कनाडा सरकार ने जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए 150 मिलियन डॉलर की नई ऋण सहायता योजना की घोषणा की है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
ओटावा, कनाडा। कनाडा सरकार ने देश के विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत प्रदान करते हुए सोमवार को एक नई ऋण योजना की शुरुआत की है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह कार्यक्रम घरेलू एयरलाइंस को जेट ईंधन की आसमान छूती कीमतों से निपटने, परिचालन जारी रखने और रोजगार बचाने में मदद करेगा। ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में जेट ईंधन की लागत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे एयरलाइंस के मुनाफे पर बुरा असर पड़ा है और उनकी भविष्य की परिचालन क्षमता खतरे में पड़ गई है।[1]
दुनिया भर की एयरलाइंस इस समय गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं, जिससे उनकी बैलेंस शीट तनावपूर्ण हो गई है। ऐसी परिस्थितियों में कई देशों की सरकारें अपने घरेलू वाहकों को समर्थन देने पर विचार कर रही हैं ताकि हवाई किराए किफायती बने रहें और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहे। कनाडा सरकार की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य विमानन क्षेत्र को मौजूदा वैश्विक ईंधन झटके से सुरक्षित निकालना है।
इस ऋण कार्यक्रम के तहत, कनाडा सरकार पात्र एयरलाइंस को 150 मिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 107.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक की प्रतिदेय तरलता सहायता प्रदान करेगी। हालांकि, इस सहायता का लाभ लेने वाली एयरलाइंस के लिए कुछ सख्त शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। इन कंपनियों को अपने शीर्ष अधिकारियों के मुआवजे पर प्रतिबंध लगाना होगा और अपनी घरेलू परिचालन सेवाओं को किसी भी स्थिति में निरंतर बनाए रखना होगा। सरकार इस तरह संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
सरकार का यह निर्णय एक कठिन संतुलन का परिचायक है क्योंकि वे विमानन उद्योग को बचाने के साथ-साथ मुक्त बाजार के सिद्धांतों की रक्षा भी करना चाहते हैं। वित्त मंत्री के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा विमानन क्षेत्र को 'तत्काल और विशिष्ट तरलता सहायता' प्रदान करने के लिए बनाई गई है। यह कदम सभी प्रमुख एयरलाइंस के साथ विस्तृत चर्चा के बाद उठाया गया है ताकि इस अभूतपूर्व वैश्विक ईंधन संकट के दौरान उद्योग को ढहने से बचाया जा सके।
कनाडा की एयरलाइन वेस्टजेट ने ओटावा के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। वेस्टजेट का तर्क है कि सरकार को ऋण देने के बजाय देश के विमानन उद्योग के लिए एक स्थायी भविष्य बनाने पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी के अनुसार, बाजार को विकृत करने वाली सब्सिडी देने के बजाय एक समान और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना अधिक जरूरी है। उनका कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने एयरलाइंस को बेलआउट देने से परहेज किया है ताकि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
दूसरी ओर, देश की सबसे बड़ी एयरलाइन एयर कनाडा ने इस ऋण योजना पर अलग रुख अपनाया है। एयर कनाडा के अनुसार, उनकी बैलेंस शीट काफी मजबूत है जिसे ईंधन की कीमतों में हालिया उछाल जैसी घटनाओं को देखते हुए ही तैयार किया गया था। एयर कनाडा का मानना है कि वे इस स्थिति का प्रबंधन करने और खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने में सक्षम हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति के आधार पर सरकार की इस सहायता का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका में भी विमानन कंपनियां वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं। परिवहन सचिव शॉन डफी ने पिछले महीने स्पष्ट किया था कि सरकार को उन कम लागत वाली एयरलाइंस को बेलआउट देने की आवश्यकता नहीं है जिन्होंने 2.5 बिलियन डॉलर की राहत मांगी थी। उन्होंने एयरलाइंस को निजी बाजार की ओर रुख करने की सलाह दी थी। जेट ईंधन के संकट ने मई में ही अपनी पहली बलि ले ली थी जब अमेरिकी कंपनी स्पिरिट एयरलाइंस को अपना परिचालन बंद करना पड़ा था।
इसके अलावा, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने सोमवार को अमेरिकी एयरलाइन जेटब्लू की क्रेडिट रेटिंग को और अधिक नीचे गिरा दिया है। ईंधन की लागत में भारी वृद्धि के कारण जेटब्लू को लगातार नुकसान हो रहा है, जिससे वे 'जंक' श्रेणी में पहुंच गए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि विमानन क्षेत्र के लिए चुनौतियां कितनी विकराल हैं। वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में स्थिरता के बिना विमानन कंपनियों का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। विमानन क्षेत्र की सरकारी ऋण योजनाओं एवं वैश्विक ईंधन संकट से संबंधित यह जानकारी वर्तमान आर्थिक विश्लेषण पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।