महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जमीन अधिग्रहण मामले में 3000 से अधिक किसानों के विरोध के बाद हवाई अड्डे और औद्योगिक परियोजनाओं की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी गई है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
गढ़चिरौली, महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में प्रस्तावित हवाई अड्डे और औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्रशासन ने फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह बड़ा निर्णय पिछले कुछ दिनों से जिला कलेक्ट्रेट पर शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार धरना दे रहे 3000 से अधिक किसानों के उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है। प्रभावित किसान अपनी उपजाऊ जमीन को गढ़चिरौली जमीन अधिग्रहण के तहत औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दिए जाने का पुरजोर विरोध कर रहे थे।[1]
राज्य सरकार ने 12 मई को हवाई अड्डे के निर्माण के लिए लगभग 104 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान की थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 311.81 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना निर्धारित था, जिसमें सरकारी, निजी और वन विभाग की भूमि सम्मिलित थी। यह प्रस्तावित जमीन शिरापुर चक, गुरुवाला, हीरापुर और राखी गांवों से ली जानी थी, जिसके विरोध में किसान सड़कों पर उतर आए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अमोल मरकवार ने इस अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण करार दिया है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन मालिकों की सहमति प्राप्त किए बिना अधिग्रहण के आदेश जारी करना सरासर गलत है। उन्होंने राज्य सरकार से इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की स्पष्ट मांग की है ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके और उन्हें बेदखल होने से बचाया जा सके।
आजाद समाज पार्टी के नेता विवेक खोबरागड़े ने इस विवाद की भयावहता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हवाई अड्डे के लिए पांच गांवों की जमीन का चयन किया गया है। इसके अतिरिक्त, चामोर्शी में जेएसडब्ल्यू ग्रुप के स्टील प्लांट से 14 गांव और लॉयड्स मेटल्स की परियोजना के लिए 13 गांव सीधे प्रभावित हो रहे हैं। उनका दावा है कि इस व्यापक सरकारी फैसले से 6000 से अधिक किसान संकट में हैं क्योंकि गढ़चिरौली जमीन अधिग्रहण के कारण उनकी आजीविका का एकमात्र साधन यानी उपजाऊ खेती वाली जमीन छीनी जा रही है।
शनिवार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के पालक मंत्री आशीष जायसवाल ने प्रदर्शनकारी किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने घोषणा की कि फिलहाल हवाई अड्डे के लिए जारी गढ़चिरौली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस संवेदनशील मामले पर अंतिम निर्णय राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विस्तृत चर्चा के उपरांत लिया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर किसानों की मांगों को महत्व देते हुए उन्हें जिला कलेक्टर के हस्ताक्षर युक्त एक आधिकारिक पत्र भी सौंपा गया, जिसके बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। मंत्री जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि चामोर्शी औद्योगिक टाउनशिप और जेएसडब्ल्यू परियोजना से संबंधित मामलों में किसानों को अपनी आपत्तियां एवं सुझाव दर्ज कराने के लिए 90 दिनों का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा।
गढ़चिरौली जिला ऐतिहासिक रूप से नक्सलवाद से प्रभावित रहा है, लेकिन सुरक्षा बलों की निरंतर सतर्कता और सफलता के बाद अब वहां सामान्य स्थिति और शांति बहाल हुई है। इसी शांति को आधार बनाकर राज्य सरकार वहां खनन आधारित उद्योगों और हवाई अड्डे के निर्माण की योजना पर काम कर रही थी। प्रशासन का मानना है कि इससे क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, जबकि किसान गढ़चिरौली जमीन अधिग्रहण के विपरीत अपनी पारंपरिक खेती और भूमि की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, यह विवाद अब प्रशासनिक आदेशों और विशिष्ट स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बन गया है। किसानों को मिले 90 दिनों के अतिरिक्त समय से उन्हें अपनी बात रखने का बेहतर अवसर प्राप्त होगा। आगामी दिनों में होने वाली उच्च स्तरीय चर्चाओं के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि औद्योगिक विकास की इस राह पर किसान और सरकार किस प्रकार का सामंजस्य बिठा पाते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का यह मामला प्रशासन और स्थानीय किसानों के बीच विचाराधीन है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।