11,578 फीट की ऊंचाई पर निर्मित जोजिला टनल का सफल ब्रेकथ्रू संपन्न हुआ है, जिससे कश्मीर और लद्दाख के बीच साल भर चलने वाली कनेक्टिविटी का सपना साकार हो रहा है।
जोजिला टनल
लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश। भारत की बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मंगलवार को जोजिला टनल के अंतिम ब्रेकथ्रू को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक भव्य समारोह में रिमोट का बटन दबाकर इस उपलब्धि को सुनिश्चित किया। समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग न केवल इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन नमूना है, बल्कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए एक जीवनरेखा के रूप में कार्य करेगी।[1]
जोजिला टनल का निर्माण सामरिक और भौगोलिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विश्व की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब द्वि-दिशात्मक (bi-directional) सड़क सुरंग है, जो कठोर हिमालयी वातावरण में बनाई गई है। लद्दाख का शेष भारत से सर्दियों के छह महीनों के दौरान संपर्क टूट जाता था, लेकिन इस सुरंग के बनने से अब साल भर आवागमन सुगम हो पाएगा। यह परियोजना न केवल आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमाओं पर सैन्य रसद और तैनाती में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस अवसर पर कहा कि यह भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में एक स्वर्णिम दिन है। उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक सुरंग को दुनिया के सर्वोत्तम सुरक्षा मापदंडों और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के साथ तैयार किया गया है। परियोजना की जटिलता को देखते हुए इसे चार बार टेंडर करना पड़ा, लेकिन सटीक योजना के कारण इसकी लागत को 12,000 करोड़ रुपये से घटाकर 7,000 करोड़ रुपये करने में सफलता मिली है, जिससे सरकारी खजाने के 5,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
सुरंग के निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग किया गया है, जो नाजुक हिमालयी पहाड़ों के लिए सबसे उपयुक्त है। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) की टीम ने शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान में भी दिन-रात काम करके इस सपने को हकीकत में बदला है। सुरंग का आकार घोड़े की नाल जैसा है, जिसकी लंबाई 13.153 किलोमीटर, चौड़ाई 9.5 मीटर और ऊंचाई 7.57 मीटर है, जो इसे तकनीकी रूप से बेहद उन्नत बनाती है।
"परियोजना लद्दाख के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा के रूप में कार्य करती है, और मैं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर दोनों के निवासियों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।"
सुरंग का सामरिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह भारत और चीन के साथ-साथ पाकिस्तान की सीमाओं पर सैनिकों की त्वरित और सुरक्षित आवाजाही को सुगम बनाएगी। नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के अधिकारियों के अनुसार, ब्रेकथ्रू निर्धारित समय से छह महीने पहले हासिल किया गया है। सुरंग को फरवरी 2028 में जनता के लिए खोले जाने की संभावना है। निर्माण पूरा होने के बाद, जोजिला दर्रा पार करने का समय वर्तमान के तीन घंटे से घटकर मात्र 30 मिनट रह जाएगा।
इस निर्माण प्रक्रिया में 1,200 से अधिक कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर काम किया है। पिछले पांच वर्षों में परियोजना स्थल को पांच बड़े हिमस्खलन का सामना करना पड़ा है, जिसमें मशीनरी और उपकरणों को भी नुकसान पहुँचा। जनवरी 2023 में भारतीय सेना ने हिमस्खलन में फंसे 172 श्रमिकों को सफलतापूर्वक निकाला था। ये सभी चुनौतियां इस परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सुरक्षा की दृष्टि से इसके महत्व को रेखांकित करती हैं। जोजिला टनल न केवल एक परिवहन मार्ग है, बल्कि यह राष्ट्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक मजबूती का एक मुख्य आधार भी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। जोजिला टनल परियोजना की तकनीकी और सामरिक जानकारी सरकारी आधिकारिक बयानों और एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।