इजराइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति अपील के बावजूद इजराइल-ईरान संघर्ष का तनाव बढ़ता जा रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
तेल अवीव, इजराइल। मध्य पूर्व में तनाव उस समय फिर से चरम पर पहुंच गया जब इजराइल ने ईरान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं। इस ताजा सैन्य संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को भी प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में 3% से अधिक की तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड वायदा 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।[1]
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि इजराइल-ईरान संघर्ष उनके प्रशासन द्वारा तेहरान के साथ की जा रही शांति वार्ता को प्रभावित नहीं करेगा। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि शांति समझौता अभी भी उनकी पहुंच के भीतर है। इस दौरान उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इजराइल की युद्ध नीति का निर्धारण नेतन्याहू नहीं, बल्कि वे खुद करते हैं।
इजराइल रक्षा बलों ने पुष्टि की कि उन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, इजराइल ने इन हमलों के लिए हवा से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग किया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल के रामत डेविड एयर बेस को निशाना बनाया, जिसे इजराइली रक्षा प्रणालियों द्वारा रोकने का दावा किया गया। इजराइल के राजदूत येचियल लीटर ने दावा किया कि ईरान ने इजराइल पर 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद इजराइल ने ईरान की मिसाइल लॉन्च साइटों और बुनियादी ढांचा सुविधाओं पर पलटवार किया।
इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच, तेल अवीव में हवाई हमले के सायरन बजने की खबरें हैं। इजराइली सेना ने यह भी बताया कि उसने यमन से इजराइल की ओर छोड़ी गई एक मिसाइल को भी पहचाना और उसे अपनी वायु रक्षा प्रणालियों के माध्यम से विफल कर दिया। यह घटना अप्रैल महीने के बाद यमन की ओर से इजराइल पर पहला प्रत्यक्ष हमला है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने चेतावनी दी है कि इजराइल के हमले और लेबनान समझौतों के उल्लंघन के कारण इजराइली संपत्तियां और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकाने उनके वैध लक्ष्य बने रहेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति के बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर बातचीत की। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से आगे और हमले न करने का आग्रह किया क्योंकि वे शांति समझौते के बहुत करीब हैं। हालांकि, इजराइल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना अभियान जारी रखे हुए है। इजराइली अधिकारियों का तर्क है कि लेबनान में संघर्ष को ईरान के साथ किसी भी संभावित संघर्ष विराम से अलग माना जाना चाहिए।
तेहरान का रुख स्पष्ट है कि अमेरिका के साथ कोई भी शांति समझौता तब तक सफल नहीं होगा जब तक कि लेबनान में संघर्ष विराम न हो जाए। हिजबुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि जब तक इजराइल लेबनान पर हमले नहीं रोकता और वहां से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता, तब तक वे हथियार नहीं डालेंगे। नेतन्याहू ने कहा है कि बेरूत के उपनगरों में इजराइली हमले हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर की गई फायरिंग के जवाब में किए गए हैं।
इस इजराइल-ईरान संघर्ष का सीधा असर ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का मुख्य पारगमन मार्ग है, लंबे समय से तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर यातायात अवरुद्ध करने के प्रयासों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है। अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू कर रखी है। ट्रंप का कहना है कि किसी भी शांति समझौते के लिए यह अनिवार्य है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे।
हालांकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच व्यापार मार्गों को फिर से खोलने के लिए प्राथमिक समझौते की चर्चा चल रही है, लेकिन हालिया सैन्य झड़पों ने इसे मुश्किल बना दिया है। ईरान ने अपनी फ्रीज की गई संपत्ति को खाड़ी देशों को हस्तांतरित करने की अमेरिकी योजना का विरोध किया है और इसे अवैध करार दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान की संपत्ति के साथ छेड़छाड़ की गई, तो तेहरान इसका कड़ा जवाब देगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। इजराइल-ईरान संघर्ष और संबंधित शांति वार्ता एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।