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भोजशाला परिसर विवाद: मूर्ति हटाने पर छिड़ा घमासान

भोजशाला परिसर में कोर्ट के आदेश के बाद मूर्ति स्थापना हुई थी। इसके तीन सप्ताह बाद एएसआई द्वारा उसे हटाए जाने से भोजशाला परिसर विवाद पैदा हो गया है।

By अजय त्यागी 1 min read
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भोजशाला परिसर - File Photo

धार, मध्य प्रदेश। भोजशाला परिसर विवाद उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब परिसर के भीतर स्थापित की गई वाग्देवी की एक अष्टधातु मूर्ति को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा हटाए जाने की जानकारी सामने आई। हाई कोर्ट द्वारा इस ऐतिहासिक स्मारक को आधिकारिक तौर पर मंदिर घोषित किए जाने के बाद मूर्ति स्थापित की गई थी और अब तीन सप्ताह बाद मूर्ति को हटाए जाने की इस घटना ने पूरे क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया है।[1]

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने 15 मई को दो प्रमुख जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए भोजशाला को वाग्देवी सरस्वती का मंदिर घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। न्यायालय ने आदेश दिया था कि परिसर के संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों का पूर्ण नियंत्रण एएसआई के पास रहेगा, लेकिन इस हालिया कार्रवाई ने मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

एएसआई की कार्रवाई पर सवाल

ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर विवाद के बीच एएसआई की चुप्पी ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं। जब इस पूरे विवाद और मूर्ति हटाए जाने के आरोपों के बारे में एएसआई के धार क्षेत्र के अधिकारी प्रशांत पाटणेकर से मीडिया द्वारा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई भी आधिकारिक बयान देने से स्पष्ट मना कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया के समक्ष बोलने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है। एएसआई का यह रवैया हिंदू संगठनों के बीच आक्रोश का कारण बन रहा है और भोजशाला परिसर विवाद को और अधिक तूल दे रहा है।

प्रशासन की सतर्कता

रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने मीडिया को बताया है कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के 15 मई के आदेश और भोजशाला परिसर विवाद से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रहे।

कानूनी दांवपेच

भोजशाला परिसर विवाद में दोनों पक्षों के कानूनी दावे आमने-सामने हैं। हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता इस बात पर अड़े हैं कि लंदन संग्रहालय में रखी गई वाग्देवी की मूल प्रतिमा को जल्द से जल्द भारत लाया जाए।

यह मांग उस समय और अधिक मुखर हो गई है जब से हाई कोर्ट ने भारत सरकार को इस दिशा में विचार करने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार लंदन स्थित प्रतिमा को वापस लाने के विकल्पों पर गौर कर सकती है।

विवाद का विस्तार

इसके विपरीत, कमल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के प्रमुख जुल्फिकार पठान ने इन गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। जुल्फिकार पठान का कहना है कि हाई कोर्ट की टिप्पणियों के आलोक में, परिसर के भीतर नई मूर्ति नहीं रखी जा सकती।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह मांग भी रखी है कि परिसर की दीवारों पर मौजूद प्राचीन इस्लामी शिलालेखों को सरकार द्वारा पूर्ण रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए, जो इस भोजशाला परिसर विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। भोजशाला परिसर विवाद से जुड़ी यह कार्रवाई प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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