया है। यह कदम दोनों देशों के सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों को और भी अधिक प्रगाढ़ बनाने का कार्य करेगा।[1]

महावाणिज्य दूतावास के दूत यानिव रेवाच ने मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने विशेष पत्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल की ऐतिहासिक यात्रा के बाद से ही दोनों सरकारों ने दोनों देशों के लोगों को सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से करीब लाने के विशेष प्रयास करने का दृढ़ निर्णय लिया है। इस्राइल की यह पहल इसी व्यापक रणनीति का एक अभिन्न अंग है।

शिवाजी महाराज का वैश्विक प्रेरणा स्रोत

महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने कहा, "मुंबई आने के बाद मैंने मराठा साम्राज्य के इतिहास का गहराई से अध्ययन किया और पाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज न केवल मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे, बल्कि एक असाधारण नेता थे। उनकी सुशासन, साहस, धार्मिक सहिष्णुता, नौसैनिक शक्ति और प्रजा की रक्षा की दूरदर्शी दृष्टि आज भी दुनिया भर की पीढ़ियों को प्रेरित करती है।"

रेवाच ने बताया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा के दौरान उन्होंने लोगों के मन में इस्राइल और उनके राष्ट्रीय नायकों के प्रति गहरा सम्मान देखा है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए, इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके महान कार्यों के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसी मित्रता की महान भावना से प्रेरित होकर महावाणिज्य दूतावास ने इस्राइल की धरती पर छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है।

दोनों देशों के संबंधों का प्रतीक

इस्राइल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रस्तावित प्रतिमा दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों का एक शक्तिशाली और जीवंत प्रतीक बनकर उभरेगी। यह स्मारक विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि महाराष्ट्र और भारतीय यहूदी समुदाय के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। भारतीय यहूदी समुदाय के वंशज आज इस्राइली समाज के अभिन्न अंग हैं और वहां के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, जो दोनों राष्ट्रों के साझा गौरव को दर्शाता है।

इस पहल के माध्यम से इस्राइल यह संदेश देना चाहता है कि शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विश्व के उन महान नायकों में से हैं जिन्होंने अन्याय के खिलाफ साहस और न्यायपूर्ण शासन की स्थापना की। महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर इस स्मारक को एक जन-परियोजना के रूप में विकसित करने का विचार है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए दोनों देशों के साझा मूल्यों का प्रतिनिधित्व करेगा एवं इसके साथ ही भारत और इस्राइल की मित्रता की मिसाल बनेगा।

महाराष्ट्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा

यानिव रेवाच ने भारत और इस्राइल मित्रता के लिए महाराष्ट्र सरकार से इस पुनीत पहल के लिए अपना बहुमूल्य समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान करने का अनुरोध किया है। दूतावास का मानना है कि ऐतिहासिक संदर्भों को समझने, कलात्मक परामर्श प्राप्त करने, डिजाइन संबंधी विचारों को अंतिम रूप देने और परियोजना को सफल बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार की विशेषज्ञता अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। दूतावास किसी भी अन्य आवश्यक सहायता के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर काम करने के अवसर का स्वागत करने के लिए पूरी तरह से तत्पर है।

इस सहयोग के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच एक मजबूत समन्वय बनेगा, जो परियोजना की सफलता सुनिश्चित करेगा। रेवाच ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि यह पहल न केवल भारत और इस्राइल के बीच दोस्ती को और अधिक मजबूत करेगी, बल्कि साहस, नेतृत्व और आपसी सम्मान के साझा मूल्यों को एक स्थायी श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित करेगी। यह गौरवशाली स्मारक महाराष्ट्र और इस्राइल दोनों की साझा पहचान और उनके गौरवशाली इतिहास का एक अनूठा संगम होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापना के संदर्भ में जानकारी महावाणिज्य दूतावास द्वारा प्रेषित पत्र के तथ्यों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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